अनहद अहद’ में डॉ. मालती बसंत और डॉ. आबिद अम्बर का सम्मान*

'बाल मन के कुशल चितेरे रहे अहद जी का जुड़ाव हर उम्र के लोगों के साथ सहज रहता था। बात मातृभाषा की है तो हमें अपनी मातृभाषा के प्रति जागरुक और सजग रहना चाहिए।'
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कॉलर ट्यून या कलेजे पर हथौड़ा: हर बार अमिताभ क्यों?

कॉलर ट्यून अब जनता का मानसिक उत्पीड़न बन चुकी है। दिमाग की नसों में जो कंपकंपी फैलती है, उसे विज्ञान वाले ‘वाइब्रेशन’ कहें, पर आम जनता इसे 'तंग आना' कहती है।
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*”भविष्य बताने वाले, वर्तमान से बेख़बर क्यों”*

इतने बड़े-बड़े भविष्य वक्ता, ऊपर वाले से सीधा संपर्क... फिर भी किसी बड़े हादसे की ख़बर तक नहीं मिलती! - अब समय है कि हम इस ‘पाखंडी भविष्यवाणी तंत्र’ की पड़ताल करें।
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अग्निपथ योजना मात्र एक छलावा – अब लोगों को समझ मे आने लगा।

अंधेरे में लुप्त जीवन का नाम अग्निपथ - जो न कभी सच था और ना यह जीवन मे कभी खुशियां ही देने वाला ही था। यह स्कीम भारतीय युवाओं के जीवन के बहुमूल्य समय को नष्ट करने वाला स्कीम है।
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प्रियंका सौरभ की हृदयविदारक कविता “”अधूरी उड़ान”

फटे बैग, जलती तस्वीरें, अधूरी चिट्ठियाँ, ज़मीन पर बिखरीं रह गईं सब इच्छाएँ मिट्ठियाँ। वो माँ जो कह रही थी "जाना, फोन करना", अब बस उसके आँसुओं में है "तेरा लौट आना"।
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