हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी अकादमी दिल्ली के द्वारा कार्यशाला का आयोजन

हिंदी जैसी बोली जाती है वैसे ही लिखी जाती है हम यदि लिखी हुई भाषा का शुद्ध उच्चारण करके पढ़ेंगे तो हम अशुद्ध नहीं लिखेंगे।

भाषा या शब्द कठिन नहीं होते वह अपरिचित होते हैं जैसे-जैसे हम शब्दों से परिचित होते चले जाएंगे भाषा हमको बिल्कुल सरल लगने लगेगी।

 कोई भी शब्द कठिन नहीं होता है अपरिचित होता है – डॉ. कमलेश कमल


हिंदी अकादमी दिल्ली के द्वारा हिंदी पखवाड़ा 2024 के अंतर्गत सर्वोदय विद्यालय रॉउज़ एवेन्यू, दीनदयाल उपाध्याय मार्ग में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें वर्तनी अशुद्धि – कारण और निवारण विषय पर चर्चा की गई इस कार्यशाला में लगभग 300 बच्चों ने और 50 शिक्षकों ने भाग लिया और भाषा से संबंधित अपनी समस्याओं को एक दूसरों के साथ साझा किया इस कार्यशाला में अपने विचार व्यक्त करते हुए सुप्रसिद्ध उपन्यासकार और भाषाविद डॉ. कमलेश कमल ने बच्चों के सम्मुख अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि भाषा या शब्द कठिन नहीं होते वह अपरिचित होते हैं जैसे-जैसे हम शब्दों से परिचित होते चले जाएंगे भाषा हमको बिल्कुल सरल लगने लगेगी। प्रतिदिन हम बहुत सारे ऐसे शब्दों का प्रयोग करते हैं जो अशुद्ध होते हैं उनको सीखने के लिए हमको अधिक से अधिक भाषा विज्ञान की पुस्तक और व्याकरण की पुस्तक पढ़नी चाहिए। उन्होंने हमें कहा कि हम जितना पढ़ेंगे उतना ही शब्दों को समझेंगे। बच्चों के साथ प्रश्नोत्तर काल में डॉ कुलदीप कुमार ने कहा कि भाषा निरंतर अभ्यास से आती है हिंदी भाषा एक वैज्ञानिक भाषा है यह जैसे बोली जाती है वैसे ही लिखी जाती है। भाषा को शुद्ध बनाने के लिए हमको सबसे पहले व्याकरण के ऊपर ध्यान देना होगा। एक बार भाषा का व्याकरण यदि हमने समझ लिया तो फिर हमें भाषा खेल लगने लगेगी। इस अवसर पर हिंदी अकादमी दिल्ली के उपसचिव ऋषि कुमार शर्मा ने कहा की हिंदी जैसी बोली जाती है वैसे ही लिखी जाती है हम यदि लिखी हुई भाषा का शुद्ध उच्चारण करके पढ़ेंगे तो हम अशुद्ध नहीं लिखेंगे। हमको अच्छी हिंदी सुननी,लिखनी और देखनी चाहिए। हिंदी अकादमी, दिल्ली हिंदी के प्रचार – प्रसार के लिए लगातार प्रयास कर रही है और हिंदी पखवाड़ा 2024 के अंतर्गत बहुत सारे कार्यक्रम का आयोजन लगातार कर रही है। इस अवसर पर बोलते हुए विद्यालय के प्राचार्य डॉ अजय कुमार चौबे ने कहा कि हिंदी आज देश की आवश्यकता बन गई है इसको पल्लवित और पोषित करना हम सब का दायित्व है। इस कार्यक्रम का संचालन ओ. पी. सैन किया और कार्यक्रम का सफल संयोजन शिक्षाविद रामेंद्र सिंह ने किया। कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालय से आए हुए बच्चों ने भाषा से संबंधित अपनी समस्याओं को भाषाविदों के सामने रखा तथा उनका समाधान भी पाया। अशुद्ध लिखे जाने वाले शब्दों का कारण भी बच्चों ने समझने की कोशिश की। इस अवसर पर कई पत्रकार लेखक और सुप्रसिद्ध लघु कथाकार अंजू खरबंदा और रेनू निगम ने अपनी उपस्थिति दर्ज की।

ZEA
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