सिलमपुर में आपसी रंजिश के कारण हत्या – सम्परादायिक माहौल बनाने की कोशिश ?
आम आदमी पार्टी को हराकर सत्ता में आई भाजपा दिल्ली के सीलमपुर में अपने फॉर्मूलों के आधार पर एक नई प्रयोगशाला बनाने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने और घर के सदस्यों ने पूरे मामले को इस तरह बताया- साहिल नाम के एक युवक की शंभू से पुरानी रंजिश थी। शंभू के भाई लाला ने भी साहिल को मारा था।
*सीलमपुर हत्या कांड: सांप्रदायिक तनाव पर जन हस्तक्षेप की जांच रिपोर्ट*

जन हस्ताक्षेप टीम की विशेष रिपोर्ट


वरिष्ठ पत्रकार अनिल दुबे की समीक्षा
एक बार फिर पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर क्षेत्र में बजरंग दल विश्व हिन्दू परिषद मौके पर चौका लगाने की फ़िराक़ में हैं, इस बार मुद्दा है एक हिन्दू लड़के की आपसी रंजिश में हत्या, लेकिन दुर्भाग्य से मुस्लिम युवा लड़के के साथ सम्बंध के कारण हिन्दू के ठेकेदारों को सम्प्रादायिक उन्माद फैलाने अवसर मिल गया, उस पीड़ित परिवार को मुआवजा दिलवाने के बजाए उसके दरवाजे पर धरना दे कर झूठ फैलाने का रोज़ नया शोशा छोड़ रहे हैं । यह मनुवादी सरकार का शायद दूसरा प्रयोगशाल होगा जैसे गुजरात में आरएसएस-बीजेपी की प्रयोगशाला के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लव जेहाद व धर्मांतरण जैसे सवालों को उठाकर मुजफ्फरनगर में 2013 में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे कराए गए। उसके बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 से ठीक पहले 2016 में कैराना के भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने बड़ी संख्या में हिंदुओं के पलायन का सवाल उठाया, जो राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना गया। विधानसभा चुनावों में सांप्रदायिक माहौल का लाभ भाजपा को मिला और पहली बार वह उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई। भाजपा वही नीति लगभग हर राज्यों में अपना कर कुछ इसी प्रकार प्रयोग करते हुए 2020 में उत्तरपूर्वी दिल्ली को दंगे की आग में झोंक चुकी है जिसका मुख्य पात्र कपिल मिश्रा बने थे जो अभी दिल्ली में मंत्री हैं, जो कुछ माह पूर्व हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को हराकर सत्ता में आई भाजपा दिल्ली के सीलमपुर में अपने फॉर्मूलों के आधार पर एक नई प्रयोगशाला बनाने का फिर से प्रयास कर रही है।

मामला कुछ है इस प्रकार है। 17 अप्रैल को सीलमपुर में कुणाल नाम के एक लड़के की चाकू मार कर हत्या कर दी गई। उसके बाद कॉरपोरेट मीडिया में भाजपा, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के नेताओं के तनाव फैलाने वाले सांप्रदायिक बयान और वहां से हिंदुओं के पलायन की खबरें आने लगीं। इसके मद्देनजर जन हस्तक्षेप ने अपनी एक जांच टीम 20 अप्रैल 2024 को सीलमपुर भेजने का फैसला किया।
जांच टीम के सदस्य-
– अनिल दुबे- जन हस्तक्षेप सहसंयोजक और वरिष्ठ पत्रकार
– एस एस नेहरा- एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट
– एम जेड अली हैदर- एडवोकेट
