यूनिसेफ दिवस क्या है और क्यूँ?

संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष के लिए एक वार्षिक कार्य दिवस है। यह दिवस 11 दिसंबर को मनाया जाता है

यूनिसेफ दिवस का उद्देश्य बच्चों के अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और बच्चों के जीवन में सुधार के लिए काम करना है।

यूनिसेफ दिवस पर विशेष

लेखक – नेमत जहाँ – नवादा बिहार

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सभी देशों का भविष्य उसकी आने वाली पीढ़ी या जनरेशन के ऊपर काफी ज्यादा निर्भर होता है, क्योंकि आने वाली जनरेशन या पीढ़ी ही अपने देश को और ज्यादा अच्छा और उसमें नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके उस पर काम करती है। यह सोच होती है, उनकी की उनका देश उनके नई टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करने के बाद ज्यादा तरक्की और विकसित हो जाएगा, भविष्य की पीढ़ी को देखते हुए ही एक फॉर्म जारी किया गया था, जिसको यूनिसेफ का नाम दिया गया है। यूनिसेफ (यूनाइटेड नेशंस इंटरनेशनल चिल्ड्रन’स यूनिसेफ  फंड), यह एक संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी है, जो कि पूरे विश्व में बच्चों को विकास सहायता प्रदान करता है, पूरी दुनिया में 192 से अधिक देश यूनिसेफ के सदस्य हैं।

यूनिसेफ दिवस, जिसे विश्व बाल दिवस भी कहा जाता है, संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष के लिए एक वार्षिक कार्य दिवस है। यह दिवस 11 दिसंबर को मनाया जाता है, जो यूनिसेफ की स्थापना की वर्षगांठ है।

यूनिसेफ दिवस का उद्देश्य बच्चों के अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और बच्चों के जीवन में सुधार के लिए काम करना है। इस दिन, यूनिसेफ और उसके सहयोगी दुनिया भर में कार्यक्रमों और गतिविधियों का आयोजन करते हैं। इन कार्यक्रमों में बच्चों के अधिकारों पर शिक्षा, बच्चों की सुरक्षा, और बच्चों के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं तक पहुंच को बढ़ावा देना शामिल है। यूनिसेफ दुनिया के सबसे कठिन इलाकों में काम करता है। यूनिसेफ दिवस हमें एक साझा संकल्प के रूप में कार्य करने के लिए प्रेरित करता है ताकि सभी बच्चे एक स्वस्थ, सुरक्षित और प्रेरित जीवन जी सकें।

यूनिसेफ दिवस हमें यह सिखाता है कि हमें बच्चों के भविष्य की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है और समृद्धि का सही मापदण्ड है। इस दिन को मनाने से हम यह समझते हैं कि समृद्धि तभी संभव है जब हम बच्चों को समर्थन और संरक्षण प्रदान करते हैं। यह बच्चों के अधिकारों की रक्षा भी करता है और बचपन से लेकर किशोरावस्था तक उनकी क्षमता को पूरा करने में उनकी मदद करता है। यह संस्था भारत में पिछले 75 वर्षों से हैं। इसकी मुख्य ताकत साक्ष्य आधारित तकनीकी योग्यता है जिसके द्वारा यह लोग नीतिगत कार्रवाई का निष्पादन करते हैं और साथ ही अपने सहयोगियों की क्षमता का विकास भी करते हैं। 17 राज्यों में 450 स्टाफ (कार्यकर्ताओं) के साथ यूनिसेफ भारत के लगभग 90 प्रतिशत बच्चों तक पहुँचते हैं – जो कि संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की सभी संस्थाओं में सबसे ज्यादा है।

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष या यूनिसेफ़ की स्थापना का आरंभिक उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध में नष्ट हुए राष्ट्रों के बच्चों को खाना और स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना था। इसकी स्थापना संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने 11 दिसम्बर, 1946 को की थी। 1953 में यूनीसेफ़, संयुक्त राष्ट्र का स्थाई सदस्य बन गया। उस समय इसका नाम यूनाइटेड नेशंस इंटरनैश्नल चिल्ड्रेंस फ़ंड की जगह यूनाइटेड नेशंस चिल्ड्रेंस फ़ंड कर दिया गया। संगठन ने 1949 में तीन स्टाफ सदस्यों के साथ भारत में अपना काम शुरू किया और तीन साल बाद दिल्ली में एक कार्यालय स्थापित किया। वर्तमान में, यह 16 राज्यों में भारत के बच्चों के अधिकारों की हिमायत करता है।भारत का पहला पेनिसिलिन उपकरण पिंपरी में स्थापित किया गया। यूनिसेफ ने उपकरण और तकनीकी सहायता प्रदान की और यह ड्रग्स एंड फार्मास्युटिकल सेक्टर में पहला सार्वजनिक उपक्रम था। यूनीसेफ़ को 1965 में उसके बेहतर कार्य के लिए शान्ति के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 1989 में संगठन को इंदिरा गाँधी शांति पुरस्कार भी प्रदान किया गया था। इसके 120 से अधिक शहरों में कार्यालय हैं और 190 से अधिक स्थानों पर इसके कर्मचारी कार्यरत हैं। इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क में है। वर्तमान में इसके मुखिया ऐन वेनेमन है। वर्तमान में यूनीसेफ़ फंड एकत्रित करने के लिए विश्व स्तरीय एथलीट और टीमों की सहायता लेता है। यूनीसेफ का सप्लाई प्रभाग कार्यालय कोपनहेगन, डेनमार्क में है। यह कुछ महत्वपूर्ण सामान जैसे जीवन रक्षक टीके, एचआईवी पीड़ित बच्चों व उनकी माताओं के लिए दवा, कुपोषण के उपचार के लिए दवाइयाँ, आकस्मिक आश्रय आदि के वितरण की प्राथमिक जगह होती है। 36 सदस्यों का कार्यकारी दल यूनीसेफ़ के कामों की देखरेख करता है। यह नीतियाँ बनाता है और साथ ही यह वित्तीय और प्रशासनिक योजनाओं से जुड़े कार्यक्रमों को स्वीकृति प्रदान करता है। वर्तमान में यूनीसेफ़ मुख्यत: पाँच प्राथमिकताओं पर केन्द्रित है। बच्चों का विकास, बुनियादी शिक्षा, लिंग के आधार पर समानता (इसमें लड़कियों की शिक्षा शामिल है), बच्चों का हिंसा से बचाव, शोषण, बाल-श्रम के विरोध में, एचआईवी एड्स और बच्चों, बच्चों के अधिकारों के वैधानिक संघर्ष के लिए काम करता है। 

