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#sahity #urdushayer #allindiamushayeraa

“लगाओ आग न उन बेमकीं मकानों को। कि शोला आप के खिरमन को भी जला देगा।।”

डॉ. अजय मालवीय "बाहर इलाहाबादी" भारतीय अस्मिता एवं संस्कृति का सम्मानजनक ढंग से हिंदी और उर्दू में समान रूप से विवेचन किया है और भारतीय संस्कृति और सभ्यता को उन्होंने इसके माध्यम से उभारा है।
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मृत्य शैय्या पर कराहती उर्दू में साहित्य अकादमी ने की जान फूंकने की कोशिश – देश भर से आमंत्रित…

भारत सरकार और राज्य सरकारें अपने अपने महकमें से उर्दू को धीरे धीरे समाप्त कर दिया है। जिन राज्यों में उर्दू को दुसरीं ज़बान अर्थात दृत्य भाषा का दर्जा दिया गया था वहां की सरकारें भी अपने विभाग से जो एक पद उर्दू अनुवादक का था उसे भी समाप्त कर…
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डॉ ज़रीन हलीम द्वारा काव्य संग्रह “आठ पहर” का  लोकार्पण।

"आठ पहर'' मेरी अंतर भावनाएँ हैं, जो मैंने अपने आस-पास देखा है, यह कविता उसी का एक प्रारूप है। अपने क़लम से उस परिदृष्य को आकार दिया है।
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