जन हस्तक्षेप की जांच टीम 20 अप्रैल 2025 को प्रातः 10 बजे सीलमपुर स्थित वारदात स्थल पर पहुंच गई। वहां हालात का जायजा लिया और इलाके के स्थानीय निवासियों और मृतक युवक के परिजनों से मुलाकात कर उनका बयान दर्ज किया।
*मृतक की मां, पिता और पड़ोसियों के बयान-*

जांच दल ने मृतक युवक कुणाल के घर जाकर उनकी मां परबीन और पिता राजवीर सिंह से मुलाकात की। परबीन और राजवीर के तीन बेटे और दो बेटियां हैं, जिसमें से कुणाल की हत्या हो चुकी है। पिता राजवीर ने बताया कि वह लंबे समय से बीमार हैं और उनकी मां भी बीमार रहती हैं। परिवार में काम करने वाले दो बच्चे हैं, जिसमें से एक बेटे कुणाल को मार दिया गया है। वह बताते हैं कुणाल 17 वर्षीय युवा था। पढ़ाई छोड़कर गांधीनगर की फैक्ट्री में बेल्ट बनाने का काम करता था। कुणाल का घर 25 गज के प्लांट में निर्मित है। यह ग्राउंड फ्लोर पर एक/डेढ़ कमरे का मकान है। वहां सड़क/गली पर परिवार व दूसरे अन्य पड़ोसी बैठे थे। आसपास दिल्ली पुलिस के जवान तैनात थे, जबकि सीलमपुर से सटे जीटी रोड पर रैपिड एक्शन फोर्स की भी तैनाती थी। राजवीर ने बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि उन्हें आर्थिक सहायता और परिवार के एक बच्चे को नौकरी देनी चाहिए।

कुणाल की मां परबीन ने बताया कि वह यहां जे ब्लॉक में 50 वर्षों से रह रहे हैं। कुणाल पढ़ाई छोड़ करके नौकरी करता था। उन्होंने बताया कि कुणाल की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। वह रोते हुए बताती हैं कि वह निर्दोष था। मैं नहीं जानती उसे क्यूं मारा गया। उन्होंने भी परिवार की आर्थिक बदहाली का जिक्र किया। मीडिया में आए उनके बयानों में दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग है, – लेकिन जांच दल के समक्ष उन्होंने ऐसी मांग नहीं रखी। स्पष्ट है कि मीडिया, झूठा प्रचार कर भरम फैलाने की कोशिश रहा है? उन्होंने और घर के सदस्यों ने पूरे मामले को इस तरह बताया-
साहिल नाम के एक युवक की शंभू से पुरानी रंजिश थी। साहिल ने कुछ समय पूर्व शंभू को मारा-पीटा और सर फोड़ दिया था। इससे पहले शंभू ने साहिल को मारा था। उस समय वहां कुणाल भी खड़ा था। *लोगों का अनुमान है कि कुणाल की हत्या उस समय वहां मौजूद बीच बचाव करने के कारण हुई होगी।* शंभू के भाई लाला ने भी साहिल को मारा था। साहिल वह युवक है जिसकी चचेरी बहन ज़िकरा है, जिसने तमंचा लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो डाला था। आज कल युवाओं, युवतियों में रील बनाने का शौक अधिक है, अब ज़िकरा के इस शौक ने उसे लेडी डॉन बन दिया। अब ज़िकरा भी मुजरिम सिर्फ इसलिये है कि एक तो उसने तमंचा के साथ अपनी फोटो सोशल मीडिया पर डाल और दूसरे, आरोपी सुहैल की चचरी बहन है।
*गली के लोगों का आरोप है कि वह लड़कों के साथ हथियार लेकर घूमती है। हालांकि ज़िकरा का मुकदमा देख रहे एडवोकेट ने जांच टीम को फोन पर हुई बातचीत में बताया कि 15-20 दिन पहले उस पर आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था, लेकिन इससे पहले उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और ना ही उसके ऊपर किसी भी तरह का केस दर्ज है। फिलहाल कारपोरेट मीडिया ज़िकरा को लेडी डॉन के नाम से कुख्यात कर रहा है।
