कारगिल की यादें – राम अवतार बैरवा
हम दामन लिये फूल खड़े हैं तुम्हारे लिये - तुमने साजिश के कांटो को बिछाने में अपना हाँथ लहू- लुहान कर लिया।।
चाहे आ घाटी के रस्ते या सहरा-ओ-सागर से
सरहद पर मुस्तैद खड़े हैं भूखे शेर कतार से।।
तेरे चमन में भी महकेंगे खुशहाली के फूल सदा।
आकर ले जा बीज अमन के मेरे इस गुलजार से।।
उत्साहपूर्ण ललकार

लेखक – राम अवतार बैरवा – आकाशवाणी में अतिरिक्त कार्यक्रम निदेशक और बहुत अच्छे कवी हैं।
आप सभी को कारगिल विजय दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं . नाचीज 1999 में हुई इस जंग का साक्षी रहा. सीधे रणक्षेत्र में न सही पर 1999 में जब आकाशवाणी कारगिल में कोई अपनी सेवायें देने को तैयार नहीं था तब नाचीज ने आकाशवाणी कारगिल जाकर रेडियो के प्रसारणों को जारी रखा . 2014 में एक बार एक साल सेवायें देने का फिर मौक़ा मिला. 1999 में भारत- पाक जंग के दौरान लिखी गई चंद पंक्तियाँ …

बादल जितनी साजिश करले सात समंदर पार से
ये रंग बासंती नहीं मिटेगा धरती के रुखसार से।।
चाहे आ घाटी के रस्ते या सहरा-ओ-सागर से
सरहद पर मुस्तैद खड़े हैं भूखे शेर कतार से।।
जब तक हिमगिर है धरती पर तब तक सूरज चाँद हैं
चूंकि ये सब चमक रहे हैं हिमगिर की उजियार से।।
तेरे चमन में भी महकेंगे खुशहाली के फूल सदा।
आकर ले जा बीज अमन के मेरे इस गुलजार से।।
राजपथ की माटी से ओ हवा में उड़ते गुब्बारों
पैगाम हमारा मुहब्बत है ये कह देना संसार से।।
रुखसार ; गाल, हिमगिर : हिमालय
लेखक – आकाशवाणी में अतिरिक्त कार्यक्रम निर्देभक – राम अवतार बैरवा बहुत अच्छे कवी हैं।


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