लेखक ग्राम में साहित्यिक महोत्सव का भव्य आयोजन

लेखक ग्राम आने वाले समय में लेखकों के लिए एक चिंतन स्थली बनेगा।

लेखक ग्राम अपने सुरम्य वातावरण के लिए न केवल एक मुफीद स्थान है बल्कि दुनिया भर से आने वाले बुद्धिजीवियों के लिए एक पनाहगार है

डॉ दर्शनी प्रिय ने किया लेखक ग्राम महोत्सव में पत्रकारिता सत्र का संचालन

एमपीएनन

लेखक ग्राम में साहित्य के विभिन्न रंगों के साथ संस्कृति की इंद्रधनुषी छंटा बिखरी। यहां सृजन वाटिका की नींव रखी गई वहीं लोकप्रिय गीतकार प्रसून जोशी ने अपनी कविता से समा बांधा। देहरादून के लेखक ग्राम में तीन दिन चलने वाले इस महोत्सव में दुनियाभर के लेखकों का जमावड़ा देखने को मिला। उद्घाटन समारोह में पूर्व राष्ट्पति रामनाथ कोविंद जी हुए शामिल।

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25 से 27 अक्टूबर के बीच देहरादून का थानों गांव इस समागम का साक्षी बना। साहित्य और संस्कृति के इस महाकुंभ में हज़ारों छात्रों,लेखकों और शिक्षकों ने भाग लिया। लेखकों, बुद्धिजीवियों और मूर्धन्य साहित्यकारों के बीच रमेश पोखरियाल निशंक ने लेखक ग्राम के रूप में लेखकों को उनकी विरासत सौंपी।कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी के अभिभाषण से हुई। उसके बाद कार्यक्रम में अलग-अलग विषयों पर कई सत्र आयोजित किए गए। जिसमें पत्रकारिता, हिंदी साहित्य, मीडिया, कथा और काव्य से जुड़े कई विषयों पर लेखकों और विद्वानों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री रमेश पोखरियाल निशंक जी के सौजन्य से कार्यक्रम की भव्य शुरुआत हुई।

श्री निशंक की सशक्त मौजूदगी ने महोत्सव में कार्यक्रम में चार चंद लगा दिए। लेखक ग्राम में पिछले कई वर्षों से साहित्यिक महोत्सव का भव्य आयोजन किया जाता रहा है। मेले में विभिन्न तरह के स्टॉल भी लगाया गए जहां ज्ञान, चिकित्सा और आयुर्वेद से जुड़ी प्रदर्शनियां आयोजित की गई। लगभग 40 देश के लेखकों की पुस्तकें भी लोकार्पित की है। साहित्य के इस वैश्विक मंच पर अपनी बात रखते हुए श्री निशंक ने देश के लेखकों से यहां आने का आह्वान किया। अगले वर्ष से इसे और ज्यादा भव्य बनाने की घोषणा हुई। लेखक ग्राम अपने सुरम्य वातावरण के लिए न केवल एक मुफीद स्थान है बल्कि दुनिया भर से आने वाले बुद्धिजीवियों के लिए एक पनाहगार है। जहां स्थिर चित्त होकर वे अपनी लेखनी यात्रा को नया आयाम दे सकते हैं। देहरादून एयरपोर्ट के पास लेखक ग्राम अब वैश्विक पहचान बन चुका है। आने वाले समय में इसके बड़े परिदृश्य पर उभरने की उम्मीद है। अन्य कई बड़े संस्थानों के सौजन्य से इसे और भव्य और विस्तारित बना दिया।

महोत्सव में एक वाटिका का भी उद्घाटन किया गया जहां तमाम तरह के वृक्षों का रोपण किया गया जो आने वाले समय में लेखकों के लिए एक चिंतन स्थली बनेगा। यहां के प्रांगण में रचनाकारों के ठहरने के लिए कई कमरे भी बनाए गए है जिसमें तमाम सुविधाएं उपलब्ध है। कला, नृत्य, संस्कृति महोत्सव से लैस इस कार्यक्रम में हजारों अन्य लेखकों, छात्रों शोधार्थियों और विद्वानों ने शिरकत की।

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