कुणाल के परिजनों के पास मौजूद पड़ोसी कन्हैया ओडवाल ने बताया कि “जिकरा और साहिल का मामा सोहेब बिल्डर है। वह मकान खरीदने, बेचने और बनाने का काम करता है। दबंगई के लिए वह टीनएजर लड़कों का गैंग रखता है और जिकरा उन लड़कों की गैंग लीडर है। सोशल मीडिया पर पिस्तौल लहराते वीडियो डालने के कारण वह पिछले दिनों गिरफ्तार की गई थी।
उन्होंने बताया कि यहां माहौल बहुत खराब है। बीते वर्षों में इसे मिला कर 7 युवकों के कत्ल हुए हैं। इस डर से अब तक 12-13 लोग मकान बेचकर जा चुके हैं। कौन से मकान बिके हैं, वह यह नहीं दिखा सके।
*आसपास का माहौल-*
कुणाल के घर के बाहर टेंट लगा हुआ है और लोग आ-जा रहे हैं। वहां एक बड़े बैनर पर कुणाल सहित 7 लोगों के फोटो लगे हैं, जिसमें कुणाल का नाम “कुणाल हिंदू सनातनी” लिखा हुआ है और हत्या की तारीख 17-4-2025 लिखी है। इसी तरह राजकिशोर सनातनी हत्या का दिन 22-10- 2024, रंजीत सनातनी 14-9-2017, राजेश सनातनी 17-12 -2016, चिंटू सनातनी 24-12- 2013, दिनेश सनातनी 4 -1- 2012 और एक अन्य युवक की हत्या की तारीख बैनर पर लिखी है। लोगों से यह पूछने पर कि सनातनी क्या उनके गोत्र या जाति का नाम है ? इस पर लोग बगली झांकने लगे। इसी गली के 10-12 घरों में हाथ से लिखा और प्रिंटेड पोस्टर लगे हैं, जिन पर लिखा है “योगी मॉडल लाना है, पलायन होने से बचाना है। मोदी जी, अमित शाह जी कृपया मदद करें। हिंदू पलायन कर रहा है, हमें चाहिए योगी की कानून व्यवस्था।”
यह बैनर, पोस्टर, दरी व शामियाने किसने लगवाए ? (परिवार की माली स्थिति ऐसी नहीं है कि वह इस इंतजाम पर खर्च कर सके) यह पूछे जाने पर कुणाल के पिता राजवीर ने बताया कि बीजेपी, बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद से बहुत सारे लोग आ रहे हैं। उन्हीं में से किसी ने लगवाया होगा। वहां मौजूद भाजपा के पूर्व मंडल उपाध्यक्ष राजगुरु गंगवार ने बताया कि हम लोग परिवार की पूरी मदद कर रहे हैं। वह भाजपा संगठन से 38 वर्षों से जुड़े हुए हैं। यह पूछे जाने पर कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यहां पर सक्रियता है ? इस पर उन्होंने बताया कि मंदिर के पार्क में शाखा लगती है। बजरंग दल के लोग भी यहां आते रहते हैं। उन्होंने कहा कि आसपास रहने वाले मुस्लिम परिवार के लड़के गलियों और चौराहों पर खड़े रहते हैं। आते-जाते महिलाओं और लड़कियों पर छींटाकशी करते हैं। घरों पर पत्थर फेंकते हैं।

लोग यहां बहुत डरे हुए हैं। इस सवाल पर कि दिल्ली में अब भाजपा की सरकार है। 11 वर्षों से केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार है और दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के पास ही है। ऐसे में यहां सुरक्षा इंतजामों की जिम्मेदारी भाजपा सरकारों की है ? उन्होंने कहा कि अभी तक आम आदमी पार्टी की सरकार थी। अब भाजपा की सरकार आई है, लेकिन उन्होंने निराश भी जताई कि जितना काम करना चाहिए वह नहीं कर रही।