राष्ट्रीय समितियां यूनिसेफ के वैश्विक संगठन का एक अभिन्न अंग हैं और यूनिसेफ की एक अनूठी विशेषता है। वर्तमान में विश्व में 32 राष्ट्रीय समितियां हैं, जिनमें से प्रत्येक एक स्वतंत्र स्थानीय गैर-सरकारी संगठन के रूप में स्थापित है। यूनिसेफ की राष्ट्रीय समितियां 38 (औद्योगिक) देशों में हैं तथा इनमें से प्रत्येक एक इंडिपेंडेंट लोकल नॉन गवर्नमेंट आर्गेनाइजेशन के रूप में स्थापित है। राष्ट्रीय समितियाँ पब्लिक एरिया से धन जुटाती हैं। यूनिसेफ को पूरी तरह से वोलंटरी योगदान से फाइनेंस किया जाता है और राष्ट्रीय समितियाँ सामूहिक रूप से यूनिसेफ की वार्षिक इनकम का लगभग एक-तिहाई हिस्सा जुटाती हैं। यह दुनिया भर में 60 लाख इंडिविजुअल डोनर्स के कॉर्पोरेशंस, सिविल सोसाइटी आर्गेनाइजेशन के योगदान के माध्यम से आता है।

यूनिसेफ की रणनीतिक योजना, 2022-2025, हर जगह सभी बच्चों के अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए यूनिसेफ की बिना शर्त प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

यह 2030 के लिए दो क्रमिक योजनाओं में से पहली है और यह सभी परिस्थितियों में बाल-केंद्रित सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) में यूनिसेफ के योगदान का प्रतिनिधित्व करती है । इस प्रकार, यह देश के कार्यक्रमों और राष्ट्रीय समितियों के लिए एक वैश्विक ढांचा प्रदान करता है।

रणनीतिक योजना कोविड-19 से समावेशी पुनर्प्राप्ति, सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में तेजी लाने तथा एक ऐसे समाज की प्राप्ति के लिए समन्वित कार्रवाई का मार्गदर्शन करेगी जिसमें बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक बच्चे को शामिल किया जाएगा, तथा उन्हें स्वतंत्रता, अवसर और उनके अधिकारों की पूर्ति होगी।

इस योजना को बच्चों, समुदायों, सरकारों, संयुक्त राष्ट्र की सहयोगी एजेंसियों, निजी क्षेत्र, नागरिक समाज और अन्य भागीदारों की राय से सूचित किया गया। इसमें प्रमुख कार्यक्रमगत लक्ष्यों और संबंधित परिणाम क्षेत्रों, परिवर्तन रणनीतियों और सक्षमताओं का खाका प्रस्तुत किया गया है, जिसमें जलवायु कार्रवाई, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक संरक्षण जैसे विषयों पर नए या त्वरित दृष्टिकोण शामिल हैं।

यूनिसेफ दिवस दुनिया भर में विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है जोकि इस प्रकार हैं-

सामुदायिक कार्यक्रम: यूनिसेफ और उसके सहयोगी दुनिया भर में सामुदायिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। इन कार्यक्रमों में बच्चों के अधिकारों पर जागरूकता बढ़ाने के लिए नुक्कड़ नाटक, प्रदर्शनियां, और अन्य कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं।

शिक्षा और प्रशिक्षण: यूनिसेफ बच्चों के अधिकारों के बारे में शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करता है। यह स्कूलों, कॉलेजों, और अन्य संगठनों के साथ काम करता है ताकि बच्चों के अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और लोगों को इन अधिकारों की रक्षा करने के लिए कार्रवाई करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

अभियान: यूनिसेफ बच्चों के अधिकारों के लिए अभियान चलाता है। इन अभियानों का उद्देश्य बच्चों के जीवन में सुधार के लिए कार्रवाई करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना है।

नुक्कड़ नाटक: यूनिसेफ भारत नुक्कड़ नाटक और अन्य सामुदायिक कार्यक्रमों का आयोजन करता है जो बच्चों के अधिकारों पर जागरूकता बढ़ाते हैं।

प्रशिक्षण: यूनिसेफ भारत बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले युवाओं और वयस्कों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम प्रदान करता है।

अभियान: यूनिसेफ भारत बच्चों के अधिकारों के लिए अभियान चलाता है, जैसे कि हर बच्चा स्कूल जा सकता है और हर बच्चा स्वस्थ हो सकता है। यूनिसेफ दिवस एक महत्वपूर्ण दिन है जो बच्चों के अधिकारों के लिए एकजुट होने और कार्रवाई करने का अवसर प्रदान करता है। यह दुनिया भर के लाखों बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद कर रहा है।

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