JNU के कवियों का महाकुंभ। 80वां स्वतंत्रता दिवस के पूर्व संध्या पर डॉ. दर्शिनी प्रिया के सधे संचालन ने बाँधा साहित्यिक संवाद।
राष्ट्र की चेतना केवल इतिहास के पन्नों में नहीं, बल्कि कविताओं, शायरी और उन शब्दों में भी जीवित रहती है जो समाज को जोड़ते और भविष्य के लिए नई उम्मीद जगाते हैं।
श्री डी. पी. वाजपेयी ने अपने संबोधन में साहित्य को समाज की चेतना, संवेदना और विचारों को दिशा देने वाली महत्वपूर्ण शक्ति बताया।
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डॉ. दर्शिनी प्रिया के प्रभावी संचालन में सजा JNU के कवियों का महाकुंभ।

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर कविता, शायरी और राष्ट्रभावना का अनूठा संगम।

AINGM/ Desk News
नई दिल्ली, 14 अगस्त 2026 – स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर Alumni Association of JNU (AAJ) की Literary & Cultural Committee द्वारा आयोजित भव्य कवि सम्मेलन एवं मुशायरा साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रभावना के जीवंत संगम का साक्षी बना। ‘जेएनयू के कवियों का महाकुंभ’ नाम से आयोजित इस साहित्यिक संध्या में देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े प्रतिष्ठित कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भाव-विभोर किया। कविता, ग़ज़ल, शायरी और मुक्तक के माध्यम से आज़ादी के मायने, देशप्रेम, सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदना और समकालीन जीवन के विविध पहलुओं को स्वर मिला।
कार्यक्रम में डॉ. सागर, सिया सचदेव, सफीना बेगम, शोएब रज़ा ख़ान, अख़लाक़ ‘आहन’, शफ़ी अय्यूब, डॉ. सुधा निकेतन रजनी, डॉ. मेनका श्रीवास्तव, डॉ. मालविका हरिओम, डॉ. सुनीता गुरंग, राजकुमार हिंदुस्तानी, डॉ. ईशा भारद्वाज, डॉ. पुष्पा सिंह विशेष, डॉ. अनिता देवी, डॉ. मिथिलेश कुमारी, डॉ. बबीता युमिन, मंजूर गोरखपुरी, डॉ. शिव प्रकाश साहित्य और अमित कुमार सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी साहित्यिक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को समृद्ध किया।
डॉ. दर्शिनी प्रिया के सधे संचालन ने बाँधा साहित्यिक संवाद
कार्यक्रम की सबसे उल्लेखनीय विशेषताओं में डॉ. दर्शिनी प्रिया, संयुक्त सचिव, Alumni Association of JNU का प्रभावशाली संचालन रहा। उन्होंने न केवल कार्यक्रम की मॉडरेटर एवं संचालक के रूप में मंच को संभाला, बल्कि अपनी साहित्यिक समझ, सधी हुई भाषा, आत्मीय संवाद शैली और प्रभावी मंचीय प्रस्तुति से पूरे आयोजन को एक सुंदर साहित्यिक प्रवाह प्रदान किया।
डॉ. दर्शिनी प्रिया ने प्रत्येक कवि और शायर को मंच से जोड़ते हुए उनकी रचनात्मक पृष्ठभूमि और प्रस्तुति के अनुरूप परिचय दिया। उनके संचालन में मंच पर उपस्थित विभिन्न साहित्यिक विधाओं और विचारों के बीच एक स्वाभाविक संवाद स्थापित हुआ। कविता से मुशायरे और गंभीर सामाजिक सरोकारों से लेकर राष्ट्रभावना से ओतप्रोत रचनाओं तक, उन्होंने कार्यक्रम के हर पड़ाव को सहजता और गरिमा के साथ आगे बढ़ाया।
उनकी भूमिका केवल मंच संचालन तक सीमित नहीं रही। कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने, कवियों एवं प्रतिभागियों से समन्वय, कार्यक्रम के क्रम निर्धारण, मंचीय व्यवस्थाओं और पूरे आयोजन को एक सूत्र में पिरोने में भी डॉ. दर्शिनी प्रिया की सक्रिय भूमिका रही। एक कुशल संचालक के रूप में उन्होंने मंच पर समय, विषय और प्रस्तुतियों के बीच संतुलन बनाए रखा, वहीं एक साहित्यप्रेमी के रूप में उन्होंने हर रचनाकार को सम्मान और पर्याप्त मंचीय स्थान देने का विशेष ध्यान रखा।
उनके संचालन की खासियत यह रही कि उन्होंने मंच को केवल प्रस्तुतियों का स्थान न बनाकर कवि, शायर और श्रोताओं के बीच संवाद का जीवंत माध्यम बना दिया। उनकी आवाज़ और शब्दों में साहित्य के प्रति आत्मीयता तथा स्वतंत्रता दिवस के अवसर की गरिमा का सुंदर समन्वय दिखाई दिया। यही कारण रहा कि पूरा कार्यक्रम शुरुआत से अंत तक एक सहज और प्रवाहपूर्ण साहित्यिक यात्रा की तरह आगे बढ़ता रहा।
डॉ. दर्शिनी प्रिया की इस भूमिका ने यह भी रेखांकित किया कि किसी साहित्यिक आयोजन की सफलता केवल मंच पर उपस्थित रचनाकारों से नहीं, बल्कि एक संवेदनशील, सजग और साहित्यिक दृष्टि वाले संचालक के प्रभावी संयोजन से भी निर्धारित होती है।
अध्यक्ष डी. पी. वाजपेयी सहित पदाधिकारियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में Alumni Association of JNU के अध्यक्ष श्री डी. पी. वाजपेयी, जॉइंट सेक्रेटरी डॉ. संदेशा रायपा तथा Literary & Cultural Committee के कन्वीनर प्रो. अख़लाक़ अहमद सहित एसोसिएशन के अनेक सदस्य उपस्थित रहे। पदाधिकारियों ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए साहित्य और संस्कृति की सामाजिक भूमिका तथा ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
अध्यक्ष श्री डी. पी. वाजपेयी ने अपने संबोधन में साहित्य को समाज की चेतना, संवेदना और विचारों को दिशा देने वाली महत्वपूर्ण शक्ति बताया। उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में Alumni Association of JNU द्वारा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता कार्यक्रम में स्पष्ट रूप से दिखाई दी। उन्होंने प्रतिभागी कवियों और शायरों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि JNU की बौद्धिक विरासत को साहित्य और संस्कृति के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
डॉ. संदेशा रायपा और प्रो. अख़लाक़ अहमद ने भी कार्यक्रम की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए साहित्यिक गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
आयोजन ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या को साहित्य के रंग में रंगते हुए यह संदेश दिया कि राष्ट्र की चेतना केवल इतिहास के पन्नों में नहीं, बल्कि कविताओं, शायरी और उन शब्दों में भी जीवित रहती है जो समाज को जोड़ते और भविष्य के लिए नई उम्मीद जगाते हैं।
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