शिक्षा का व्यवसायीकरण एवं स्कूल के नाम पर अवैध क़ब्ज़ा, और सरकार मौन?
अदालत के इस आदेश के बाद भरत अरोड़ा की व्यक्तिगत स्वार्थ से भरी सारी कुटिल योजना पर पानी फिर जाना तय है।
मूल मामला रोहणी में 364/2019 था जिस पर दिल्ली उच्च न्यायालय के 5 जनवरी 2024 को जारी आदेश के आलोक में स्थानीय रोहिणी अदालत ने चलन योग्य नहीं पाया।
हिन्दुस्तान स्काउटस् के सभी झूठे मामले हुए निरस्त।
अरोड़ा परिवार के अदालती चालबाजी से किये अवैध कब्जे पर उठी
जांच की मांग।

एजेंसी
दिल्ली – शिक्षण क्षेत्र की प्रतिष्ठत सामाजिक संस्था हिन्दुस्तान स्काउटस् व गाइडस् का छह साल से अदालती मुकदमों की आड़ में समानान्तर अवैध संचालन हो रहा था। मूल मामला रोहणी में 364/2019 था जिस पर दिल्ली उच्च न्यायालय के 5 जनवरी 2024 को जारी आदेश के आलोक में स्थानीय रोहिणी अदालत ने चलन योग्य नहीं पाया। जानकारी में आया है कि सेवानिवृति आयु की अनुपालना करने में हुई अनियमितता पर मंत्रालय द्वारा सरकारी अनुदान पर रोक लगा दी गयी थी।
इस बारे में मिली जानकारी में माउंट आबू रोहिणी स्कूल के मालिक भरत अरोड़ा का साजिशन शामिल होना पाया गया है। अपने चालाक दिमाग की उपज से स्थगित चुनाव में वह अपने को चेयरमैन के नाते चयनित करके दस्तावेज तैयार करता रहा है। रातों रात बदलाव करते कोषाध्यक्ष में अपनी निकट संबधी और परिचित महिला का नाम डाला तथा पत्नि ज्योति अरोड़ा को कमीश्नर दिखाता है। इसके बाद अदालती मामले की आड़ में करीब नब्बे साल के सेवानिवृत बुजुर्ग और अदालत तथा मंत्रालय से बाधित निवास शर्मा के साथ संस्था की गतिविधियों का परिचालन अपने स्कूल के कार्यालय से करता है। आरोप यह भी है कि सेवाकाल समाप्त होने के बाद चंपत सिंह से जबरन कागजात तैयार कर संस्था के नाम आमदनी के लिए नया खाता खुलवा कर देश भर से पैसे बटोरता रहा है।
संस्था पर कब्जे कर अवैध कमाई के लिए खुदगर्ज बने अरोड़ा ने अपनी बीबी समेत स्कूल के कर्मी और परिचितों को पदाधिकारी बना कर अपात्र लोगों का गुट बनाया। इसके उपरांत नामचीन वकिलों की फौज से पैसों के बलबूते पर हठधर्मिता के साथ संस्था पर कब्जा करने के लिए दर्जन भर मुकदमे करके 2019 से कमाई का जरीया बनाये हुए था।
हिन्दुसतन स्काउस और गाइडस के मूल उद्देश्यों को भुला कर पूर्व निष्कासित विनोद विधुड़ी ने सेवानिवृत चंपत सिंह व निवास शर्मा के साथ गठजोड़ में मुकदमों की कतार लगायी थी। अरोड़ा के एक वकील ने एक्ट का उल्लंघन करते हुए अदालत को गुमराह करने कर भरत अरोड़ा को पदाधिकारी दिखा कर जबरन झूठा मामला सेशन अदालत और दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर करा रखा है। एक्ट के सेक्शन छह के अनुसार चयनित विकल्प में केवल और केवल हिन्दुस्तान स्काउटस् के राष्ट्रीय सचिव के द्वारा ही मामला दायर किया जा सकता है। परन्तु सारे नियम कानून को ताक पर रख भरत अरोड़ा के वकीलों ने सेशन कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में भरत अरोड़ा को अध्यक्ष पदाधिकारी बना कर मामला दायर किया। इससे सदस्य समूह और मंत्रालय में भरत अरोड़ा की छवि बनायी कि अदालत ने पदासीन माना है। संस्था पर कब्जा करने के लिए पता तो सेवानिवृत निवास शर्मा के पूर्व घर का उपयोग किया गया जो कि निवास का व्यक्तिगत घर है। इस पते पर कभी भी भरत अरोड़ा या किसी के द्वारा कार्यालय के काम निष्पादित नहीं होते हैं। यह जानकारी में आया है कि भरत अरोड़ा अपने स्कूल के कार्यालय से ही संस्था का अवैध रूप से काम करता था। सदस्यों को भ्रमित करने के उद्देश्य से ही सेशन कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में मामला दायर किया। भरत अरोड़ा की इस सारी चालाकी पर पानी तब फिर गया जब न्याय ¬प्रक्रिया ने तेज गति से निर्णय लेते हुए इसी साल पाचं जनवरी को उसके चयन किये गये चुनाव ही रद्द करा दिये। अदालत के इस आदेश के बाद भरत अरोड़ा की व्यक्तिगत स्वार्थ से भरी सारी कुटिल योजना पर पानी फिर जाना तय है।
माननीय अदालत के इन निर्णय से हिन्दुस्तान स्काउटस व गाइडस जैसी पुरानी प्रतिष्ठत संस्था भरत अरोड़ा के परिवार की जेबी संस्था बनने से बच गयी। संस्था के मूल उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए संस्था के सभी सदस्य प्रयास कर रहे है, उनकी रूकावटें इन आदेशों से समाप्त हो गयी।



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