काको में जल्द होगा उर्स – अरब के विशेष अतिथि के आगमन की संभावना
आईने अकबरी में भी बीवी कमाल की चर्चा की गयी है। उन्होंने विश्व में सूफियत की रौशनी फैलायी थी।
हिन्द के राबिया बसरी से मारूफ वलिया हज़रत मख़दुमा बीबी कमाल रहमतुल्लाह अलैह ने अपनी कोशिशों से दीन की रौशनी फैलाई ।

MPNN NEWS
हिन्द के राबिया बसरी से मारूफ वलिया हज़रत मख़दुमा बीबी कमाल अलैहि रहमा के सालाना उर्स के 12-13 सितंबर 2024 को आयोजित किया जा रहा है। जिसमे विदेशी सुफ़याने कराम के शिरकत की सम्भवना जताई जा रही है, इसलिये पूरा प्रशासनिक अमला इन दिनों महोत्सव कि तैयारियों में लगा हुआ है।
ज्ञात हो की सूफी महोत्सव की शुरुआत वर्ष 2011 में पहली बार किया गया था जिसका शुभारंभ नीतीश कुमार द्वारा किया गया था। Kako کاکو काको Group page के माध्यम से लोगों ने कहा है कि सूफी महोत्सव पर जिला प्रशासन (District Magistrate Jehanabad) से अनुरोध है की सूफी शिक्षा का भी प्रचार-प्रचार किया जाना चाहिए। काको का युवा संगठन Team Kako ज़िला प्रसाशन चयन समिति के अध्यक्ष से चाहता है कि महोत्सव में स्थानिये लोगों की भी राय ली जाए जिससे इसे पहले की तरह आगे भी अच्छा बनाया जा सके। सूफी महोत्सव प्रोग्राम से पहले जिला प्रशासन सारे कलाकारों को इस बात से अवगत कराना है कि हजरत बीबी कमाल का सालाना उर्स अकीदत के साथ मनाया जाता है ना कि फ़िल्म के गाने के साथ,.. सूफी शिक्षा से जुड़े लोगों वुद्धिजीवियों को सूफी महोत्सव Kako کاکو काको में आमंत्रित किया जाना जरूरी है। आईने अकबरी में भी बीवी कमाल की चर्चा की गयी है। उन्होंने विश्व में सूफियत की रौशनी फैलायी थी। सूफी शिक्षा से जुड़े लोगों को सूफी महोत्सव काको में आमंत्रित किया जाना जरूरी है। जानकार सूत्रों से ज्ञात हुआ कि इस बार उत्सव ने विदेशी सूफी अतिथिगण के उपस्थित होने की सम्भवना है, पूर्व में जितने भी लोग विद्वान बने, सभी ने किसी न किसी सूफी को अपना गुरु बनाया। सूफी जिस स्थान बैठता है वह खानकाह बन जाती है। शिक्षा के साथ-साथ आध्यात्मिक विज्ञान का प्रचार-प्रसार शुरू हो जाता है। समाज की मदद करने में सुफियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जो लोग शिक्षा का महत्व नहीं समझेंगे वे सेहतमंद समाज क्या बनाएंगें ? अगर समाज सेहतमंद नहीं होगा तो मुल्क कैसे तरक्की करेगा? कुरान शरीफ सबसे पहली आयत शिक्षा के बारे में है। हमें सबसे ज्यादा महत्व शिक्षा प्राप्त करने और उसका प्रचार प्रसार करने पर देना चाहिए। सूफीवाद तो प्रेम की भट्टी है। हिन्दू और मुस्लिम धर्म में जो एक सी बातें हैं उनका प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए। सूफीवाद से ही देश-दुनिया में शांति हो सकती है। जब सालाना जलसे हों, तब सूफीवाद की शिक्षा दी जानी चाहिए। विविधता में ही एकता है। जब हम विभिन्न धर्मों के लोग एकसाथ मिलकर त्यौहार मनाएंगे तो समाज में सद्भावना बढ़ेगी। आज विस्तृत सामूहिक चेतना की जरूरत है। छात्र-छात्राओं को यदि सूफी-संतों की विचारधारा की शिक्षा दी जाए तो नफरत समाप्त हो जाएगा और हर तरफ भाईचारा होगा। सूफ़ीवाद या तसव्वुफ़ इस्लाम का एक रहस्यवादी पंथ है। इसके पंथियों को सूफी कहते हैं। इनका लक्ष्य आध्यात्मिक प्रगति एवं मानवता की सेवा रहा है। हज़रत मख़दुमा बीबी कमाल अलैहि रहमा देश व दुनिया की अजीम शख्सियत में से एक है। उन्होंने पूरी दुनिया को प्यार, मोहब्बत, अमन, इंसानियत एवं भाईचारे का पैगाम