एम्स में अब यौन उत्पीड़न भी आम हो गया? डाक्टर से लेकर स्टाफ की मनमानी! दिल्ली एम्स दलालों पर आश्रित?
स्वास्थ्य मंत्री के चिट्ठी के बावजूद मरीज की अनदेखी - दिल्ली एम्स की व्यावस्था दलालों के हवाले - डाक्टर से स्टाफ तक कि मनमानी।
स्वास्थ्य मंत्री के चिट्ठी के बावजूद मरीज की अनदेखी – दिल्ली एम्स की व्यावस्था दलालों के हवाले – डाक्टर से स्टाफ तक कि मनमानी-मंत्री, डॉक्टर्स, और स्टाफ के अपनों को सर्वो सुविधा – गरीबो का कोई सुनने वाला नही।
सम्बन्धित खबरों के लिए दिये गये लिंक पर क्लिक करे।http://www.ainaindianews.com
दिल्ली एम्स में अब यौन उत्पीड़न का मामला उभरा
स्वास्थ्य मंत्री के चिट्ठी के बावजूद मरीज की अनदेखी – दिल्ली एम्स की व्यावस्था दलालों के हवाले – डाक्टर से स्टाफ तक कि मनमानी।


एआईएन / रघुनाथ
AIIMS में कथित अनियमितताओं, तथ्यों को दबाने और संस्थागत साख को नुकसान पहुँचाने के आरोप; HEALTH Ministry के निर्देशों के बावजूद सुधारात्मक कार्रवाई पर सवाल।
दिल्ली एम्स की ऑनलाइन सुविधा टाएँ टाएँ फीस – सरकार का गरीबो के नाम पर सुविधा देने वाले वादे सिर्फ चुनावी एजेंडा तक ही सीमित है। ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और ही है! गरीबो के मरीज यहां धक्का खाते खाते दम तोड़ देते हैं। उन्हें कोई पूछने वाला नहीं।
अनियमितताएं, अव्यवस्था, और ऊपर से गरीबो के साथ स्टाफों का दुर्व्यावहार आये दिन गरीबो को सहना पड़ता है, यह अफसोस नहीं बल्कि देश और स्वास्थ्य विभग की विडंबना और गरीब मरीज़ों का दुर्भगय कहेंगे कि स्वास्थ्य मंत्रालय के दलालों का वर्चस्व है और डॉक्टर्स और स्टाफ मस्त हैं, गरीब बेचारा पस्त है।
बहरहार अभी आपको वर्तमान हम वर्तमान परिस्थितियों से अवगत करा रहे है –
सूत्रों के अनुसार, रोगियों के प्रवेश, स्थानांतरण और समन्वय से संबंधित स्थापित संस्थागत नीतियों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था। इसी दौरान AIIMS के वरिष्ठ कार्डियक सर्जन डॉ. ए.के. बिसोई ने कथित प्रशासनिक एवं चिकित्सीय अनियमितताओं पर चिंता जताते हुए तत्कालीन निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास के समक्ष यह विषय उठाया तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने के प्रयास किए। बताया गया कि बार-बार निर्देशों के बावजूद सुधारात्मक कदम लागू नहीं किए गए। 29 सितंबर 2025 की समीक्षा बैठक में क्रियान्वयन तंत्र में कथित कमियाँ और जवाबदेही की कमी सामने आई। इसके बाद संबंधित Nursing Officer द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई और बाद में यही मामला विवाद का कारण बना।
सूत्रों का आरोप है कि रोगी देखभाल से जुड़ी अनियमितताओं को सुधारने के बजाय AIIMS प्रशासन ने उस समय के निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास के निर्देश पर शिकायत को यौन उत्पीड़न के आरोप में परिवर्तित कर दिया तथा AIIMS Nurses’ Union के माध्यम से इसे व्यापक रूप से प्रसारित होने दिया। 11 अक्टूबर 2025 को जारी आदेश द्वारा डॉ. ए.के. बिसोई को HOD के रूप में कार्य करने से रोक दिया गया, जिसे कई फैकल्टी सदस्यों ने मनमाना और संस्थागत नियमों के विपरीत बताया। कई लोगों ने इसे कथित अनियमितताओं को दबाने और संस्थागत सुधारात्मक प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास माना।
हालांकि, Internal Complaints Committee (ICC) ने 23 अक्टूबर 2025 की अपनी रिपोर्ट में डॉ. बिसोई के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को प्रथम दृष्टया असिद्ध माना तथा बैठक में उपस्थित अन्य स्टाफ द्वारा भी आरोपों की पुष्टि नहीं की गई। इसके बावजूद सूत्रों का आरोप है कि तत्कालीन निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास ने कथित रूप से मामले को आगे बढ़ाते हुए वही शिकायत National Commission for Scheduled Tribes (NCST) में भिजवाई। कई फैकल्टी सदस्यों और सूत्रों ने आरोप लगाया कि यह कदम ICC में मामला टिक नहीं पाने के बाद जानबूझकर उठाया गया तथा इसमें NCST के एक सदस्य के साथ कथित मिलीभगत की भूमिका भी रही। बाद में मामला AIIMS की Internal Grievance Committee for SC/ST/OBC Employees को भी भेजा गया, जहाँ से भी कथित रूप से डॉ. बिसोई को क्लीन चिट मिली।
NCST की कार्यवाही को लेकर भी गंभीर प्रश्न उठे। कई फैकल्टी सदस्यों और सूत्रों के अनुसार, उस समय के तत्कालीन निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास और NCST के एक सदस्य के बीच कथित मिलीभगत सामने आई। यह भी आरोप लगाया गया कि दोनों के Telangana राज्य से होने के कारण मामले को प्रभावित करने की कोशिश हुई तथा NCST के minutes में कथित रूप से गलत तथ्यों को भी शामिल किया गया। कई लोगों ने इसे डॉ. बिसोई की प्रतिष्ठा कमजोर करने तथा उन्हें CTVS विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारियाँ निभाने से रोकने का प्रयास बताया।
अंततः डॉ. बिसोई ने पूरा घटनाक्रम AIIMS President एवं Union Health Minister माननीय श्री जे.पी. नड्डा के समक्ष उठाया और विशेष रूप से NCST की कथित मनमानी कार्यवाही से AIIMS की institutional integrity को पहुँच रहे नुकसान की ओर ध्यान आकर्षित किया। कई लोगों का मत है कि ऐसी स्थिति में AIIMS President के रूप में माननीय श्री जे.पी. नड्डा को स्वयं हस्तक्षेप कर AIIMS की साख और संस्थागत integrity की रक्षा की जिम्मेदारी लेनी चाहिए थी तथा तत्कालीन निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास के कथित misdeeds और मनमाने आदेशों को समाप्त कर सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए थी। इसके बावजूद, सूत्रों के अनुसार Health Ministry के बार-बार निर्देशों के बाद भी सुधारात्मक कार्रवाई में देरी जारी रही, जिससे जवाबदेही, पारदर्शिता और AIIMS की विश्वसनीयता को लेकर व्यापक चिंताएँ उत्पन्न हुईं।
सम्बन्धित खबरों के लिए दिये गये लिंक पर क्लिक करे।http://www.mpnn.in

