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#sahitykigazal #ajaymalviyasahitya #writer

वैश्विक हिंदी महासभा द्वारा परिचर्चा एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन

भूखा प्यासा रहा परिंदा मगर।/दाना चुगने कभी नहीं उतरा।।/मिरे हाथ में जब से देखा है खंजर। /तो दुश्मन भी हाथ अब मिलाने लगे हैं।।
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गालिब कबीर तुलसी और मीरा भी हैं यहां। रसखान सूर के भी सुनते हैं हम भजन।।

गालिब कबीर तुलसी और मीरा भी हैं यहां। रसखान सूर के भी सुनते हैं हम भजन।। भगत भी सुभाष भी अब्दुल हमीद और। ज़िंदा थे ज़िंदा हैं ये शहीदाने हमवतन।।
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