विकसित भारत के सपने को साकार करेगा विश्व उर्दू सम्मेलन 2025

भारत सरकार का केंद्रीय मंत्रालय उद्घाटन सत्र हो आलमी मुशायरा हो

इंडिया इंटरनेशनल तीनों जगहों पर 24 घंटे वातावरण उर्दू कला संस्कृति और साहित्य से शराबोर रहा।

विकसित भारत के सपने को साकार करेगा विश्व उर्दू सम्मेलन 2025


डॉ क़ासिम खुर्शीद

उर्दू हिंदी के अत्यंत लोकप्रिय रचनाकार शिक्षाविद डॉ क़ासिम खुर्शीद जब एन सी पी यू एल द्वारा दिल्ली के भव्य इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय विश्व उर्दू सम्मेलन 2025 की अविस्मरणीय सफलता के बाद पटना लौटे तो उन्होंने हमारे संवादाता से बात करते हुए विस्तार से कॉन्फ्रेंस की सफलता पर ज़ोर देते हुए बताया कि यूं तो मुझे 2019 के वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस में भी आमंत्रित किया गया था उक्त आयोजन भी अपनी सतह पर कामयाब था मगर उसके बाद इस आशय का कोई भव्य प्रोग्राम नहीं हुआ था मगर 2025 के इस आयोजन की सब से बड़ी विशेषता ये रही की इस में विभिन्न देशों के साहित्यकारों ने पूरी तन्मयता के साथ हिस्सा लिया और 2047 के विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए विश्व स्तर पर उर्दू की व्यवहारिक भूमिका पर बहुत जोर दिया । भारत सरकार का केंद्रीय मंत्रालय उद्घाटन सत्र हो आलमी मुशायरा हो विभिन्न तकनीकी सत्र हों सूफी गायन या कृष्ण की लीला पर केंद्रित उर्दू शायरी नृत्य संगीत कार्यक्रम हर जगह भव्यता देखी गई। रोज़ हर प्रोग्राम में दर्शकों की भीड़ ,जो हॉल के बाहर और पूरी दुनिया से भी जुड़ी रही और लगातार ये सिलसिला क़ायम रहा। होटल अशोक का आला दर्जे का इंतज़ाम हो जामिया गेस्ट हाउस और इंडिया इंटरनेशनल तीनों जगहों पर 24 घंटे वातावरण उर्दू कला संस्कृति और साहित्य से शराबोर रहा। डॉ क़ासिम खुर्शीद ने मुशायरे में अपनी बेपनाह सफलता के लिए विशेष रूप ने बेहद स्तरीय श्रोताओं का दिल की गहराई से शुक्रिया अदा करते हुए ये भी बताया कि भारत से बाहर से भी आए हुए साहित्यकारों पर केंद्रित उस सत्र में जहां विश्व की उर्दू आबादियों की सेवाओं पर चर्चा हुई उस में भी विशेष रूप से मुझे वक्तव्य और प्रतिक्रिया हेतु पैनल में शामिल किया जिस में मैं ने तमाम पेश किए पर्चे पर अपना एक्सपर्ट कमेंट दिया जिसे बेहद पसंद किया गया और सत्र के बाद भी ताशकंद नेपाल दुबई मसकत टोरंटो आदि के साहित्यकारों से बहुत ही खूबसूरत गुफ्तगू की। मैं अवसर मिला तो इस पूरे आयोजन पर अपना एक लंबा संस्मरण भी अवश्य लिखना चाहूंगा। भारत सरकार के अलावा कौंसिल के बेहद मेधावी डायरेक्टर डॉ शम्स इक़बाल के इस ऐतिहासिक प्रयास के लिए दिल की गहराई से बधाई भी पेश करता हूं। मैं इस आयोजन से आश्वस्त हूं कि विश्व उर्दू सम्मेलन 2025 विकसित भारत के 2047 के सपने को साकार करेगा और ये भी दुआ करता हूं कि।
गूफ्तगू बंद न हो
बात से बात चले

ZEA
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