“कौन बनेगा दिल्ली का मुख्यमंत्री ? – प्रवेश वर्मा या महिला पर दांव ?

दिल्ली की सियासत में इस वक्त सिर्फ एक ही बात की चर्चा है कि "कौन बनेगा मुख्यमंत्री?

क्या भाजपा दलित चेहरे पर दांव खेलेगी? दिल्ली की दलित सुरक्षित 12 सीटों में से बीजेपी सिर्फ चार सीट ही जीत सकी है. कांग्रेस से बीजेपी में आए राजकुमार चौहान हैं,

Who will be the Chief Minister of Delhi - Pravesh Verma or a woman?

दिल्ली का मुख्यमंत्री कौन होगा? 

 

एस. ज़ेड. मलिक

नई दिल्ली – 27 वर्षों के कड़ी मेहनत के बाद दिल्ली की सत्ता अब फिर भाजपा के हाथ लगा। परिणाम आये आज 8 दिन हो गए लेकिन सरकार गठन अब तक असमंजस बना हुआ है, प्रधानमंत्री अमेरिका से लौट गए है, भाजपा मुख्यालय में मंथन चल रहा है, दिल्ली की गद्दी किसे सौपें, किसे ताज पहनाया जाए, भाजपा के दिग्गज नेता मुख्यमंत्री पद की रेस लगे हुए हैं, जिसमें विधायक ही नहीं सांसद भी थे लेकिन अब भाजपा ने अपने किसी भी सांसद को दिल्ली के सत्ता की कमान नहीं सौंपेगी। बल्कि, जीतकर आए विधायकों में से भी किसी को दिल्ली का ताज पहनाएगी। बावजूद इसके मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की लिस्ट लम्बी है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिरकार भाजपा आला कमान किस के सिर सत्ता का ताज रखेगी?

Addsaudi01

जबकि दिल्ली के दलित बहुल सीटों पर बीजेपी का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा है, बावजूद दिल्ली की दलित सुरक्षित, 12 सीटों में से सिर्फ चार सीट ही हासिल किया, कर तो सकती थी लेकिन फिर दिल्ली में हंगामा होता, लोगों को भाजपा की सच्चाई का आसानी से पता चलजाता, वह भाजपा के लिये सहीं नहीं था।

बहरहाल मंगोलपुरी की सीट आम आदमी पार्टी ने पिछले 10 वर्षों से अपने कब्जे रखा हुआ था, यह सीट कभी कांग्रेस के राजकुमार चौहान के पास थी, तब आपने छीनी थी जो राखी बिड़ला उस पर क़ाबिज़ थी, इस बार आपने इस सीट से किसी को लड़ा दिया और सिटिंग विधायक राखी बिड़ला को माड़ीपुर भेज दिया, पता नही यह मोदी जी के कहने केजरीवाल जी ने किया या आम आदमी पार्टी के संचालको की मति मारी गई थी कि इस सीट से हेर फेर कर दिया। इस सीट को कांग्रेस से बीजेपी में आए राजकुमार चौहान ने फिर बड़े आसानी से हासिल कर लिया। उधर राखी बिड़ला भी मादीपुर सीट हार गई। मादीपुर से आम आदमी पार्टी की राखी बिड़ला को हराने वाले कैलाश गंगवाल का नाम भी सीएम की रेस में माना जा रहा है तो बवाना से जीते रवि इंद्राज के नाम की चर्चा तेज है। और भाजपा दिल्ली में मुश्किल है कि किसी दलित को मुख्यमंत्री बनाने का रिस्क ले, हां – भाजपा इतना तो कर सकती है कि दलित चेहरे के तौर पर किसी विधायक को अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर सकती है।

