UPSC – Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 – लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में ही यह बिल पास लागूभी कर दिया गया था। लेकिन उसका उपयोग न किया गया न सर्जनिक ही किया गया

लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में कुल 19 धाराएँ (Sections) हैं।

इसका उद्देश्य केंद्र सरकार की सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और संगठित परीक्षा अपराधों को रोकना है। यह अधिनियम 21 जून 2024 से लागू है।

 

 

एस. ज़ेड. मलिक

लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में कुल 19 धाराएँ (Sections) हैं। इसका उद्देश्य केंद्र सरकार की सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और संगठित परीक्षा अपराधों को रोकना है। यह अधिनियम 21 जून 2024 से लागू है।
लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 21 जून 2024 से लागू हो चुका था और उसके तहत कार्रवाई की जा सकती थी। लेकिन कई चर्चित पेपर लीक मामलों में जांच एजेंसियों ने साथ-साथ अन्य कानूनों का भी उपयोग किया, जैसे:

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र आदि।
  • सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कानून, यदि साइबर अपराध शामिल था।
  • भ्रष्टाचार या आर्थिक अपराध से जुड़े अन्य प्रावधान।
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इसके पीछे कुछ कारण बताए जाते हैं:

  • 2024 का कानून नया था और उसके नियमों व प्रक्रियाओं को लागू करने में समय लगा।
  • कई अपराध इस कानून के साथ-साथ अन्य आपराधिक कानूनों के अंतर्गत भी आते थे।
  • जांच एजेंसियां अधिक कठोर और व्यापक आरोप लगाने के लिए कई कानूनों का संयुक्त उपयोग करती हैं।

1. आज संसद में कौन-सा नया बिल लागू हुआ?

आज (30 जुलाई 2026) संसद ने कोई नया “पेपर लीक कानून” नहीं बनाया, बल्कि 2024 के कानून में संशोधन (Amendment) कर पारित किया है।

इसका नाम है:

Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 (लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026)।

रिपोर्टों के अनुसार इस संशोधन में प्रमुख बदलाव हैं:

  • पेपर लीक मामलों में और कड़ी सज़ा
  • जुर्माने की राशि बढ़ाई गई; संगठित अपराधों में बहुत अधिक आर्थिक दंड का प्रावधान।
  • फास्ट-ट्रैक अदालतों की व्यवस्था।
  • जांच और मुकदमे को समयबद्ध करने पर ज़ोर।
  • संगठित परीक्षा माफिया और नेटवर्क के खिलाफ अधिक कठोर कार्रवाई की व्यवस्था।

इस संशोधन के समर्थकों का कहना है कि 2024 का कानून पर्याप्त नहीं था, इसलिए उसे और प्रभावी बनाया गया। वहीं विपक्ष ने संसद में यह तर्क रखा कि केवल सज़ा बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा; परीक्षा प्रणाली, एजेंसियों की जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था में भी सुधार आवश्यक हैं।

यदि आप शोध या लेख लिख रहे हैं, तो मैं भी तैयार कर सकता हूँ, जिससे स्पष्ट हो जाएगा कि कौन-सी धारा में क्या बदलाव किया गया है।

धारा 1 – संक्षिप्त नाम और लागू होना

  • कानून का नाम और लागू होने की तिथि बताई गई है।
  • यह 21 जून 2024 से प्रभावी है।

धारा 2 – परिभाषाएँ

इस धारा में प्रमुख शब्दों की परिभाषाएँ दी गई हैं, जैसे:

  • लोक परीक्षा (Public Examination)
  • परीक्षा प्राधिकरण
  • सेवा प्रदाता
  • अनुचित साधन (Unfair Means) आदि।

धारा 3 – अनुचित साधन (Unfair Means)

निम्न कार्य अपराध माने गए हैं:

  • प्रश्नपत्र लीक करना।
  • उत्तर कुंजी लीक करना।
  • कंप्यूटर सिस्टम हैक करना।
  • नकली अभ्यर्थी बैठाना।
  • परीक्षा सामग्री का अवैध वितरण।
  • परीक्षा प्रक्रिया में धोखाधड़ी करना।

