झुग्गी झोपड़ी में जीवन व्यतीत करने वाले भी बन जाते हैं आईपीएस अफसर !
झुग्गी झोपड़ी में बचपन बीता, पिता चपरासी थे, अपने अथक प्रयास से बेटा बन गया आईपीएस अफसर: नूरुल हसन की दास्ताँ।
झुग्गी झोपड़ी में जीवन व्यतीत करने वाले भी बन जाते हैं आईपीएस अफसर !
एस.ज़ेड. मलिक (पत्रकार)
झुग्गी झोपड़ी में बचपन बीता, पिता चपरासी थे, अपने अथक प्रयास से बेटा बन गया आईपीएस अफसर: नूरुल हसन की दास्ताँ।

ता चपरासी का काम करते थे और इनके परिवार का जीवन झुग्गी झोपड़ियों में व्यतीत हुआ है। इन्होंने अपने मेहनत से यह साबित कर दिया कि अगर हम किसी कार्य को करने के लिए एक बार ठान ले तो यह मायने नहीं रखता कि हम किस जगह से हैं और हमारे माता पिता क्या करते हैं। सिर्फ और सिर्फ अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने से हम अपने मुकाम को हासिल कर सकते हैं। तो चलिए पढ़ते हैं उनकी कहानी
संजोया था। इनके पिता बरेली के एक गवर्नमेंट ऑफिस में चपरासी का कार्य करते थें। नुरुल को यूपीएससी पास कर आईएएस बनने की तमन्ना तो थी, लेकिन सबसे बड़ी बाधा पैसे की थी। अपनी पढ़ाई तो इन्होंने किसी भी तरह पूरा कर लिया। लेकिन जब यह यूपीएससी की कोचिंग करना चाह रहे थे तो इनके पास कोचिंग के पैसे नहीं थे। पैसों के कमी की वजह से किसी कोचिंग संस्थान में दाखिला नहीं ले पाए। इन्होंने बिना कोचिंग किए ही यूपीएससी को पास कर अपने परिवार और खुद की तकदीर पूरी तरह बदल कर रख दी। वर्तमान में नूरुल महाराष्ट्र कैडर के आईपीएस अधिकारी है।


