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विकास का इंजन, पर असुरक्षित मध्यम वर्ग – Priyanka Saurabh

भारतीय मध्यम वर्ग की सबसे बड़ी शक्ति उसकी उपभोग क्षमता है। देश में घर, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं, शिक्षा, स्वास्थ्य, बीमा, पर्यटन और डिजिटल सेवाओं की मांग का बड़ा हिस्सा इसी वर्ग से आता है। जब मध्यम वर्ग की आय बढ़ती है तो वह अधिक वस्तुओं…
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मोदी का मुखौटा – मुख पर राम राम बगल में छुरी – सऊदी के मुसलमानों से मोहब्बत और घर के…

सियासत की ताकत कुर्सियों से मिल सकती है, लेकिन दिलों पर हुकूमत सिर्फ इंसानियत करती है - अगर दिल टूट जाएं, अगर समाज बंट जाए, अगर अल्पसंख्यकों को हर वक्त अपने वजूद की सफाई देनी पड़े, तो तरक्की की चमक भी अधूरी लगती है।
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नेताओं को वेतन और भत्तों में कटौती करनी चाहिए।

संकट की इस घड़ी में जनप्रतिनिधियों का त्याग ही सच्ची राष्ट्रसेवा और लोकतांत्रिक नैतिकता की पहचान होगी। इस संकट की घड़ी में सभी नेताओं और मंत्रियों को कार पर चलना त्यागना चाहिए।
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साझा चूल्हा: संकट से समाधान की राह

यदि समाज सहयोग और साझेदारी की भावना को फिर से जीवित कर सके, तो केवल गैस सिलेंडर ही नहीं, बल्कि जीवन की कई अन्य चुनौतियाँ भी सहज रूप से हल हो सकती हैं।
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दौलत की फाइलें, भरोसे के सवाल

लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकारी पद केवल अधिकार का प्रतीक नहीं होता, बल्कि वह जिम्मेदारी और नैतिक आचरण का भी प्रतीक होता है विशेष रूप से पुलिस और प्रशासनिक सेवाओं के अधिकारी राज्य की शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं - मीडिया की भूमिका भी इस…
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हिंदी दिवस 2025 का संदेश: मातृभाषा में शिक्षा ही वास्तविक प्रगति

मातृभाषा में शिक्षा से बच्चा अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ा रहता है। जब शिक्षा सरल और बोधगम्य होगी तो बच्चे स्कूल छोड़ेंगे नहीं।
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महिलाएं को अधिकार देने के नाम पर अब वोट बैंक बना लिया गया-

भारत सरकार ने "कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013" (POSH Act) के तहत आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee - ICC) का गठन अनिवार्य किया है।
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मुस्लेमीन बिहार की नज़र अब तक इमारतें शरियाः पर टिकी

लेकिन इसके फैसलों के मज़हबी, सामाजिक और राजनीतिक असरात दूर तक जाएंगे। मुस्लिम समाज की निगाहें इस वक़्त पटना की सरज़मीं पर टिकी हुई हैं।
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बिहार को नाम नहीं, काम चाहिए: नीतीश जी, अब जनता मूर्ख नहीं है!

आपने भाजपा से ‘जुमला राजनीति’ तो सीख ली, लेकिन ये भूल गए कि बिहार के लोग अब सोशल मीडिया और ज़मीनी हकीकत – दोनों को समझने लगे हैं। उन्हें सिर्फ नाम नहीं, काम चाहिए। गयाजी बन जाने से न पर्यटन बढ़ेगा, न रोज़गार मिलेगा। बिहार को चाहिए योजनाएं,…
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