Viksit Bharat Education Foundation – बिल पर व्यापक विमर्श की जरूरत: मर्कज़ी तालीमी बोर्ड

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विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA) बिल पर व्यापक विमर्श की जरूरत: मर्कज़ी तालीमी बोर्ड

 

नई दिल्ली, 31 जुलाई 2026।

मर्कज़ी तालीमी बोर्ड (MTB) ने प्रस्तावित विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA) बिल, 2025 पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि उच्च शिक्षा में सुधार समय की आवश्यकता है, लेकिन ऐसे सुधार भारत के संविधान, संघीय ढांचे और शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता के अनुरूप होने चाहिए।

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प्रस्तावित बिल के तहत एक नई केंद्रीय नियामक संस्था गठित करने का प्रावधान है, जो वर्तमान में कार्यरत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) का स्थान लेगी। सरकार का उद्देश्य उच्च शिक्षा के नियमन को एकीकृत करना तथा शिक्षा की गुणवत्ता और जवाबदेही को सुदृढ़ बनाना है।

मर्कज़ी तालीमी बोर्ड के सचिव सैयद तनवीर अहमद ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार का स्वागत किया जाना चाहिए, किंतु इन सुधारों का मूल उद्देश्य विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को अधिक सक्षम, उत्तरदायी तथा शोध एवं नवाचार के लिए अनुकूल बनाना होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शिक्षा भारतीय संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए इस क्षेत्र में केंद्र और राज्यों दोनों की समान संवैधानिक जिम्मेदारी है। किसी भी नए कानून में इस संतुलन को बनाए रखना आवश्यक है, ताकि संघीय व्यवस्था की भावना अक्षुण्ण रहे।

सैयद तनवीर अहमद ने कहा कि बिल में विभिन्न नियामक शक्तियों को एक ही केंद्रीय संस्था के अधीन लाने का प्रस्ताव प्रशासनिक दृष्टि से लाभकारी हो सकता है, लेकिन इससे अधिकारों के अत्यधिक केंद्रीकरण और राज्यों की भूमिका सीमित होने की आशंका भी उत्पन्न होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को शैक्षणिक, शोध और प्रशासनिक मामलों में पर्याप्त स्वायत्तता मिलनी चाहिए, जिससे वे स्वतंत्र एवं प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कई राज्य सरकारों, शिक्षाविदों और उच्च शिक्षण संस्थानों ने भी बिल के विभिन्न प्रावधानों पर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक पर अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी हितधारकों के साथ व्यापक, पारदर्शी और सार्थक संवाद किया जाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की दृष्टि से आवश्यक है।

उन्होंने कहा, “एक मजबूत शिक्षा व्यवस्था केवल कठोर कानूनों से नहीं बनती, बल्कि विश्वास, सहभागिता, व्यापक परामर्श और संवैधानिक मूल्यों के सम्मान पर आधारित होती है।”

मर्कज़ी तालीमी बोर्ड ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल को अंतिम रूप देने से पहले राज्यों, विश्वविद्यालयों, शिक्षाविदों तथा अन्य संबंधित पक्षों के सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाए, ताकि उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी, संतुलित और प्रभावी बनाया जा सके।

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