मोदी का मुखौटा – मुख पर राम राम बगल में छुरी – सऊदी के मुसलमानों से मोहब्बत और घर के मुसलमानो से दुश्मनी

यूएई में मोदी का भव्य स्वागत, भारत-यूएई रिश्तों को मिली नई मजबूती

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यूएई में मोदी का भव्य स्वागत, भारत-यूएई रिश्तों को मिली नई मजबूती

 

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सैयद आसिफ इमाम काकवी 

दुनिया की सियासत भी कितनी अजीब होती है…
विदेश की धरती पर मुस्कुराहटें बिखरती हैं, गले मिलकर दोस्ती की तस्वीरें बनती हैं, बड़े-बड़े समझौते होते हैं, और कैमरों की फ्लैश में मोहब्बत के पैगाम दिए जाते हैं। लेकिन दिल उस वक्त सवाल करता है कि काश यही अपनापन, यही मोहब्बत, यही गर्मजोशी अपने देश के अल्पसंख्यकों के साथ भी दिखाई देती। प्रधानमंत्री Narendra Modi की यूएई यात्रा ने एक बार फिर भारत और United Arab Emirates के रिश्तों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। अबू धाबी की सरज़मीं पर रक्षा, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अहम क्षेत्रों में कई बड़े समझौते हुए। अरबों डॉलर के निवेश की बातें हुईं, रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का ऐलान हुआ, और दोनों देशों ने विकास और सहयोग का नया अध्याय लिखने की कोशिश की। यह भारत की कूटनीतिक कामयाबी है, इसमें कोई शक नहीं। दुनिया के बड़े देश आज भारत के साथ खड़े दिखना चाहते हैं। लेकिन एक आम हिंदुस्तानी का दिल फिर भी यह सोचने पर मजबूर हो जाता है कि जब विदेशों में मोहब्बत और भाईचारे की बातें इतनी खूबसूरती से की जा सकती हैं, तो अपने ही देश में नफरत की दीवारें क्यों खड़ी हो जाती हैं? यूएई में जब मोदी जी गले मिलते हैं, वहां के मुस्लिम नेतृत्व के साथ मुस्कुराते हुए तस्वीरें खिंचवाते हैं, तब हिंदुस्तान का मुसलमान भी टीवी स्क्रीन के सामने बैठकर यही सोचता है कि काश यही मुस्कुराहट, यही भरोसा, यही सुरक्षा का एहसास उसे अपने वतन में भी मिलता। देश की खूबसूरती सिर्फ बड़े समझौतों से नहीं बनती, बल्कि दिलों को जोड़ने से बनती है। सड़कें, पुल, ऊर्जा परियोजनाएं और रक्षा समझौते जरूरी हैं, लेकिन सबसे मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर इंसानों के बीच भरोसे का होता है। अगर दिल टूट जाएं, अगर समाज बंट जाए, अगर अल्पसंख्यकों को हर वक्त अपने वजूद की सफाई देनी पड़े, तो तरक्की की चमक भी अधूरी लगती है। भारत की असली ताकत उसकी गंगा-जमुनी तहज़ीब है। यहां मंदिर की घंटियां और मस्जिद की अज़ान साथ-साथ गूंजती हैं। यहां सिख, ईसाई, हिंदू, मुस्लिम सब मिलकर हिंदुस्तान की तस्वीर बनाते हैं। इसलिए जब देश का प्रधानमंत्री विदेश में मोहब्बत और भाईचारे का पैगाम देता है, तो उम्मीद होती है कि वही पैगाम देश के हर नागरिक तक भी पहुंचेगा। आज जरूरत सिर्फ आर्थिक साझेदारी की नहीं, बल्कि दिलों की साझेदारी की भी है। क्योंकि दुनिया में वही देश सबसे मजबूत बनता है जहां हर नागरिक खुद को सुरक्षित, सम्मानित और बराबर महसूस करे। काश यूएई की तरह अपने देश में भी हर मज़हब को गले लगाया जाता, हर नागरिक को अपना समझा जाता, तो हिंदुस्तान सिर्फ ताकतवर ही नहीं, दुनिया का सबसे खूबसूरत मुल्क भी बन जाता।काश हमारे मुल्क में भी मोहब्बत की वही हवा बहती, जहां किसी को अपने नाम, अपने मज़हब या अपनी पहचान से डरना न पड़ता। जहां मंदिर की घंटियां और मस्जिद की अज़ान एक-दूसरे के खिलाफ नहीं, बल्कि हिंदुस्तान की खूबसूरती बनकर गूंजतीं। आज यूएई की सरज़मीं पर जो तस्वीरें दिखीं, उन्होंने यह एहसास दिलाया कि दुनिया नफरत से नहीं,
मोहब्बत से जीती जाती है।सियासत की ताकत कुर्सियों से मिल सकती है,लेकिन दिलों पर हुकूमत सिर्फ इंसानियत करती है। अगर देश का हर नागरिक खुद को सुरक्षित, सम्मानित और बराबर महसूस करे,तो हिंदुस्तान सिर्फ एक ताकतवर देश नहीं,बल्कि दुनिया के लिए मोहब्बत, अमन और भाईचारे की सबसे बड़ी मिसाल बन सकता है। क्योंकि मुल्क सिर्फ सरहदों से नहीं बनते मुल्क लोगों के दिलों से बनते हैं।

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