एक देश एक चुनाव सोंचने आसान – करना मुश्किल है

उन सभी इकत्तीस राज्य विधानसभा के दृष्टिगत कोई निर्णय नियम कानून को जबरन के बजाय इसे मिलजुल कर लागू किया जाए।

यदि अभी तुरंत में छह माह पहले 2026 और 2027 राज्य विस के चुनाव कराये जायें और फिर अगला कार्यकाल भी छह माह या साल तक छोटा रखा जा सके तो 2029 के बाद 2034 में इनके चुनाव एक साथ किया जा सकेगें।

लागू कैसे हो – एक देश में एक चुनाव

डॉ. अतुल कुमार

पूरे देश की कुल इकत्तीस राज्यों विधानसभाओं को एक साथ लोकसभा 2029 के चुनाव के साथ कराने के लिए समझदारी के चुनावी कार्यक्रम को निर्धारित करने की जरूरत है। एक देश एक चुनाव के केन्द्र के निर्णय को निरूपित कराने के लिए एक क्रम का जोड़ा जाना है तो इसके संभाव्य पर विवेचना भी आवश्यक है। इसमें कई सुझाव है। एक देश एक चुनाव के लिए सरकार और प्रशासन की संभावित योजना के प्रारूप को सामान्य जनता के साथ साझा किये जाने की जरूरत है।
सबसे पहले छह माह के अंतराल के राज्यों का चुनाव एकयुक्त किया जाए। मई 2029 में तय लोकसभा चुनाव के साथ आंध्रप्रदेश, अरूणाचलप्रदेश, सिक्कम, ओडिसा के चुनाव भी पहले से ही निर्धारित हैं। इनके साथ 2028 दिसम्बर को पूर्ण हो रही मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेंलगाना, मिजोरम इन पांच राज्यों की विधानसभा के चुनाव भी छह माह तक के विस्तार मिलने पर आगामी मई 2029 में लोकसभा चुनाव के साथ नौ राज्यों के चुनाव संग कराये जा सकते है। फिर वर्तमान में पहले से तय कार्यक्रम में हरियाणा और जम्मू-कश्मीर दोनों के चल रहे विधानसभा चुनाव 8 अक्टूबर को पूर्ण होगें। इसके साथ महाराष्ट्र और झारखंड के पूर्ण होती विधानसभा के चुनाव जल्द ही निर्धारित होगें। महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 26 नवंबर को समाप्त हो रहा है जबकि झारखंड का कार्यकाल 5 जनवरी को समाप्त हो रहा है। इन चारों राज्यों के चुनाव भी 2029 में पूर्णकाल के समय से कुछ पहले कराये जाऐंगें तो 2029 लोकसभा के साथ ही कुल तेरह राज्य चुनाव भी सहजता से संग में हो सकेगें।
वहीं दिल्ली में विधानसभा चुनाव 2025 फरवरी में और साल अंत तक के सात माह के अंतराल में बिहार के तय चुनाव को भी साझे करने के विकल्प पर सोचना होगा। तभी इनको 2029 या 2034 तक साथ में लिया जा सकेगा।
इसके बाद बाकि के बचे हुए सोलह राज्यों को सबसे पहले आपस में संयुक्त करना होगा। इसमें सबसे पहले 2026 मई में पूर्ण हो रहे असम, केरल, तमिलनाडु, पुड्डीचेरी, पं.बंगाल की पांच विधानसभा चुनाव को एक साथ और इसके बाद गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तराखण्ड, उत्तरप्रदेश इन पांच का चुनाव 2027 मार्च में होगा। इनके साथ ही अगले छहमाह यानि कि दिसम्बर 2027 में दो राज्यों गुजरात और हिमाचल के चुनाव किये जाने है और मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा, कर्नाटक चारों का कार्यसमय 2028 के मध्य में पूरा हो रहा है।
2026 के बाद 2031 में और 2027 के बाद 2032 में तथा 2028 के बाद 2033 होने वाले इन सोलह राज्यों के चुनाव कार्यक्रम को समायोजित करने में वाकई सोचना पडेगा और सहमति बनानी होगी। यदि इनको आगामी लोकसभा के साथ कराना है तो डेढ़ साल से दो साल का समय एक ही बार में पाट पाना कठिन सा लगता है। यदि अभी तुरंत में छह माह पहले 2026 और 2027 राज्य विस के चुनाव कराये जायें और फिर अगला कार्यकाल भी छह माह या साल तक छोटा रखा जा सके तो 2029 के बाद 2034 में इनके चुनाव एक साथ किया जा सकेगें।
आयोग की निष्पक्षता की छवि बनाये रखने के लिए आला प्रशासनिक अधिकारी भी इस ओर सोच रहें होगें। वो उन सभी इकत्तीस राज्य विधानसभा के दृष्टिगत कोई निर्णय नियम कानून को जबरन के बजाय इसे मिलजुल कर लागू किया जाए। संवाद के निरंतर प्रवाह में मतभेदों के कारण मनभेदों को उपजने पूर्व ही निरस्त करा जा सकता है। अगर बिला वजह से फिर कोई अदालत का रूख करे या राजनीति जमीं तलाशने के लिए जनभावना भड़का कर आंदोलन की राह ले अथवा मीडिया में विवादित बयान करे, इससे बचा जाना चाहिए।
इस प्रक्रिया में सबसे पहले तो चुनावी साल का कौन सा माह चुनावी रखा जाए इसे सबसे पहले तय करना आवश्यक है। इसके बाद अब से 2029 तक आयोग को अपने निर्धारित चुनाव कार्यक्रम को बनाने के लिए छह माह से आठ माह पहले तक चुनावी तैयारियां करनी होगी। इससे पहले तक व्यवहारिक तौर पर आयोग मात्र दो से तीन माह पूर्व ही चुनाव वाले राज्यों का दौरा कर चुनावी तैयारियों का जायजा और कार्यक्रम की रूपरेखा तय करता रहा है। केन्द्र सरकार के नये निर्णय के आलोक में समायोजन प्रक्रिया को शनैः शनैः लागू किया जाना उचित होगा। इसमें स्थानीय निकायों, नगर निगम या नगर परिषद् के चुनाव को पहले ही चार, तीन या दो साल की 2029 लोकसभा के सहकालखण्ड के नाते सीमत समय सीमा उल्लेख करते हुए चुनाव कराना चाहिए। यह निकायों को भंग करने की समस्या का विवादरहीत समाधान होगा। इसके साथ ही समाज में विचार विमर्श और आमजन में बहस कराना भी उतना ही जरूरी है ताकि अन्यथा के सरकारी खर्च में बचत के लिए एक साथ चुनाव करानी की प्रक्रिया अमल में लाना संभव हो सकेगा। प्रशासन के नियम निर्देश की स्व-स्वीकार्यता में लोकतंत्र की सुन्दरता निहत मानी जाती है। 2029 में कुछ और 2034 अथवा 2039 तक आखिरकार में यह सभी राज्य विस के साथ पूर्ण संभव हो सकेगा। यही राष्ट्रहित में होगा।

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