आखिर में, सिंदूर की सौगंध एक प्रतीक है - वह प्रतीक जो हमें यह याद दिलाता है कि हम अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार हैं। यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि एक वादा है Read More...
सोचिए, अगर कोई कैमरा न हो, कोई दर्शक न हो, कोई ताली बजाने वाला न हो—क्या तब भी आप वही मदद करेंगे? यह प्रश्न हमारे भीतर झाँकने की ज़रूरत को इंगित करता है। Read More...
यह कहानी न तो किसी फिल्म की पटकथा है, न ही किसी काल्पनिक उपन्यास की घटना। यह आज के भारत की सच्चाई है, और सवाल यह है — क्या हम सब अब भी चुप रहेंगे? Read More...
वंचित समुदायों के लिए जाति जनगणना केवल गिनती नहीं है, यह उनकी दृश्यता का सवाल है। अगर समाज में कोई वर्ग आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक रूप से पिछड़ा है, तो सबसे पहले यह जानना ज़रूरी है कि वह है कहां? कितना है? डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कहा था —… Read More...
हमारा संविधान देश की सबसे बड़ी और सबसे ताकतवर किताब है। इसमें तीन मुख्य स्तंभ बताए गए हैं – विधायिका (संसद/विधानसभा), कार्यपालिका (सरकार), और न्यायपालिका (अदालतें)। ये तीनों एक-दूसरे से स्वतंत्र होते हैं। Read More...
उर्दू, अदब, सभ्यता, संस्कार अब मंचो, सम्मेलनों, मुशायरों की शोभा बन कर रह गयी है, घरों से उर्दू अदब, सभ्यता, संस्कार सब गायब हो गई - दानिशमंद, बशाऊर लोगों की रखैल बन कर रह गयी। Read More...
बाबा यदि वाकई आत्मा की अमरता में विश्वास रखते हैं, तो उन्हें सबसे पहले वाई श्रेणी सुरक्षा का त्याग करना चाहिए — क्योंकि असली संत वही है, जो सत्य के साथ निर्भय खड़ा हो। Read More...