हिन्दू सेना सम्भल सहिंत अजमेर और अब दिल्ली में दंगा कराना चाहती।
इससे पहले दिल्ली का माहौल खराब हो हिन्दू सेना को बैन करना चाहिये।
दिल्ली में हिन्दू-मुस्लिम एकता कायम रहे इसके लिये समाज के हर तबके को शातिर लोगों पर एफआईआर कर गिरफ्तारी एवं हिन्दू सेना पर बैन की मांग को ले कर दिल्ली की सड़कों पर उतर चाहिये।
हिन्दू सेना सम्भल सहिंत अजमेर और अब दिल्ली में दंगा कराना चाहती।
इससे पहले की दिल्ली का माहौल खराब हो समाज के हर तबके को मिल कर शातिर लोगों पर एफआईआर कर उनकी गिरफ्तारी और हिन्दू सेना पर बैन लगाने की मांग करना चाहिये।

सैय्यद आसिफ इमाम काकवी

भारत के प्रधानमंत्री जहां एक ओर विदेशों में जा कर अपने भाषण में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं जैसे विश्व मे अपने देश रहने वाले हर समाज के हितैषियो में से इनसे बड़ा शुभचिंतक कोई नहीं है। परन्तु जब देश मे जयश्रीराम के उद्घोष के साथ मस्जिदे जलाई जाती हैं मस्जिदों के इमामो की हत्या कर दी जाती है, मस्जिदों पर भगवा फहराया जाता है तो प्रधानमंत्री जी के कानों में न किसी लाचार की चीख सुनाई देती है न मस्जिद पर भगवा फहराते, न मस्जिद गिराते उनको दिखाई देता, वह खामोश हो जाते हैं और अडानी के हितों की खातिर पार्लियामेंट बिल पास कराने व्यस्त हो जाते हैं, ऐसे कब चलेगा प्रधानमंत्री जी? कब तक देश मे नफरत फैलाते और देश जलाते रहेंगे? कल संभल की जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर और राजस्थान के अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे के बाद अब हिंदू सेना ने दिल्ली की जामा मस्जिद पर दावा ठोक दिया है। हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) के डायरेक्टर जनरल को पत्र लिखकर जामा मस्जिद का सर्वे करने की मांग की है।
ASI को लिखे पत्र में हिंदू सेना के एक कार्यकर्ता ने यह दावा किया है कि जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे मंदिर है और इसलिए इसका सर्वे कराया जाना चाहिए, ताकि सच्चाई का पता चल सके। इससे पहले की दिल्ली का माहौल खराब हो समाज के हर तबके को मिल कर शातिर लोगों पर एफआईआर करना होगा, उनकी गिरफ्तारी और हिन्दू सेना पर बैन लगाने की मांग करना चाहिये। तभी भारत की राजधानी दिल्ली में शांति बनी रहेगी, यदि आज भी सभ्य कारोबारी लोग और आम सभ्य जनता संगठित नहीं होगी तब तक ऐसे समाज के शत्रु समाज मे आग लगाते रहेंगे ।
ज्ञात हो कि सन 1644 में शाहजहाँ द्वारा बनवाई गई दिल्ली की जामा मस्ज़िद का अपना एक अलग ही इत्तिहास है, और हिंदुस्तान की सबसे खूबसूरत मस्जिदों में से एक है इसके कंस्ट्रक्शन का काम शाहजहाँ के वज़ीर सादुल्लाह खान ने करवाया जिसमे 5000 से ज़्यादा कारीगरों ने काम किया इसे बनने में 6 साल का समय और 10 लाख रुपयें लगे थे। इसमे तीन बड़े दरवाजे है सामने वाला शाही दरवाज़ा जिसमे 35 सीढियां है। बाएं तरफ के दरवाजे पर 39 सीढियां और दायीं तरफ के दरवाजे पर 33 सीढियां है। इसमे एक साथ 25000 लोग एक साथ नमाज़ पढ़ सकते है। मस्ज़िद की इमामत के लिए शाहजहाँ ने बुखारा उजेबकिस्तान से ईमाम को बुलाया। बुखारा से होने की वजह से इमाम को इमाम बुखारी की उपाधि मिली। जमा मस्ज़िद पर दो बार हमला भी हुआ इसने अंग्रेजों की गोलियां भी झेली है आतंकियों के बम भी झेले है। पहली बार 1857 में अंग्रेजों ने इस पर क़ब्ज़ा कर के गिराने की कोशिश की लेकिन नाकामयाब हुए दूसरी बार 2006 में इस मस्जिद पर आतंकी हमला भी हुआ जिसमें दो ताइवान नागरिक के साथ 13 लोग घायल हो गए थे। इन सब के बावजूद इसकी खूबसूरत गुंबद सर उठाये आज भी खड़े है। ऊंची मीनारें बाहें फैलाये आज भी शान से खड़ी है और हमेशा यूँ ही खड़ी रहेंगी मुगल सल्तनत के खूबसूरत दौर की याद दिलाती रहेंगी. यही वो जगह है यहाँ 1947 में जामा मस्जिद की इन सीढ़ियों पर ही मौलाना आज़ाद ने मुसलमानों से कहा था-आओ अहद (क़सम) करो कि ये मुल्क हमारा है। हम उसी के लिए हैं और इसकी तक़दीर के बुनियादी फैसले हमारी आवाज़ के बगैर अधूरे ही रहेंगे”अफसोस कि अब वुजूद की लड़ाई लड़नी पड़ रही है।
सैय्यद आसिफ इमाम काकवी