दिया। सुफ़िज्म व उसकी रूहानियत को लोगों तक पहुँचाने की कोशिश की। इसी कारण पूरे देश व विदेश के कोने कोने से अकीदतमंद हज़रत मख़दुमा बीबी कमाल अलैहि रहमा के दरबार में हाजिरी देने आते हैं। इनका दरबार सर्वधर्म सद्भाव एवं राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। काकोशरीफ़ एक मज़हबी तारीख़ी जगह है यहां गंगा जमुनी तहज़ीब की ज़िन्दा तस्वीरें आपको हर वक़त देखने को मिल जाएगी. कमाल है काको की यह पावन मिट्टी ! जहां देश दुनिया के लोग इस मिट्टी को नमन कर अपनी खुशहाली की दुआ मांगने आते हैं. देश -दुनिया में जिसका नाम वो भला सदियों तक कैसे रहा गुमनाम. सरीखे कई सवाल लोगों के मन-मिजाज में वर्षो से कौंधता रहा. इस ऐतिहासिक धरती मगध की विरासतों में एक सांप्रदायिक सद्भावना की भी मिसाल रहा है बीबी कमाल का मजार. कहा जाता है कि अफगानिस्तान के कातगर निवासी हजरत सैयद काजी शहाबुद्दीन पीर जगजोत की पुत्री तथा सुलेमान लंगर रहमतुल्लाह की पत्नी थी बीबी कमाल. सन 1174 में बीबी कमाल अपनी पुत्री दौलत बीबी के साथ काको पहुंची थी. सूफी महोत्सव का मक़सद सूफी कल्चर को देश विदेश में प्रमोट करना था और जो सूफी सर्किट का विज़न था वो आज सरकारी दस्तावेजों में कहीं गुम सा इस स्थान को सूफी सर्किट से जोड़ने का मक़सद सूफिज्म पर रिसर्च और इसकी शिक्षा को बढ़ावा देने का था। जब 2011 में सूफी महोत्सव का खाँचा तैयार किया गया था तब इसमें दरगाह परिसर में सूफी रिसर्च सेन्टर के साथ साथ एक लाइब्रेरी होने की भी बात थी जहां शोधकर्ता सूफी संबंधित शोध करते। विश्वप्रसिद्ध और सर्वप्रथम बिहार सूफी सर्किट में शामिल हज़रत मख़दुमा बीबी कमाल अलैहि रहमा देश व दुनिया की अजीम शख्सियत में से एक है। उन्होंने पूरी दुनिया को प्यार,मोहब्बत, अमन, इंसानियत एवं भाईचारे का पैगाम दिया था। सुफ़िज्म व उसकी रूहानियत को लोगों तक पहुँचाने की कोशिश की इसी कारण पूरे देश व विदेश के कोने कोने से अकीदतमंद हज़रत मख़दुमा बीबी कमाल अलैहि रहमा के दरबार में हाजिरी देने आते हैं। कहा जाता है कि पुराने वक्त़ में काकोशरीफ़ एक ऐसा एलाक़ा था, जहां सूफ़ी संतों ने अपने मज़हबी,समाजी और सांस्कृतिक कार्यो द्वारा प्रेम और सहनशीलता का संदेश फैलाया था Team Kako ने इस मसले पर ज़िला प्रशासन से कहना चाहती है कि ऐसे प्रोग्राम कराने से ये संदेश यही तक सीमित नही रहता बल्कि देश विदेश तक ये फैलता है । हिन्द के राबिया बसरी से मारूफ वलिया हज़रत मख़दुमा बीबी कमाल रहमतुल्लाह अलैह ने अपनी कोशिशों से दीन की रौशनी फैलाई । काकोशरीफ़ वह तेहहयात रही । इन सालो में आपने रिश्तों हिदायत की ऐसी मिसाल पेश की कि यह विरान इलाक़ा दीन ए हक़ का चमन बन गया और आप इस चमन में फूल की तरह खिलते चले गये। आप मारूफ वलिया बड़े ए फ़ैज़ और बूज़ुर्ग वलियागुजरी है। 500 सदी पुरानी इस दरगाह हैं यह एक ऐसी रूहानी जगह है जहाँ सभी को दिली सुकून मिलता है। आपकी वफात के बाद आपका रूहानी फ़ैज़ तसर्रूफ़ ओ करामात का सिलसिला आज भी जारी है। लोग आज भी अपनी बीमारियों से निजात हासिल करने को काको शरीफ हज़रत मख़दुमा बीबी कमाल रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह पर आते है और फ़ैज़ हासिल करते है। सबसे ख़ास बात, गंगा- जमुनी तहजीब का ये मंज़र है, जिसकी, आज इस जमाने में सख्त ज़रूरत है।
प्रधानमंत्री को अपने ही देश के मुसलमानों से नफरत तो विदेशों के मुसलमानों से मोहब्बत क्यूँ? https://www.mpnn.in/pm-modi-

