प्रधानमंत्री को अपने ही देश के मुसलमानों से नफरत तो विदेशों के मुसलमानों से मोहब्बत क्यूँ?
पूरी भाजपाई तंत्र और आईटी सेल मिलकर भारत में मुस्लिम विरोधी एजेंट के तहत काम करते है।
मुसलमानों की मस्जिदों को अवैध बताकर गिराने का उद्घोष करते हैं मगर जब भाजपा सरकार के मुखिया दूसरे मुस्लिम मुल्कों में जाते हैं तो बड़ी गर्मजोशी के साथ मुस्लिम नेताओं के गले भी पड़ते हैं, मस्जिदों में भी जाते हैं, अपनी आस्था भी दिखाते हैं।
पीएम मोदी ने ऐतिहासिक अली सैफ़ुद्दीन मस्जिद का
भी दौरा किया।

सैय्यद आसिफ इमाम काकवी

नरेंद्र मोदी इस छोटे से एशियाई देश ब्रुनेई जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। इस दौरान तीन सितंबर को पीएम मोदी ने ऐतिहासिक अली सैफ़ुद्दीन मस्जिद का भी दौरा किया. दोनों देशों के बीच इस दौरान हिंद महासागर क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने पर बात हुई है। इस मौक़े पर पीएम मोदी का स्वागत धार्मिक मामलों के मंत्री पेहिन डाटो उस्ताज़ हाजी अवांग बदरुद्दीन ने किया। पीएम मोदी ब्रुर्नेई पहुंचने के बाद वहां के सबसे बड़ी मस्जिद को देखने गए और वहां के इमाम से मिले. मस्जिद के इतिहास और शिल्पकला के बारे में जानकारी ली। इस मस्जिद में पहुंचकर नरेंद्र मोदी ने खुद वहां की तस्वीरें शेयर की हैं। ब्रुनेई बल्कि दुनिया की सबसे आलीशान मस्जिदों में गिना जाता है। मस्जिद का डिजाइन इसे बेहद आकर्षक और भव्य बनाता है। नरेंद्र मोदी अक्सर अपनी विदेश यात्राओं के दौरान मशहूर और ऐतिहासिक मस्जिदों में जाते रहे हैं। मुस्लिम मुल्कों की यात्रा करते हुए वह कई ऐतिहासिक मस्जिदों में जा चुके हैं।पीएम मोदी ने पिछले साल अपनी यात्रा के दौरान काहिरा में मिस्र की 11वीं सदी की अल-हकीम मस्जिद का दौरा किया था। नरेंद्र मोदी ने 2018 में इंडोनेशिया के अपने दौरे पर इस्तिकलाल मस्जिद का दौरा किया था।नरेंद्र मोदी ने जून 2018 में अपनी सिंगापुर यात्रा के दौरान चुलिया मस्जिद का दौरा किया था।इसी साल यानी 2018 के फरवरी में नरेंद्र मोदी ओमान गए थे। पीएम मोदी यहां मस्कट में सुल्तान कबूस ग्रैंड मस्जिद गए थे। साल 2014 में प्रधानमंत्री बनने के अगले साल अगस्त 2015 में नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया। उनकी यह यात्रा काफी चर्चा में रही थी। अपने दौरे पर पीएम मोदी ने मस्जिद शेख जायद ग्रैंड की यात्रा की थी। मुसलमानों की इबादत गाह को मस्जिद कहते हैं भारत की पहली मस्जिद पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद के जीवन के दौरान ही केरल के कोडुंगलूर क्षेत्र में बनाई गई थी। मस्जिद वो अल्लाह का घर है उसके दरवाजे इबादत के लिये सबके लिये खुले है। मस्जिद हमारे इबादत की जगह है जहाँ हम पाँच वक्त की नमाज सब के साथ मिल कर पढते हैं और अजान देकर सभी बस्ती के लोगों को बुलाया जाता है ताकि वह वक्त पर नमाज के लिये आ जाये। इस्लाम में मस्जिद एक जरूरी हिस्सा है। कुरान और हदीस में इस बात जिक्र है इस्लाम में नमाज़ “जमात” में अदा करने को कहा गया है यदि उस “जमात” या समूह में किसी एक नमाज़ी की भी नमाज या दुआ अल्लाह ने कुबूल कर ली तो पूरे जमात या समूह की नमाज़ या दुआ कुबूल हो जाती है। ये सब दिखावा है, मुसलमानों के खिलाफ नफ़रत का प्रदर्शन। उधर मस्जिद में घूम रहे हैं, अपने देश मे धर्म की राजनीति करते है, धर्म की नफरत फैलाते है, अपने देश के मुस्लिम पसंद नहीं है, और विदेश के अमीर मुस्लिम इनको अच्छे लगते है, बात कोई ज्यादा पुरानी नहीं गुजरात में मोदी ने 2011 में गुजरात में एक उपवास के दौरान एक दरगाह के मौलवी सैयद इमाम शाहिद सईद मंच पर गए। उन्होंने मोदी को मुस्लिम टोपी पहनाने की कोशिश की लेकिन मोदी ने उन्हें रोक दिया। आलोचना हुई तो भाजपा नेता विजय रूपाणी ने कहा कि मोदी माइनॉरिटी अपिजमेंट में यकीन नहीं रखते। यह बात पूरी तरीके से पीएम नरेंद्र मोदी पर फिट बैठती है। उनकी पूरी सरकार, पूरी भाजपाई तंत्र और आईटी सेल मिलकर भारत में मुस्लिम विरोधी एजेंट के तहत काम करते है। मुसलमानों को प्रताड़ित करते हैं, बेगुनाह मुसलमान की मॉब लिंचिंग का जश्न मनाते हैं, मुसलमानों की मस्जिदों को अवैध बताकर गिराने का उद्घोष करते हैं मगर जब भाजपा सरकार के मुखिया दूसरे मुस्लिम मुल्कों में जाते हैं तो बड़ी गर्मजोशी के साथ मुस्लिम नेताओं के गले भी पड़ते हैं, मस्जिदों में भी जाते हैं, अपनी आस्था भी दिखाते हैं। मगर ऐसा क्या हो जाता है कि जैसे ही मोदी जी अपने देश में लौटते हैं तो जो मुसलमान था वह मुल्ला हो जाता है और उन्हें मुल्लों को टाइट करने की बातें चुनावी मंचों से होती हैं। जो प्रधानमंत्री मोदी आज ब्रुनेई के उमर अली मस्जिद में गए थे वह भारत में मुसलमानों को घुसपैठिया बताते हैं। यहां पर आए दिन इन्हीं की पार्टी के लोग कहते हैं कि भारत में सभी मस्जिदों का अस्तित्व अवैध है। इसलिए सभी मस्जिदों को तोड़ देना चाहिए।
सैय्यद आसिफ इमाम काकवी

