देश के विकास में टेक्स का महत्व

किसी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कर प्रणाली महत्वपूर्ण है,

प्रत्यक्ष कर- यह उन लोगों पर लगते हैं।जो बहुत अमीर अर्थात करोड़पति या अरबपति,कारपोरेट होते हैं, इनकी संख्या भारत में दो करोड़ के लगभग है।

किसी देश के विकास में अप्रत्यक्ष-प्रत्यक्ष करदाताओं का विशेष महत्व में जातिगत बिशलेषण!

किसी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कर प्रणाली महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश के विकास में करों का योगदान से लोगों के जीवन पर भी विशेष महत्व एवं असर डालतें है। कर दो प्रकार के होते हैं, जैसे – (1)प्रत्यक्ष कर (2) – अप्रत्यक्ष कर

(1)- प्रत्यक्ष कर – यह उन लोगों पर लगते हैं।जो बहुत अमीर अर्थात करोड़पति या अरबपति, कारपोरेट होते हैं, इनकी संख्या भारत में दो करोड़ के लगभग है। प्रत्यक्ष करदाता व्यवसायी, लघु व्यवसायियों की संख्या करीब दो करोड़ हो सकती है, सीधे प्रत्यक्ष करदाता कहलाते है, देश के विकास में सीधे योगदान देते हैं।

