कभी कहते — "भीड़ में मरे तो मोक्ष मिलेगा",
अब कहते — "भीड़ से डर है, व्यवस्था कड़ी रखो भैया।"
क्या यही है त्याग? यही सन्यास?
या है धर्म अब एक सुरक्षित विकास? Read More...
बाबा यदि वाकई आत्मा की अमरता में विश्वास रखते हैं, तो उन्हें सबसे पहले वाई श्रेणी सुरक्षा का त्याग करना चाहिए — क्योंकि असली संत वही है, जो सत्य के साथ निर्भय खड़ा हो। Read More...
क्योंकि, पेड़ की कटाई से कई तरह के नुकसान हो रहे हैं। साइंस का मानना है कि पेड़ न रहने के कारण पर्यावरण, पारिस्थितिकी तंत्र, जलवायु और मानव जीवन पर कई प्रकार के प्रभाव होते हैं। Read More...
भारत एक ऐसा देश है जहाँ शिक्षा और स्वास्थ्य को बुनियादी अधिकार माना जाता है। लेकिन जब यही अधिकार एक व्यापार का रूप ले लें, तो आम आदमी की जिंदगी में यह अधिकार बोझ बन जाते हैं। Read More...
अब नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री का चेहरा रखना भाजपा के लिए सम्भवता मुश्किल हो, परन्तु बिहार में भाजपा के पास मुख्यमंत्री का कोई चेहरा भी नही है। Read More...
जब दलित मुस्लिम, ओबीसी मुस्लिम और पसमांदा तबक़ात आला तालीम याफ़्ता होंगे, अपनी मजबूत तन्ज़ीम बनाकर बुनियादी और आइनी हुक़ूक़ के लिए मुत्तहिद होकर जद्दोजहद करेंगे। Read More...
सरकार को तुगलकी फरमान वापस लेना चाहिए और इन कर्मचारियों के लिए नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। यदि सरकार इस दिशा में कदम नहीं उठाती, तो यह हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति पर गहरा प्रभाव डालेगा। Read More...