Browsing Tag

#socialmedia

श्याम लाल कॉलेज में “भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा” पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

पहलगाम कि घटना एक पहेली सा बनगया गया है, इत्तिहास में जब बी याद किया जाएगा, तब तब कहानी में सवाल ज़रूर किया जाएगा, आखिर सरकार ने वहां पर सुरक्षा क्यूँ नही दिया?
Read More...

क्या किसी की भूख की तस्वीर लेना जरूरी है? सोशल मीडिया युग में करुणा की कैद

सोचिए, अगर कोई कैमरा न हो, कोई दर्शक न हो, कोई ताली बजाने वाला न हो—क्या तब भी आप वही मदद करेंगे? यह प्रश्न हमारे भीतर झाँकने की ज़रूरत को इंगित करता है।
Read More...

सऊदी अरब में मलिकों का गेटटुगेदर बना मिसाल

पिछले दस वर्षों में, MWS ने 62 (पुरुष और महिला) छात्रों को स्नातक कराया है, अन्य छात्रों के बीच जो वर्तमान में आने वाले वर्षों में स्नातक करने के लिए (59 छात्रों) का अध्ययन कर रहे हैं,
Read More...

अंततः देश में जाति जनगणना: प्रतिनिधित्व या पुनरुत्थान?

वंचित समुदायों के लिए जाति जनगणना केवल गिनती नहीं है, यह उनकी दृश्यता का सवाल है। अगर समाज में कोई वर्ग आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक रूप से पिछड़ा है, तो सबसे पहले यह जानना ज़रूरी है कि वह है कहां? कितना है? डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कहा था —…
Read More...

गिर्ड द्वारा प्रशिक्षित गरीब महिलाओं को स्वयरोज़गार के लिये सिलाई मशीने वितरित

जानाब शम्शुद्दीन साहब इनकी सक्रियता देखते हुए जब मैं दिल्ली सरकार में मंत्री था तभी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड कम्पनी के सीएसआर फंड के लिये इस संस्था को रिकमेंड किया था। इमरान हुसैन,
Read More...

यूपीएससी टॉपर या जाति टॉपर?: प्रतिभा गुम, जाति और पृष्ठभूमि का बाज़ार गर्म। 

हर दल, हर विचारधारा, हर वर्ग अपने-अपने टॉपर को पकड़कर झंडा उठाता है — “देखो, ये हमारा है!” किसी को सवर्ण गौरव चाहिए, किसी को दलित चमत्कार। और इस पूरे मेले में असली हीरो — यानी मेहनत और ईमानदारी — कहीं कोने में खड़ी, अकेली, उपेक्षित रह जाती…
Read More...

पीके का नीतीश के गढ़ नालंदा में बड़ा ऐलान – नीतीश की वादाखिलाफ़ी और सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ…

हमको मानहानि, मुकदमा और FIR से डराने वाला कोई पैदा नहीं हुआ है। जिनका आप नाम ले रहे हैं, वे जितनी बार चाहे मानहानि, एफआईआर कर दें। आपको प्रशांत किशोर किसी से डरने वाला दिखता है! - जब हमने कोई गलती नहीं की तो कोई बिहार में खड़े होकर नहीं कह…
Read More...

“जोखिम ज़्यादा है, सेवानिवृत्ति के बाद नौकरी पाने की चाहत,

हमारा संविधान देश की सबसे बड़ी और सबसे ताकतवर किताब है। इसमें तीन मुख्य स्तंभ बताए गए हैं – विधायिका (संसद/विधानसभा), कार्यपालिका (सरकार), और न्यायपालिका (अदालतें)। ये तीनों एक-दूसरे से स्वतंत्र होते हैं।
Read More...