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(2)-खरीद-बिक्री पर लगे को चुकता करने वाले अप्रत्यक्ष करदाताओं की संख्या एक सौ तीस करोड़ से अधिक क्योंकि देश की आबादी सीधे उपभोक्ता जो समान की खरीद पर करदाता को कर देते हैं। जिन्हें अप्रत्यक्ष कर कहते हैं। अप्रत्यक्ष करदाताओं से करदाता पैदा होते हैं।अप्रत्यक्ष करदाताओं के धन से ही देश चलता है। किसी देश के विकास में अप्रत्यक्ष कर देने वाले भारत से अधिक गरीब नहीं होंगे। फिर भी एससी-एसटी पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यक वर्ग जातियों को अपमानित करने में करदाता कोई कोर कसर नहीं छोड़ते है,यही करदाता सबसे अधिक गरीब है।
बिकसित देशों में अप्रत्यक्ष करदाताओं की संख्या कम होती है, बल्कि प्रत्यक्ष करदाताओं की संख्या सबसे अधिक होती है। भारत में आर्थिक असमानता बहुत अधिक होने के कारण ही विकासशील देश है। जब तक आर्थिक असमानता का स्तर कम नहीं होगा।तब तक भारत विकसित देश कभी नहीं बन सकता।
बिकसित देशों के उधोगपति अपने देशों की सरकारों से स्वयं यह कहते हैं,कि जनता पर कम कर लगाओ। जितना कर का लोगों पर बोझ कम होगा, उत्पादश-उत्पादकता की बिक्री उतनी अधिक होगी। जनता पर कर के बोझ का दवाव कम होने से बाजार पर असर कम होने से मुद्रा सर्कुलेशन का चक्र तेजी से चलेगा, तो बाजार में खरीद बिक्री अधिक होने से करोबार तेजी से आगे बढ़ेगा। देश की अर्थव्यवस्था अर्थात ढांचा अधिक मजबूत एवं उपयोगी होगा,ऐसी सोच विकसित देशों की होती है।
विकासशील देशों की सोच विकसित देशों के बिपरीत होती है। भारत एक विकासशील देश है, इसलिए खरीद विक्री पर कर अधिक लगते है। जिन्हें हर आम आदमी भरता है।भारत में प्रत्यक्ष कर कम है, जो है, उनमें व्यवसायी, लघु व्यवसायी आऊटलेट है, उद्योगपति करदाता होने के साथ साथ सरकार से अधिक लाभ कमाते हैं। करों का सारा बोझ अप्रत्यक्ष करदाताओं पर अधिक होता है। भारत ने कारपोरेट घरानों को मोदी सरकार करों बहुत बढ़ी सहूलियतें दीं हैं। जिसके कारण अप्रत्यक्ष करों में बढ़ोतरी के साथ पैकेटों में नेट बजन कम किया, तथा टैक्स सेम रहा। जिसके कारण आम आदमी पर कर का बोझ बढ़ने से बाजार पर असर हुआ, खरीद बिक्री कम हुईं। क्योंकि उत्पादन घटा और मंहगाई दिन प्रतिदिन बढ़ते मुद्रा स्फीति दर का देश की बिकास दर पर असर डालती है। जिस पर लोगों का जीवन जुड़ा हुआ होता हैं।
भाजपा की मोदी सरकार कह रही है।कि भारत दुनिया की पांचवीं मुद्रा बन चुका है, तीसरी बढ़ी मुद्रा बनने जा रहा है। इससे आम आदमी के जीवन में क्या बदलाव हुआ। यदि नहीं तो फिर राजकोषीय मुद्रा बिकास दर बढ़ने से राजसत्ता के लोगों को तो लाभ हो सकता है, लेकिन आम आदमी को कोई लाभ नहीं हो सकता।जिस तेजी से राजकोषीय मुद्रा भंडारण बढ़ने से राजकाज में तेजी आ सकती, बल्कि लोगों के जीवन में सुधार के लिए उत्पादन पर उपभोक्ताओं कमी होने का सीधा असर लोगों के‌ जीवन पर पड़ता है।
उत्पादन उपभोक्ता नीति नियमों का खरीद बिक्री,मुद्रा स्फीति दर जितनी तेजी से आगे बढ़ेगी। उतनी तेजी से लोगों के जीवन में सुधार संभव हो सकता है। जिससे व्यवसाय,रोजगारों की संख्या बढ़ने से शिक्षित वेरोजगारी कम होगी, रोजगार के अवसर बढ़ने से हर हाथ को काम मिलने से भारत विकसित देश बनने से कोई नहीं रोक सकता। परंतु मोदी का आर्थिक नीति से कारपोरेट घरानों को लाभ पहुंच रहा गांव किसान शिक्षित वेरोजगारों को नुकसान पहुंच रहा है। जिससे गांव किसान मजदूर वेरोजगारों की फौज बढ़ रही है। कारपोरेट नीति से लघुउधोगों को नुकसान पहुंच रहा है। जिससे उत्पादन बढ़ने की अपेक्षा उपभोक्ता घटने से आर्थिक नीति कमजोर होने से देश के लोगों का विकास नहीं हो पा रहा है,यही लोग कमजोर एवं गरीब हैं।
विकास दर बढ़ने से गरीवी दूर नहीं हो सकती,देश में आर्थिक परिवर्तन में देश के लोगों का विकास जरूरी,लोगों की विकास दर समानता के लिए लोगों की भागीदारी बहुत जरूरी, होने से आर्थिक असमानता को दूर किया जा सकता है,कारपोरेट उत्पादन,अंतरराष्ट्रीय बिक्री दर बढ़ने से अमीर और अमीर बनेगा। गरीब और अधिक गरीब होगा।जिसका असर किसी देश के लोगों के जीवन के लिए बहुत ही ख़तरनाक हो सकता है।
भारत में मोदी सरकार की अर्थनीति के कारण देश की जनता अधिक गरीब होती जा रही है।अमीर और अधिक अमीर होता जा रहा है। यह भाजपा की बिशेष उपलब्धि से एससी-एसटी,पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यक वर्ग जातियों के लोगों को नुकसान पहुंच रहा, जिसे समझना बहुत जरूरी है।
भारत की जनता ने लेबर पार्टी आफ इंडिया को मजबूत किया, तो हम अप्रत्यक्ष कर कम करेंगे, और प्रत्यक्ष करों में संशोधन करके तीन स्लेप बनायेंगे। एक कारपोरेट कर, दूसरा व्यवसायी,तीसरा लघु व्यवसायी करों को अलग अलग निर्धारण करेंगे। खरीद बिक्री को बढ़ाकर देश को विकसित बनायेंगे।
उत्पादन कर लगाकर बिक्री दर पर करमुक्त करके खरीद बिक्री बढ़ने से आमदनी के जीवन में बदलाव लाया जा सकता है। जिसके कारण कच्चा माल रेट+मुनाफा+रिटेलर रेंट की बिसंगतियों को दूर करना लेबर पार्टी आफ इंडिया का प्रयास रहेगा। जिसके कारण मुनाफा कम करके महंगाई को रोका जा सकता है। मुनाफा उत्पादन कर एक बार लगने के बाद बिक्री दर पर टैक्स कम करने का एक तरीका है, सभी टैक्स उत्पादन पर लगे और नेट बिक्री दर निर्धारण सही से होने पर ओवररेट मुनाफा रोकने से मुनाफा दर कम करके महंगाई कम किया जा सकता है।जिससे लोगों के जीवन पर असर पड़ेगा, जो बहुत जरूरी है।
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एससी – एसटी, पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यक वर्ग जातियों के लोग, जितनी जल्दी संविधान में निहित वर्गवादी जाति व्यवस्था मजबूत करने समझने – समझाने का प्रयास करेंगे उतना ही जातिवादी व्यवस्था कमजोर होगी और वर्गवादी जाति व्यवस्था मजबूत होगी। जिसके कारण स्वार्थी जातिवादी संगठन – नेतृत्व कमजोर होने से वर्गवादी संगठन नेतृत्व मजबूत होगें। जिसके कारण वर्ग जातियों के लोग उपजातियों में बंटने की जगह शिक्षित, संगठित, संघर्ष करके सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक न्याय में भागीदारी, सत्तासीन बहुजन शोषित समाज के हाथ मजबूत होने से कोई नहीं रोक सकता। लेबर पार्टी आफ इंडिया ऐसा ही समाज बनाने में लगी हुई है, शोषित वर्ग जातियों को समझना होगा।
लेबर पार्टी आफ इंडिया का मानना है, कि एकल जाति तोड़ो, वर्ग जाति व्यवस्था को मजबूत करो, जो संविधान में संवैधानिक अधिकारों से लैस होने के बाबजूद जातिवाद की बलि चढ़ती जा रही है। वर्गवादी जातिवाद की एकता से ही शोषित पीड़ित बंचित वर्ग मजबूत हो सकते है, इसके अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है, इसलिए जातिवाद स्वार्थी संगठन नेतृत्व को त्याग कर वर्गवादी संगठन नेतृत्व में विश्वास मजबूत करने से शोषित वर्ग जातियों का विकास होना बहुत जरूरी है।
पूंजीवाद अर्थात ब्रहामणबाद हमेशा यह प्रयास करता रहेगा,कि ब्रहामणी उपजातियां मजबूत रहें।इसका सीधा असर एससी – एसटी, पिछड़ी जाति वर्ग जातियों जिन्हें बहुजन शोषित समाज कहते, वह आपस में बिघटित रहें। जिसके कारण सामाजिक, राजनैतिक,आर्थिक न्याय के अधिकारों से बंचित रहने से बहुजन शोषित समाज के लिए बहुत ही घातक है। इसलिए संबिधानबादी, लोकतांत्रिक अंबेडकरवादी विचारधारा को मजबूत करना होगा, इसके अलावा कोई उपाय नहीं?आज तक जो उपाय किए गए हैं।वह काफी नहीं? बल्कि शून्य रहे है। लेबर पार्टी आफ इंडिया ऐसे ही उपायों की खोज से शोषित वर्ग को मजबूत करने का प्रयास कर रही है। 

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