मध्यवर्ग के लिए जोखिम है वायदा बाजार
निवेश का सीधा अर्थ व्यवसायिक हानि लाभ हिस्सेदारी लेना है
निवेश का सीधा अर्थ व्यवसायिक हानि लाभ हिस्सेदारी लेना है जिसमें निवेशक का पैसा किसी दक्ष व्यवसायिक के काम पर लाभ कराने के भरोसे की क्षमता पर लगता है
मध्यवर्ग के लिए जोखिम है वायदा बाजार

डॉ.अतुल कुमार
पाई-पाई करके की गयी घरेलू बचत को और अधिक लाभ के लिए निवेश बाजार में लगाने की विचार धारा बढ़ रही है। इसका कारण है कि पिछले कुछ सालों से अर्थ व्यवस्था और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए माकूल माहौल मिला है। बाजार में लगातार तेजी के दौर में सामान्य निवेशक को लाभ ही मिल रहा है। परन्तु शेयर बाजारों में अपरिहार्य मंदी के खिलाफ कोई भी प्रमोटर या दलाल पर्याप्त सुरक्षा प्रदान नहीं करेगा।
कहावत है कि आधे अधुरा ज्ञान, खतरे जान जहान यानी अल्प विद्या भंयकरी। अर्थशास्त्र और व्यवसाय से कोसों दूर रहने वाले भी कहे में और देखादेखी में निवेश कर बैठते है। इससे भी हैरत की बात है कि भारतीय बाजार में कंपनियों में निवेश उनके व्यवसायिक प्रदर्शन के आकलन और योजनाओं के विश्लेषण से अधिक पंसदीदा बातों और तथाकथित सलाहकार ज्ञानी की कही सुनी पर होता है।
निवेश का सीधा अर्थ व्यवसायिक हानि लाभ हिस्सेदारी लेना है जिसमें निवेशक का पैसा किसी दक्ष व्यवसायिक के काम पर लाभ कराने के भरोसे की क्षमता पर लगता है। समय के एक चक्र में हर सप्ताह, माह या बरस में किसी ना किसी कंपनी को अपने काम में एक दो तीन पायदान का एकदम उछाल मिलता है तो किसी ना किसी कंपनी को भारी झटका। संभावना के गणितज्ञ विज्ञानी इस अनुमान की बात को आकंड़ो में प्रमाणित कर सकतें है और अनुभवी निवेशक स्वयं समय के साथ कई मानकों के साथ भावी कीमत के आकलन करना सीख भी जाता है। इनको जाने।
फिर भी वायदा बाजार एक जोखम भरा सौदा होता है। कोई भी इंसान किसी भी कार्य में सौ फीसदी दक्ष नहीं हो सकता और वायदा बाजार कभी भी एक कंपनी के लिए पूर्व परिणामों के दोहराव की गारंटी नहीं दे सकता है। कई अनुभवी शेयर बाजार के विशेषज्ञ बार बार कह चुके हैं कि टारगेट प्राईस वाले दावे पर निवेश और कवर अप करने जैसे निर्णय में फंसने पर थोड़ी पूंजी वाले के लिए हमेशा खतरा रहता है।
इन सब से इतर लघु निवेशक मजबूती के साथ अपने निवेश पर चाक चौबंद रहना चाहिए। लालच एक बला है। शेयर बाजार एक बहुत तीव्र परिवर्तनशील या अस्थिर होते हैं और सभी सूचीबद्ध कंपनी के मूल्य प्रति दिन बढ़ेगें, यह तो हो ही नहीं सकता है। मुद्रास्फीति, नकदी प्रवाह, युद्ध, आपदा, तकनीक नवाचार, सरकारी नीति, प्रबंधन कर्मी, प्रतिद्वंदी, सूचना तंत्र, उत्पाद जैसे बहुतेरे कारकों से शेयर दाम बढ़ते घटते और अथवा स्थिर रहते है। किसी दूसरे को किसी काम में लाभ मिले तो यह जरूरी नहीं कि तीसरे के साथ भी वही बात दोहरायेगी। मध्यवर्ग मान ले कि आज की महंगाई के जमाने में माता-पिता, पत्नी बच्चों के पांच छह सदस्यों के छोटे से परिवार की खुशहाल जिन्दगी के लिए रु. बारह से पंद्रह लाख की वार्षिक शुद्ध लाभ की सुरक्षित आय नहीं है तो वायदा बाजार के लिए निवेश के लिए उसके पास कोई धनराशि नहीं है। गम खा लें, कम खा लें! मगर छोटे निवेशकों को कभी भी किसी के लाभ होने के वादे के विश्वास पर या किसी के कहे पर अंधा निवेश नहीं करना चाहिए, खासतौर से क्षमता से अधिक तो कभी भी नहीं। इसके ऊपर भी निवेश जोखम अपनी क्षमता से आधी तक ही उठाना चाहिए जिससे भले ही लाभ कम हो मगर नुकसान के घेरे में फंस कर सामाजिक, मानसिक और आर्थिक परेशानी में घिरने से स्वयं को बचा रखे।
शेयर बाजार में खून पसीने की अपनी गाढ़ी कमाई का निवेश करना शेर दिल वाले के लिए है, ऐसे जुमलों में ना आयें। हर छोटा निवेशक इस सच्चाई को जान ले कि कोई भी प्रमोटर अपनी कंपनी के सारे शेयर पुनः खरीदने की क्षमता नहीं रखता है। इसी तर्ज पर हर प्रमोटर अपने शेयर के बाजार मूल्य को समुचित दर से ऊँचे बनाये रखने में अधिग्रहण खतरे से बचाव सहित कई कारणों से इच्छुक होता है। इसलिए यदि एक, दो, तीन, चार कारणों से कोई कंपनी यदि आम निवेशकों में लाभ देने का भरोसा गंवा देती है तो उसकी बाजार मूल्य में तेजी से गिरावट आती है। इसलिए घरेलू बचत को पूंजी बाजार में अधिक लाभ के लिए निवेश करने के बढ़ते रुझान की चल रही होड़ में पड़ने से पहले थोड़ा समय लगा कर उस कंपनी को आर्थिक मापदण्डों पर तौले। वरन् थोड़ी मेहनत कर किसी भी कंपनी के कुछेक मापदण्डों को भी स्वयं भी समझते हुए सुरक्षित और लाभप्रद निवेश करना चाहिए।


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