विशेष सूत्रों के हवाले से दिल्ली भाजपा को बहुमत दिलाने में दो अहम समुदाएन का अहम रोल है, जिसमें एक ब्राह्मण समुदाय है तो दूसरी वैश्य। एक सर्वे अनुसार दिल्ली में ब्राह्मण 10 फीसदी से ज्यादा है वहीं वैश्य समाज भी आठ प्रतिशत है, जिसमे वैश्य समुदाय से विजेंद्र गुप्ता और रेखा गुप्ता का नाम भी मुख्यमंत्री की लिष्ट में शामिल है, ज्ञात हो कि विजेंद्र गुप्ता रोहिणी सीट से लगातार तीसरी बार विधायक बनाये गये हैं। भाजपा यदि विजेंद्र गुप्ता को मुख्यमंत्री मंत्री बनाते है तो भाजपा का यह निर्णय सर्वोत्तम होगा, विजेंदर गुप्ता दिल्ली की राजनीति में परिपक्व हैं, उनकी सूझ बूझ दिल्ली के शीर्ष भाजपाइयों से अलग है वह शांत सुभाव के हैं, बहुत सोंच समझ कर कोई भी क़दम उठाते हैं, दिल्ली की जनता के हितैषी है, समाज क्षेत्र के विकास के लिये हमेशा अग्रसर ही रहे हैं, भाजपा यदि विजेंदर गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाती है तो भाजपा दिल्ली के अलावा अन्य प्रदेशों में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है, भाजपा की क्षवी सुधर सकती है। 

बहरहाल –  ब्राह्मण चेहरे के तौर पर सतीश उपाध्याय और पवन शर्मा को भी मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर देखा जा रहा है। सतीश ने AAP के क़द्दावर नेता सोमनाथ भारती को मालवीय नगर से हराया है। उत्तम नगर से जीत दर्ज करने वाले पवन शर्मा भी दिल्ली के सीएम पद के दावेदार हो सकते हैं।

वहीं, यदि भाजपा दिल्ली में किसी महिला को मुख्यमंत्री बनाने का दांव खेलती है तो उसमें शिखा राय और रेखा गुप्ता का नाम शामिल है, रेखा गुप्ता जो शालीमार बाग से चुनकर आई है। और  शिखा राय ने आम आदमी के दिग्गज नेता सौरभ भारद्वाज को हराया है। 

भाजपा के पास इस समय  चार महिला विधायक जिन में से दोनों सबसे ज़्यादा अनुभवी हैं। इसीलिए उनके नाम की चर्चा भी तेज है। पूर्वांचली दांव बीजेपी अगर दिल्ली में चलती है तो लक्ष्मी नगर से जीते अभय वर्मा और करावल नगर से कपिल मिश्रा का हैं। इसके अलावा घोंडा से विधायक अजय महावर के नाम की चर्चा भी तेज है।

मुख्यमंत्री पद के दावेदार में नई दिल्ली विधानसभा सीट से पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल को हराने वाले प्रवेश वर्मा का है। प्रवेश वर्मा ने जीत दर्ज करने के साथ ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। वहीं, मंगलवार को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से दिल्ली से जीतने वाले 10 विधायकों ने मुलाकात की है. नवनिर्वाचित विधायक सिखा रॉय, सतीश उपाध्याय, अनिल शर्मा, अरविंदर लवली, अजय महावार, रेखा गुप्ता, अनिल गोयल के साथ जेपी नड्डा ने मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि अगले एक-दो दिन जेपी नड्डा कुछ और विधायकों से वन-टू-वन मिलेंगे। 17 या 18 फरवरी को बीजेपी विधायक दल की बैठक हो सकती है, जिसमें मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगेगी।

