प्रो. गोपी चंद नारंग . की साहित्यिक सेवाओं के सम्मान में गालिब संस्थान द्वारा स्वागत समारोह। एस. ज़ेड. मलिक (पत्रकार)
प्रो. गोपीचंद नारंग के उर्दू मि लिखी तमाम तहरीरों और ग़ज़लों की सराहना करते हुए कहा कि प्रो. नारंग उर्दू के ऐसे विद्वान हैं जिनको शायद ही ऐसा कोई छात्र होगा जिसने उनके उर्दू थेयूरी , ग़ज़ल या रुबाई का इस्तेमाल नहीं किया हो, और कोई उर्दू का ऐसा लेखक नहीं होगा जिसने नारंग साहब से संबंधित अपने लेख में उनका उल्लेख न किया हो।
प्रो. गोपीचंद नारंग के उर्दू मि लिखी तमाम तहरीरों और ग़ज़लों की सराहना करते हुए कहा कि प्रो. नारंग उर्दू के ऐसे विद्वान हैं जिनको शायद ही ऐसा कोई छात्र होगा जिसने उनके उर्दू थेयूरी , ग़ज़ल या रुबाई का इस्तेमाल नहीं किया हो, और कोई उर्दू का ऐसा लेखक नहीं होगा जिसने नारंग साहब से संबंधित अपने लेख में उनका उल्लेख न किया हो।
नई दिल्ली – प्रसिद्ध उर्दू आलोचक और बुद्धिजीवी प्रोफेसर गोपी चंद नारंग की साहित्यिक सेवाओं के सम्मान में गालिब संस्थान द्वारा स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रो. गोपी चंद नारंग ने (वर्तमान में यूएसए में रह रहे वहाँ से ऑनलाइन समारोह में भाग लिया। उन्होंने ऑनलाइन अपने वक्तव्य दिए, उस दौरान उन्होंने कहा कि उर्दू मेरे लिए एक रहस्य है। मुझे आश्चर्य है कि मैं सरायकी, फारसी, हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी जानता हूं लेकिन मुझे नहीं पता कि इस भाषा में ऐसा क्या जादू है कि मेरा किसी भी भाषा के प्रति ऐसा कोई झुकाव नहीं है। जैसा कि उर्दू में होता है। उन्होंने आगे कहा कि उर्दू ग़ज़ल ने 5 से अधिक देशों की यात्रा की है लेकिन किसी अन्य देश में सांस्कृतिक शोधक के रूप में यह लोगों के मन में अपनी जड़ें जमा नहीं पाई है जैसा कि भारत में हुआ। मुझे इतना सम्मान देने के लिए मैं ग़ालिब संस्थान के सभी सदस्यों और बैठक में उपस्थित सभी लोगों का हृदय से आभारी हूँ। 
पासे पर बाएं से दाएं चित्र हैं: सैफी सरवनजी, डॉ. इदरीस अहमद, प्रो. सिद्दीकी-उर-रहमान क़दवई, श्री शाहिद मेहदी, प्रो. शफ़ी क़दवई और प्रो. शहज़ाद अंजुम।


Comments are closed.