वर्तमान राजनीतिक की परिभाषा में सेकुलर तो फिरभी हिन्दू ही हैं – मुसलमान तो बेचारा बली का चिकन बकरा है।
सेक्युलर पार्टियों के नेताओं के अथक प्रयास के बावजूद इंडिया गठबंधन की सरकार बनते बनते रह गई !
माननीय नितीश कुमार जी एवं माननीय चंद्रा बाबू नायडू जी ने माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी को बतौर पीएम तीसरी बार ताजपोशी करा ही दी !
बदल कर फकीरों की हम भेस गालिब , तामाशा ए अहले करम देखते हैं।

लेखक – आसिफ जमाँ “मुन्ना “खान, प्रदेश महासचिव राजद, बिहार –राष्ट्रीय संयोजक अल्पसंख्यक महापंचायत- इनके अपने विचार है।
👉राजनीति में आरोप प्रत्यारोप तो सियासत का दस्तूर बन चुका है, लेकिन अगर सभी पार्टियों और उनके नेताओं की पृष्ठ भूमि को देखें तो बहुत बड़ा अन्तर साफ उभर कर दिखाई देता है ! देश में विगत लोकसभा चुनाव में जो मुद्दे थे जनता उसको बखूबी लगता है समझ नहीँ पाई या फिर बहकावे में आ कर अपने मत का प्रयोग विचार धारा के विपरीत कर दिया ! लोकतंत्र, संविधान, आरक्षण एवं जातिगत गणना जैसे अहम मुद्दे इंतेज़ार करते रह गए और ऐसे में माननीय नितीश कुमार जी एवं माननीय चंद्रा बाबू नायडू जी ने माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी को बतौर पीएम तीसरी बार ताजपोशी करा ही दी !
वहीं दूसरी तरफ आदरणीय लालू जी, मोहतरमा सोनिया गाँधी जी, आदरणीय राहुल गाँधी जी, माननीया ममता दीदी जी, मोहतरमा प्रियंका गाँधीजी, माननीय अखिलेश यादव जी, आदरणीय तेजस्वी यादव जी, आदरणीय शिबू सोरेन जी एवं आदरणीय केजरीवाल जी, आदरणीय जगदानन्दजी एवं अन्य देश के सेक्युलर पार्टियों के नेताओं के अथक प्रयास के बावजूद इंडिया गठबंधन की सरकार बनते बनते रह गई !
ध्यान से देखा जाए तो इंडिया गठबंधन की सरकार बनने में बाधा पहुँचाने में चन्द उन्हीं नेताओं का हाथ है जो अपने आप को सेक्युलर नेताओं की श्रेणी में गिनवाते हैँ ! अगर वे सेक्युलर नहीँ हैँ तो फिर अन्य सेक्युलर पार्टियाँ या उनके रहनुमा उनसे हाथ क्यूँ मिलाते हैँ ? उनसे मेरा महत्वपूर्ण सवाल है ?
विचार धारा की इस लड़ाई में सबसे ज़्यादा नुकसान अल्पसंख्यक समाज के मुस्लिम भाइयों का होता है -क्यूँकि वह खुलकर सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ वोट करता है ताकि देश में अमन, प्रेम-भाईचारा और सौहार्द का माहौल बना रहे !अन्य लोग ख़ामोशी से वोट करते हैँ और वे चुप रहते हैँ ताकि जिसकी सरकार बने वे उसी का हो जाएँ !
अल्पसंख्यक समाज का “मुस्लिम “वर्ग चुनाव के बाद वोट की नाराज़गी का शिकार बनता है और उस समय उसकी विवशता को कोई समझ नहीँ पाता !यह आए दिन देश में देखने और सुनने को मिलता है!
विचार धारा की लड़ाई जीतने के लिए सबको खुलकर मज़बूती से सड़क से लेकर सदन तक लड़ना होगा तब जाकर संविधान एवं लोकतंत्र बचेगा – इसके लिए पूरे देश में जातिगत गणना एवं 65%आरक्षण को संविधान की 9 नौवीं अनुसूची में शामिल कराने को चुनौती के रूप में लेना होगा !
साथ ही उन तथाकथित सेक्युलर नेताओं से सावधान रहना होगा जो सुबह शाम दल एवं गठबंधन बदलते रहते हैँ !!
—–✒️–आसिफ जमाँ “मुन्ना “खान, प्रदेश महासचिव राजद, बिहार –राष्ट्रीय संयोजक अल्पसंख्यक महापंचायत 💐


