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“सीमा पर तनाव है, देशवासियों में डर है… और गोदी मीडिया फेक न्यूज़ में मशगूल है!”

सीमा पर तनाव, महंगाई, बेरोजगारी, गिरती अर्थव्यवस्था पर न कोई बहस होती है, न सवाल। गोदी मीडिया की स्क्रीन पर बस चल रहा है:
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एक था पाकिस्तान: इतिहास के पन्नों में सिमटता सच

आखिर में, सिंदूर की सौगंध एक प्रतीक है - वह प्रतीक जो हमें यह याद दिलाता है कि हम अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार हैं। यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि एक वादा है
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क्या किसी की भूख की तस्वीर लेना जरूरी है? सोशल मीडिया युग में करुणा की कैद

सोचिए, अगर कोई कैमरा न हो, कोई दर्शक न हो, कोई ताली बजाने वाला न हो—क्या तब भी आप वही मदद करेंगे? यह प्रश्न हमारे भीतर झाँकने की ज़रूरत को इंगित करता है।
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सीमा पार क़ैद एक सिपाही: गर्भवती पत्नी की पुकार और हमारी चुप्पी

यह कहानी न तो किसी फिल्म की पटकथा है, न ही किसी काल्पनिक उपन्यास की घटना। यह आज के भारत की सच्चाई है, और सवाल यह है — क्या हम सब अब भी चुप रहेंगे?
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अंततः देश में जाति जनगणना: प्रतिनिधित्व या पुनरुत्थान?

वंचित समुदायों के लिए जाति जनगणना केवल गिनती नहीं है, यह उनकी दृश्यता का सवाल है। अगर समाज में कोई वर्ग आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक रूप से पिछड़ा है, तो सबसे पहले यह जानना ज़रूरी है कि वह है कहां? कितना है? डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कहा था —…
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“जोखिम ज़्यादा है, सेवानिवृत्ति के बाद नौकरी पाने की चाहत,

हमारा संविधान देश की सबसे बड़ी और सबसे ताकतवर किताब है। इसमें तीन मुख्य स्तंभ बताए गए हैं – विधायिका (संसद/विधानसभा), कार्यपालिका (सरकार), और न्यायपालिका (अदालतें)। ये तीनों एक-दूसरे से स्वतंत्र होते हैं।
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ज़श्न-ए-उर्दू 2025: अदब, तहज़ीब और मोहब्बत का कारवां

उर्दू, अदब, सभ्यता, संस्कार अब मंचो, सम्मेलनों, मुशायरों की शोभा बन कर रह गयी है, घरों से उर्दू अदब, सभ्यता, संस्कार सब गायब हो गई - दानिशमंद, बशाऊर लोगों की रखैल बन कर रह गयी।
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पाखंडी बाबा – मुख पर राम राम बगल में छुरी

बाबा यदि वाकई आत्मा की अमरता में विश्वास रखते हैं, तो उन्हें सबसे पहले वाई श्रेणी सुरक्षा का त्याग करना चाहिए — क्योंकि असली संत वही है, जो सत्य के साथ निर्भय खड़ा हो।
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पत्रकारिता के माध्यम से बाबा साहेब ने की वैचारिक क्रांति: प्रो.संजय द्विवेदी

भारतीय विदेश नीति एवं सुरक्षा, श्रम सुधारों, सिंचाई व जल प्रबंधन एवं भाषा नीति आदि सभी विषयों पर उनके विचार एवं कार्य आज भी प्रासंगिक है।
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