धारा 4 – साजिश (Conspiracy)

यदि कोई व्यक्ति पेपर लीक या परीक्षा धोखाधड़ी की योजना बनाता है या उसमें सहयोग करता है, तो उसे भी अपराधी माना जाएगा।

धारा 5 – परीक्षा में बाधा डालना

जानबूझकर परीक्षा रुकवाना, परीक्षा केंद्र में हिंसा करना या परीक्षा प्रक्रिया को बाधित करना दंडनीय अपराध है।

धारा 6 – अन्य अपराध

ऐसे अन्य कार्य जो परीक्षा की निष्पक्षता को प्रभावित करें, वे भी इस कानून के अंतर्गत अपराध हैं।

धारा 7 – अधिकृत परीक्षा केंद्र

सार्वजनिक परीक्षा केवल अधिकृत परीक्षा केंद्रों पर ही आयोजित की जा सकती है।

धारा 8 – सेवा प्रदाताओं की जिम्मेदारी

यदि परीक्षा कराने वाली एजेंसी, आईटी कंपनी, प्रिंटिंग प्रेस या अन्य सेवा प्रदाता लापरवाही या मिलीभगत करते हैं, तो उनके विरुद्ध भी कार्रवाई होगी।

धारा 9 – संज्ञेय अपराध

इस कानून के तहत अपराध संज्ञेय (Cognizable) हैं, अर्थात पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकती है और जांच शुरू कर सकती है।

धारा 10 – दंड

सामान्य अपराधों के लिए:

  • 3 से 5 वर्ष तक की जेल
  • ₹10 लाख तक का जुर्माना (या कानून के अनुसार निर्धारित राशि)।

धारा 11 – संगठित अपराध

यदि कोई गिरोह, संस्था या नेटवर्क पेपर लीक कराता है:

  • 5 से 10 वर्ष तक की जेल
  • कम से कम ₹1 करोड़ का जुर्माना
  • सरकार आर्थिक नुकसान की भरपाई भी वसूल सकती है।

धारा 12 – जांच अधिकारी

इस कानून के मामलों की जांच केवल सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी करेंगे।

धारा 13 – लोक सेवक

परीक्षा प्राधिकरण के अधिकारी और कर्मचारी इस कानून के उद्देश्य से लोक सेवक (Public Servant) माने जाएंगे।

धारा 14 – सद्भावना में किए गए कार्यों का संरक्षण

यदि कोई सरकारी अधिकारी सद्भावना में कार्रवाई करता है, तो उसे कानूनी सुरक्षा मिलेगी।

धारा 15 – अन्य कानूनों के साथ प्रभाव

यह कानून भारतीय दंड संहिता/भारतीय न्याय संहिता और अन्य कानूनों के अतिरिक्त लागू होगा; उन्हें समाप्त नहीं करता।

धारा 16 – नियम बनाने की शक्ति

केंद्र सरकार इस अधिनियम को लागू करने के लिए नियम बना सकती है।

धारा 17 – संसद के समक्ष नियम रखना

सरकार द्वारा बनाए गए नियम संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखे जाएंगे।

धारा 18 – कठिनाइयाँ दूर करने की शक्ति

यदि कानून लागू करने में कोई व्यावहारिक कठिनाई आती है, तो केंद्र सरकार आवश्यक आदेश जारी कर सकती है।

धारा 19 – संशोधन

यह धारा संबंधित पुराने कानून/अध्यादेश में आवश्यक संशोधन करती है।

महत्वपूर्ण बात: यह कानून मुख्य रूप से पेपर लीक कराने वाले गिरोह, दलालों, अधिकारियों, संस्थानों और सेवा प्रदाताओं को निशाना बनाता है। इसका उद्देश्य सामान्य अभ्यर्थियों को दंडित करना नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और निष्पक्ष बनाना है। हालांकि यदि कोई अभ्यर्थी स्वयं संगठित धोखाधड़ी या पेपर लीक में शामिल पाया जाता है, तो उस पर भी कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है।

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