अरविंद केजरीवाल को पटखनी देने के बाद प्रवेश वर्मा के सीएम बनने की सबसे ज्यादा कयास लगाई जा रही है। प्रवेश वर्मा जिन नई दिल्ली सीट से जीते हैं, उसे दिल्ली की सत्ता का धुरी माना जाता है। दिल्ली के 33 साल के सियासी इतिहास में 25 साल तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नई दिल्ली सीट से बने विधायक का कब्जा रहा है। 1998 से 2013 तक शीला दीक्षित नई दिल्ली सीट से विधायक रही हैं और दिल्ली की सीएम रहीं। ऐसे ही 2013 से 2024 के आखिर तक अरविंद केजरीवाल नई सीट से प्रतिनिधित्व करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे। शीला दीक्षित को हराकर अरविंद केजरीवाल दिल्ली के सीएम बने थे और अब केजरीवाल को चुनावी मात देने वाले प्रवेश वर्मा के नाम की चर्चा हो रही है।

प्रवेश वर्मा एक ताकतवर जाट नेता हैं, जो दिल्ली के गांवों से जुड़े हैं। दिल्ली में करीब 8 फीसदी जाट समाज का वोट है। इस बार बीजेपी के समर्थन में जाट समाज का अच्छा-खासा समर्थन मिला है। इसके चलते ही प्रवेश वर्मा के नाम की चर्चा सबसे ज्यादा है। इसके अलावा प्रवेश वर्मा के प्रभाव वाले बाहरी दिल्ली के गांवों वाले इलाके में बीजेपी को भरपूर समर्थन मिला। बाहरी दिल्ली की सातों सीटें बीजेपी की झोली में आ गईं। इस लिहाज से उन्हें मुख्यमंत्री की रेस में माना जा रहा।

दिल्ली के ग्रामीण इलाके में आम आदमी पार्टी का सफाया हो गया है। दिल्ली की किसी भी जाट बहुल सीट को आम आदमी पार्टी नहीं जीत सकी है। हरियाणा बार्डर से लगी ज्यादातर सीटें बीजेपी जीतने में सफल रही है। जाट समीकरण के चलते बीजेपी प्रवेश वर्मा को मुख्यमंत्री बनाकर जाट चेहरे के तौर पर उन्हें देश की राजनीति में आगे बढ़ा सकती है।

प्रवेश वर्मा को अमित शाह को नजदीकी माना जाता है और हिंदुत्व के मुद्दे आक्रामक राजनीति का चेहरा बनकर उभरे हैं। युवा हैं और दिल्ली की सियासी समीकरण में भी प्रवेश वर्मा फिट बैठते हैं, जिसके चलते सबसे प्रबल दावेदार उन्हें माना जा रहा है। प्रवेश वर्मा के पिता साहिब सिंह वर्मा दिल्ली के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, उनके हाथों से सत्ता की बागडोर लेने के बाद ही 27 साल तक बीजेपी को वनवास दिल्ली में झेलना पड़ा है। ऐसे में अब जब बीजेपी सत्ता में लौटी है तो लंबे समय तक अपना दबदबा बनाए रखने की स्ट्रेटेजी बनाई है।

सूत्रों की मानें तो बीजेपी दिल्ली में अपने किसी भी सांसद को सीएम नहीं बनाएगी। बीजेपी अगर इस फार्मूले पर सीएम का चुनाव करती है तो पार्टी के कई बड़े नेताओं की उम्मीदों पर पानी फिर जाएगा। दिल्ली की सभी सातों संसदीय सीटों पर बीजेपी का कब्जा है। मनोज तिवारी से लेकर रामवीर सिंह बिधूड़ी और बांसूरी स्वराज के नामों के लेकर सियासी कयास लगाए जा रहे थे। इसके अलावा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा के नाम की चर्चा भी तेज है। माना जा रहा था कि बीजेपी अगर दिल्ली में अपने सांसद या फिर पैराशूट नेता को सीएम के सत्ता की बागडोर सौंपेगी, लेकिन पार्टी शीर्ष नेतृत्व के फैसले के सांसदों के नाम की अटकलों पर विराम लग गया है।

Read Also : प्रयागराज भगदड़: प्रशासनिक लापरवाही या भक्तों का उन्माद।

Read Also :BJP committed for dignified return of Kashmiri Pandit community: Sat Sharma

ZEA
Leave A Reply

Your email address will not be published.