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विभाजन बिभीषिका का स्‍मरण क्‍यों ?

विभाजन बिभीषिका का स्‍मरण क्‍यों ?भारत का विभाजन 20बीं सदी की विश्‍व की मुख्‍य बडी त्रासिंदयों में से एक है विश्‍व में बहुत ही कम ऐसी जन हानि तथा इतने बडे पैमाने पर पलायन देखने को मिला है इस त्रासदी के जख्‍म अभी तक पूर्ण रूप से…
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गांधी – सावरकर के हितैषी थे, न कि दुश्मन – फिर गांधी को गोली का इनाम क्यूँ?

जिस देश की सरकार का मुख्या हत्यारे की पूजा करता हो - 80 प्रतिशत देश की जनता जय जय कारा करे - निश्चित ही उस देश का पतन होना है 😢😢😢 लेखक यतेंद्र सिंह चौहान गाँधीवादी एवं वरिष्ठ समाज सेवी इनके अपने स्वतंत्र विचार हैं -…
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लोकतंत्र में आम जनता की जागरूकता से ही देश का विकास संभव है

लोकतंत्र में आम जनता की जागरूकता से ही देश का विकास संभव है - परन्तु जनता न समझना चाहती है और न ही जागरूक होना ही ही चाहती है - जनता तो पूंजीपतियों की गुलाम अंदभक्त बनी रहना चाहती।
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*मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी रामपुर*

वास्तविक रूप में श्री आजम खान ने अपने खूने जिगर से इस पौधे को सीँचा और अपनी सारी जिंदगी इसके बनाने में लगा दीl दुर्भाग्य की बात यह थी कि लगभग दस साल तक यूनिवर्सिटी की मंजूरी का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश के राज्यपाल की मंजूरी के लिए पड़ा रहा और…
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समाज सुधार में प्रेमचन्द की रचनाओं की भूमिका।

वरिष्ठ पत्रकार - डाॅ बुद्धसेन काश्यपप्रेमचन्द - शायद ही कोई भारतीय इस नाम से परिचित नहीं है। हिन्दी और उर्दू साहित्य की गहरी समझ रखनेवाले प्रेमचन्द को शब्दों में बयां करना आसान नहीं है। उनपर जितना लिखा जाये कम ही होगा। उत्तरप्रदेश के…
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 किसानों का प्रदर्शित आंदोलन कितना सार्थक ? ,, देशहित में या किसान स्वयं अपने हित में कर रहे हैं…

 किसानों का प्रदर्शित आंदोलन कितना सार्थक ? ,, देशहित में या किसान स्वयं अपने हित में कर रहे हैं प्रदर्शन? सरकार द्वारा बनाया गया क़ानून किसानो के हित में है - नये क़ानून के तहत एसडीएम बाउंड है, अनुबंध तोड़ने पर  एसडीएम को कोई पॉवर  कम्पनी…
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सरकार, किसानों के संदर्भ में कोई निर्णय लेने से पहले किसानों के साथ परिचर्चा कर उनकी अभिलाषाओं के…

सरकार, किसानों के संदर्भ में कोई निर्णय लेने से पहले किसानों के साथ परिचर्चा कर उनकी अभिलाषाओं के अनुकूल नियम-कानून बनाना चाहिए, नहीं तो लोकतंत्र को खतरा होगा  -  राजगोपाल पीव्‍हीकुछ दिन पहले खेती-किसानी से जुडे दो कानूनों के बनने…
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भारत का संविधान राजनितिक खिलौना या भारतीय नागरिकों का मौलिक अधिकारिक प्रावधान ?

मोदी सरकार-वर्ष 1975 में देश में घोषित आपाताकाल वाले 10 मौलिक कर्तव्यों को दोबारा वापस लाने की कवायद में जुट गई 
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 *इंजीनियर डे की हार्दिक शुभकामनाएं l*

 *इंजीनियर डे की हार्दिक शुभकामनाएं l* लेखक मोहम्मद रशीद लतीफ़ईश्वर ने हम सबको इंसान को बनाया है और हम वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों में वैज्ञानिकों द्वारा विकसित सिद्धांतों का उपयोग कर प्रकृति शासीत कानूनों का फायदा उठाते हुए मानव की…
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