डीपीसीसी दिल्ली के उपराज्यपाल को चेतावनी दे रही है या निवेदन कर रही है?

दोहरी राजनीति करने वाली आम आदमी पार्टी की प्रशासन चलाने और कर्मचारियों को समय पर वेतन देने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।

कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली के उपराज्यपाल से अपील की कि आगनबाड़ी वर्करों को तुरंत प्रभाव से पिछले दो महीने का वेतन दिलवाने के लिए स्वयं हस्तक्षेप करें।

आम आदमी पार्टी की सरकार चौतरफा फेलउपराज्यपाल आंगनबाड़ी वर्करों का रुका हुआ वेतन दिलाने में हस्तक्षेप करे। -देवेंद्र यादव

एमपीएनएन संवादाता
नई दिल्ली, 4 नवम्बर, 2024- दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र यादव ने कहा कि यह चिंताजनक है कि दिल्ली सरकार के हजारां आगनबाड़ी वर्कर और सहायिकाओं को त्यौहार सीजन में बिना वेतन के काम करने को मजबूर है। दिल्ली सरकार ने आगनबाड़ी वर्करों को पिछले दो महीने से वेतन नही दिया गया है। श्री यादव ने कहा कि दोहरी राजनीति करने वाली आम आदमी पार्टी की प्रशासन चलाने और कर्मचारियों को समय पर वेतन देने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली के उपराज्यपाल से अपील की कि आगनबाड़ी वर्करों को तुरंत प्रभाव से पिछले दो महीने का वेतन दिलवाने के लिए स्वयं हस्तक्षेप करें।

श्री देवेन्द्र यादव ने कहा कि क्या अरविन्द केजरीवाल और मुख्यमंत्री आतिशी को आगनबाड़ी केन्द्रों में काम करने वाली इन गरीब आगनबाड़ी वर्करों की चिंता नही है, जबकि अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली नगर निगम में मेयर के साथ कहा था कि इतिहास में पहली बार हुआ है कि निगम के सफाई कर्मचारियों को दीवाली से पहले वेतन और बोनस दिया गया है। क्या आगनबाड़ी वर्करों को मानवता के आधार पर दीवाली से पहले वेतन नही दिया जाना चाहिए। श्रीयादव ने कहा कि अरविन्द केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और कठपुतली मुख्यमंत्री आतिशी को विधानसभा चुनाव प्रचार और दिखावे की राजनीति के साथ इन गरीबों की भी चिंता करनी चाहिए।

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श्री देवेन्द्र यादव ने कहा कि यह पहला मौका नही है जब आगनबाड़ी वर्करों को दिल्ली सरकार के अंतर्गत काम करते हुए वेतन के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इसी वर्ष अप्रैल में भी करीब 8 हजार आगनबाड़ी वर्कर अपने वेतन और नियमन के लिए महीनों विधानसभा के नजदीक धरने पर बैठे थे। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार नियमित रोजगार देने में तो पूरी तरह फेल साबित हुई लेकिन जो अस्थाई रुप से काम करने वाली आंगनबाड़ी, सहायिका, आशा वर्कर, गेस्ट टीचर आदि को नियमित रुप से वेतन देने में भी विफल साबित हुई है।

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