उसी गली में रहने वाले 35-40 वर्षीय सूरज राठौर पोस्ट ऑफिस में काम करते हैं। उन्होंने घटना पर बताया कि पहले कहा-सुनी हुई थी। लड़कों की लड़ाई थी। कुणाल पढ़ाई छोड़ चुका था और वह काम करता था, लेकिन मुस्लिम लड़के आए दिन दुर्व्यवहार करते रहते हैं। उनके घर भी मोदी, योगी और अमित शाह से अपील का पोस्टर लगा है। उनके बगल में ही खड़े वाल्मीकि समाज के कन्हैया ने बताया कि पीछे की गली में उनके समाज के 150 परिवार मकान छोड़कर जा चुके हैं। वह बताते हैं कि लोग डरे हैं। इस घटना के बाद दिल्ली शिवसेना के नेता और अब भाजपा में शामिल हो गए जय भगवान गोयल और बजरंग दल के लोग आए थे। उनके नेतृत्व में महिलाओं और स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन भी किया है। जबकि उस क्षेत्र में बाल्मीकि, खटीक समाज और सांसी समाज का वर्चस्व है, हर प्रकार से सम्पन्न हैं और मुस्लिम समाज में अच्छा ताल मेल देखने को मिलता। जबकि मुस्लिम समाज एससी एसटी की तुलना में कमज़ोर है, वहां पर अधिकतर मुस्लिम समुदायें के लोग कूड़े कबाड़ी का काम करते है। फिरभी वहां पर मुसलमानों का डर यह विडंबना ही कहेंगे
*सीलमपुर के सम्मानित जनों का बयान-*
सुभाष पाल एडवोकेट कड़कड़डूमा कोर्ट में वकालत करते हैं और बगल की दूसरी गली में रहते हैं। सुभाष पाल बीते कई दशकों से वहां के निवासी हैं। जांच टीम को उन्होंने बताया कि मृतक युवक जिसकी उम्र 17 वर्ष बताई जा रही है, वह दलित समुदाय के 11 समाज का युवक था। यहां दलितों की बड़ी आबादी है। मुस्लिम और हिंदू आबादी लगभग बराबर है और ज्यादातर मिक्स आबादी है। कुछ ही गलियां ऐसी हैं, जहां एक ही समुदाय के लोग ज्यादा हैं और आर्थिक स्तर भी सभी का एक जैसा है। उन्होंने बताया कि बीते 10-15 वर्षों से यहां सांप्रदायिक माहौल बन रहा है। उन्होंने कहा कि काफी समय से यहां नशे और ड्रग का कारोबार बड़े पैमाने पर चल रहा है, जिसमें दोनों ही समुदाय के लोग शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सैनी समुदाय की बड़ी आबादी है और वह बगल के ब्लॉक में रहती है, वो यहां के परंपरागत निवासी हैं और वह आर्थिक रूप से संपन्न, शिक्षित और नौकरियों में भी हैं।
सीलमपुर में ही रहने वाले और वही प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर यहिया ने जांच दल को बताया कि 11 समाज का तबका कुछ समय से भाजपा के साथ जुड़ा हुआ है, लेकिन चुनावों के समय यहां मुस्लिम और दलितों का बड़ा हिस्सा दशकों से कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को ही वोट देता है। कांग्रेस के चौधरी मतीन अहमद यहां से लगातार चुनाव जीतते रहे हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी के उभार के बाद वह दो चुनाव हार गए। बीते चुनाव में मतीन अहमद के बेटे चौधरी जुबेर अहमद को आप पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया और वह चुनाव जीत गए। डॉक्टर याहिया बताते हैं कि यहां सभी बहुत गरीब तबके के लोग हैं। दिल्ली से विस्थापित की गई कॉलोनियों के निवासियों को दशकों पूर्व यहां 25 गज के प्लांट आवंटित हुए थे। अब लोगों ने उस पर कई फ्लोर बना लिए हैं। लोगों की कुछ आमदनी किराए से भी होती है। दलित हो या मुस्लिम सभी छोटे-मोटे कारीगर हैं। ज्यादातर लोग दर्जी, बढ़ई, मोची और दूसरे मेहनत मजदूरी का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि मुसलमानों में भी बड़ा हिस्सा उन