ओपन डब्बा लाइब्रेरी: एक किताब लाओ, एक किताब ले जाओ।

"ओपन डब्बा लाइब्रेरी" यह पुस्तकालय पारंपरिक पुस्तकालयों से बिल्कुल अलग है, क्योंकि यह न तो किसी बड़े भवन में स्थित है और न ही इसमें कोई ताला-चाबी है । न ही यहां कोई  लाइब्रेरियन है जो किताबों का लेखा जोखा रखता हो।
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DPCC Demand to DELHI BJP GOVT

लैंड पुलिंग पॉलिसी और ’प्लान्ड डेवलपमेंट पॉलिसी लागू होगी तो यहां नए मकान, अस्पताल, स्कूल, कालेज, पार्क, आदि सुविधाएँ जनसाधारण को मिलेगी।
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बिहार दिवस: गौरवशाली इतिहास और उज्जवल भविष्य का प्रतीक

इतिहास गवाह है कि बिहार ने हर कठिन परिस्थिति में अपनी राह खुद बनाई है। चाहे स्वतंत्रता संग्राम हो या सामाजिक सुधार की बात, बिहारवासियों ने सदैव अपने संघर्ष से मिसाल पेश की है।
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गोंडी विद्यालय बंद: आदिवासी संस्कृति के अस्तित्व को खतरा।

गोंडी-माध्यम विद्यालयों का बंद होना भाषाई विरासत को संरक्षित करने के लिए चल रहे संघर्ष को उजागर करता है। अनुच्छेद 29 अल्पसंख्यकों को अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति को बनाए रखने का अधिकार देता है,
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(बूँद-बूँद में सीख) अतीत की गोद में सोए तालाब और बावड़ियाँ: बस पानी ही नहीं, कहानियों का खजाना

इनका संरक्षण हमारी सांस्कृतिक विरासत को संजोने के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संकट से निपटने में सहायक हो सकता है।
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लालू प्रसाद यादव बिहार के राजनीति अखाड़े में एक बार फिर लंगोट बांधेंगे? या बेटे के लिये शिक्षक…

लालू यादव आज भी बिहार के राजनीतिक अखाड़े में व्यावस्थापक और एक रेफरी रोल बख़ूबी निभा रहे हैं। क्या लालू प्रसाद यादव बिहार के राजनीति अखाड़े में एक बार फिर लंगोट बांधेंगे? या बेटे के लिये शिक्षक प्रचारक रहेंगे?
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83%गुमराह, 17 प्रतिशत सत्तारूढ़, मुसलमान न घर के न घाट के?

अगर यह मुस्लिम रहनुमा वक़्फ़ की संपत्ति का दुरुपयोग न करते, और सही व्यावस्था देते तो आज इन्हें बिल बिलाना नहीं पड़ता, आज वक़्फ़ बोर्ड के मालिक बने बैठे होते।
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