पेंशन के नाम पर गरीबों से ठगी का धंधा

जबरन खंजाची बने अमीर के खर्च को गरीब के माथे लाद देना हुआ।

कोई माने या ना माने पर शेयर बाजार का निवेश गरीब के लिए सट्टे बाजार जैसा ही रहा जिसे बहुत लालच की उम्मीद में रहा सहा भी गवां दिया।

नाम पेंशन फण्ड – काम सट्टे बाजार जैसा

होता है निवेष

डॉ. अतुल कुमार

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एनपीएस के द्वारा सेवानिवृत होने तक लालच के फंदे में गिरा कर सटोरिया बना कर सारी जिन्दगी के मेहनतकश गरीब नोकरी पेशा से हर माह बचत के नाम पैसे ठग लेने के लिए शातिर कामचोर तैयार है। कोई माने या ना माने पर शेयर बाजार का निवेश गरीब के लिए सट्टे बाजार जैसा ही रहा जिसे बहुत लालच की उम्मीद में रहा सहा भी गवां दिया। बहुत पहले जब कांग्रेस सरकार ने महसूस किया कि देश की आम जनता के लिए वृद्धावस्था में जब आय का नियमित प्रवाह बंद हो जाता है तो जीवन यापन कठिन ही नहीं होता जिल्लत भरी जिन्दगी भी होती है। इसलिए सरकार ने नियमित रूप से निवेश करके अपनी बुजुर्ग वयस के लिए हर माह थोड़े थोड़े करके पर्याप्त राशि बचाने का नियम किया और इसकी ब्याज दर अन्य योजना से अधिक रखी।
जहां पहले अपने मूलधन पर गरीब को खाते में बचत करने पर ब्याज का लाभ होता था अब उसे तीन पैसे से नौ पैसे की दलाली फण्ड प्रबंधन संस्थान को देनी होगी। यह जबरन खंजाची बने अमीर के खर्च को गरीब के माथे लाद देना हुआ।
₹12 लाख करोड़ की बचत को एकमुश्त खाने के लिए महाप्रबंधक और मुख्यकार्यकारी अधिकारी ऐसे कुतर्क देते हैं कि सुरक्षा पहले अर्थव्यवस्था को आगे नहीं बढ़ाएगी। इनसे कोई पूछे तुमको मुफ्त की दलाली के साथ कंपनी के भविष्य की योजनाओं में प्रयोग के लिए गरीब का धन ही अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए दिख रहा। किसी अमीर के दो नम्बर के स्वीज बैंक के पैसे नहीं दिखते। मगर यह चतुर कुतर्क ऐसे देते है कि जवाब नहीं।
इन चतुर बगुले भगत की चाल ऐसी है कि विकल्प पहला लें या दो नम्बर वाला चयन करें फंसना तो गरीब को होगा ही। अपने पैसे को बेचारे घर नहीं रख सकते हैं। इसके बाद जितने भी दिन बस मोबइल के एप पर बढ़ते घटते मुंगेरीलाल के सपने के जैसे देखे और आखिर में उसके बुढ़ापे तक फर्जीवाड़े की खबर के साथ उसकी बचत पर चपत लगी हो जो बेचारा कब्र में भी जा कर आहें भरे।

ZEA

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