लोगों का है, जो दलित समाज के हैं। स्वर्ण हिंदू या मुसलमानों की आबादी यहां नहीं के बराबर है। उन्होंने बताया कि इस इलाके में 1992 में बाबरी मस्जिद गिरने के बाद और फिर सीएए-एनआरसी आंदोलन के समय जाफराबाद में हुए दंगों का यहां असर नहीं पड़ा, लेकिन अब सांप्रदायिक माहौल खराब किया जा रहा है। उन्होंने भी माना कि यहां शराब और स्मैक का बहुत ज्यादा चलन है। फिर भी यहां कोई बड़ा बाहुबली या अपराधी गिरोह नहीं है। किसी समय यहां की मौजूदा पार्षद शकीला के पति अफजल दबंग माने जाते थे, उनके परिवार के कुछ लोगों का क्रिमिनल रिकॉर्ड रहा है, लेकिन अब वह परिवार भी राजनीतिक गतिविधियों में जुड़ा है।
पुलिस अधिकारी का बयान-
एक सब इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी जो कुणाल के घर के पास तैनात थे, लोगों द्वारा पलायन किए जाने संबंधी जांच टीम के सवाल पर कुछ अलग अंदाज से ही बोले; मैं अपना घर कभी नहीं छोड़ सकता। चाहे जो हो जाए। उन्होंने अपना नाम सार्वजनिक न करने के आश्वासन के बाद कहा कि आज मैं जिस घर में रहता हूं, यदि वह छोटा है और मुझे अच्छे लोकेशन में बड़ा घर मिलेगा तो मैं अवश्य चला जाऊंगा। अपनी पुरानी मोटरसाइकिल पर बैठे उक्त इंस्पेक्टर ने हंसते हुए कहा कि मैं यह गाड़ी भी नहीं छोड़ने वाला, जब तक कि मुझे इससे अच्छी और बड़ी गाड़ी ना मिल जाए। यह पूछने पर कि मामला क्या है ? वह बोले सब राजनीति है !
*जांच टीम का निष्कर्ष-*
– सीलमपुर माने सीली हुई तंग गलियां ! बज-बजाते सीवर, गलियों सड़कों पर कूड़े का अंबार, घनी आबादी, भारी शोर शराबा, छोटे-बड़े कारखाने, टूटी हुई सड़कों और गलियों मैं ट्रैफिक जाम जो एक रौरव नरक की तस्वीर जेहन में बनाता है, जहां इंसानों के रहने की कल्पना नहीं की जा सकती, लेकिन वहां और उसके आसपास लाखों लोग रहते हैं। सीलमपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र दिल्ली स्थित एक विधानसभा क्षेत्र है। यह उत्तर पूर्व दिल्ली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है। दशकों पूर्व उत्तर और मध्य दिल्ली में घरों के गिरने गिराए जाने के बाद तत्कालीन सरकार ने वहां की आबादी को स्थानांतरित करने के लिए सीलमपुर में उन्हें बसाया था।
– दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में 10 सीटें ऐसी हैं, जहां हार जीत के लिए मुस्लिम मतदाता निर्णायक होते हैं। इन्हीं 10 सीटों में सीलमपुर विधानसभा सीट भी है, जहां भाजपा कभी चुनाव नहीं जीत सकी। बीते विधानसभा चुनाव में आप के चौधरी जुबेर अहमद 59% से अधिक यानी 79000 वोट से चुनाव जीते, जबकि भाजपा के अनिल गौर 36532 वोट ही पा सके। कांग्रेस के अब्दुल रहमान को भी 16551 वोट मिले थे। यह उल्लेखनीय है कि दशकों से सीलमपुर की स्थिति में कांग्रेस और आप पार्टी की सरकारों या उसके निर्वाचित विधायक कोई बदलाव नहीं ला सके।
– मौजूदा घटना मूलतः गरीब, पिछड़े, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से वंचित युवाओं के गली-गली में बन गये टीनएजर युवाओं के गुटों, जो छोटे-मोटे अपराधों और नशे के कारोबार में लिप्त हैं। उनके टकराव की यह एक सामान्य अपराधिक घटना है।
– *जिकरा जिस लड़की को कारपोरेट मीडिया लेडी डॉन के नाम से संबोधित कर रहा है। वह सोशल मीडिया पर सेल्फी बनाने वाले लाखों लाख युवाओं का मात्र एक हिस्सा है। पिस्तौल लेकर वीडियो बनाने के मामले में वह गिरफ्तार हुई, लेकिन इसके अलावा उसके खिलाफ कभी और कोई पुलिस केस नहीं दर्ज है। ऐसे में जिकरा की गिरफ्तारी मुस्लिम समुदाय को भयभीत और अपमानित करने का आरएसएस-बीजेपी सरकारों का तरीका बन गया है*
– स्थानीय निवासियों से बातचीत से स्पष्ट संकेत मिले हैं कि बीते 10-12 वर्षों में आरएसएस और उसके सहयोगी संगठनों की गतिविधियां वहां तेजी से बढ़ी है।
– मौजूदा हत्या के मामले में उसे सांप्रदायिक रूप देने के लिए संघ परिवार पूरी तरह से सक्रिय है। कुणाल सहित जिन 7 लोगों की बीते एक दशक में हत्या हुई है। उन सभी के नाम के साथ सनातनी हिंदू लिख कर बैनर लगाए गए हैं और चारों तरफ भगवा झंडिया लगी हुई हैं।
– हत्या की घटना के एक दिन बाद भाजपा नेता जय भगवान गोयल और बजरंग दल व विश्व हिंदू परिषद के नेता आए और संवेदना व्यक्त करने के नाम पर उन्होंने लोगों से जुलूस निकलवाया और अल्पसंख्यकों से सुरक्षा दिलाने की मांग कराई।
– वारदात वाली गली और उसके आसपास जिन लोगों के घरों पर योगी और मोदी से मदद और पलायन संबंधी पोस्टर लगे हैं। उन घरों के परिजनों की माली हालत कतई ऐसी नहीं है कि वह अपने 25 गज के एक-दो कमरे के मकान को छोड़कर कहीं अन्यत्र शिफ्ट कर सकते हैं।
*जन हस्तक्षेप टीम की फौरी मांग-*
– कुणाल के हत्यारों पर कानूनी कार्रवाई हो, लेकिन इसके लिए अल्पसंख्यक समुदाय को आतंकित नहीं किया जाना चाहिए।
– कुणाल के परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय है। उसके बीमार पिता और दादी का इलाज, उनको आर्थिक मदद और एक बेटे को सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए।
– सीलमपुर इलाके में फैले ड्रग और नशे के कारोबार को तत्काल रोका जाना चाहिए।
– उसे पूरे इलाके में शिक्षा और स्वास्थ्य तथा साफ-सफाई आदि नागरिक सुविधाओं का अभाव है, जिसे तुरंत सुव्यवस्थित करना चाहिए।
बड़ा ही शातिराना खेल खेला जा रहा है, कुछ सम्परदायिक मानसिकता के लोग जो स्वयं न शांत रहते हैं न दुसरो को सकून से रहने देते हैं। यह विडम्बना ही कहें कि, पिछले दिल्ली दंगा का मास्टर माइंड तो कोई और था लेकिन पात्र कपिल मिश्रा ने अदा किया था पुलिस अधिकारी के संरक्षण में चुनौती देते हुए करावल नगर, शिव विहार, मुस्तफाबाद, भजनपुरा, जाफराबाद, और सीलमपुर तक दंगे की आग भड़क उठी थी, जबकि करावल नगर शिव विहार और मुस्तफाबाद के में रोड का क्षेत्र में हत्या और आगजनी भी की गई बावजूद अब तक कपिल मिश्रा पर कोई कारवाई नही हुई। आज फिर से एक हत्या के लिये निर्दोषों को सजा देने का क्रम चल रहा है, जो हत्यारा है उसे बेशक कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, न कि सम्परादायिक दंगा कर करा कर, आग से आग नही बुझती है, बल्कि पानी या रेत से बुझेगी।
*जन हस्तक्षेप जांच टीम के सदस्यों के हस्ताक्षर*
अनिल दुबे- जन हस्तक्षेप सहसंयोजक और वरिष्ठ पत्रकार
एस एस नेहरा- एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट
एम जेड अली हैदर- एडवोकेट।

