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अंततः देश में जाति जनगणना: प्रतिनिधित्व या पुनरुत्थान?

वंचित समुदायों के लिए जाति जनगणना केवल गिनती नहीं है, यह उनकी दृश्यता का सवाल है। अगर समाज में कोई वर्ग आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक रूप से पिछड़ा है, तो सबसे पहले यह जानना ज़रूरी है कि वह है कहां? कितना है? डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कहा था —…
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आंगन में खिलती छह ख़ुशियाँ: किसान राजेश के बच्चों की अनूठी शादी की कथा

बेटियों के विवाह की चिंता और बेटों के घर बसाने की योजना — यह सब किसी भी आम भारतीय पिता के जीवन का हिस्सा बनते हैं।
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यूपीएससी टॉपर या जाति टॉपर?: प्रतिभा गुम, जाति और पृष्ठभूमि का बाज़ार गर्म। 

हर दल, हर विचारधारा, हर वर्ग अपने-अपने टॉपर को पकड़कर झंडा उठाता है — “देखो, ये हमारा है!” किसी को सवर्ण गौरव चाहिए, किसी को दलित चमत्कार। और इस पूरे मेले में असली हीरो — यानी मेहनत और ईमानदारी — कहीं कोने में खड़ी, अकेली, उपेक्षित रह जाती…
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सिलमपुर में आपसी रंजिश के कारण हत्या – सम्परादायिक माहौल बनाने की कोशिश ?

उन्होंने और घर के सदस्यों ने पूरे मामले को इस तरह बताया- साहिल नाम के एक युवक की शंभू से पुरानी रंजिश थी। शंभू के भाई लाला ने भी साहिल को मारा था।
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एनसीपीयूएल में उठा कॉपीराइट का मुद्दा

एक पुस्तक पाठक, लेखक और प्रकाशक द्वारा बनाई गई है। कॉपीराइट मुद्दों को भी पुस्तक संस्कृति के प्रचार के साथ हल किया जाना चाहिए: डॉ. शम्स इकबाल
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पहलगाँम आतांकि हमला एक सोंची समझी साजिश तो नही?

इस हमले की जितनी भी आलोचना, जितनी भी भर्त्सना, जितनी भी निंदा की जाये कम कम ही होगी, लेकिन केंद्र सरकार को अपनी नीति सुनिश्चित करनी चाहिये, कहीं आतांकि के नाम पर किसी विशेष समुदायें के निदोष लोगों निशाना न बनाया जाने लगे। सिक्के के दो…
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“जोखिम ज़्यादा है, सेवानिवृत्ति के बाद नौकरी पाने की चाहत,

हमारा संविधान देश की सबसे बड़ी और सबसे ताकतवर किताब है। इसमें तीन मुख्य स्तंभ बताए गए हैं – विधायिका (संसद/विधानसभा), कार्यपालिका (सरकार), और न्यायपालिका (अदालतें)। ये तीनों एक-दूसरे से स्वतंत्र होते हैं।
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बिहार हज यात्रियों के साथ बिहार सरकार का सौतेला रवैया – पूरे देश मे सब से महंगा…

गया से हज यात्रा सबसे महंगी क्यूँ ?— ₹4,01,885 प्रति यात्री- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जवाब दें, आखिर गया एयरपोर्ट के हज यात्रियों को इतना महंगा यात्रा शुल्क क्यूँ?
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ज़श्न-ए-उर्दू 2025: अदब, तहज़ीब और मोहब्बत का कारवां

उर्दू, अदब, सभ्यता, संस्कार अब मंचो, सम्मेलनों, मुशायरों की शोभा बन कर रह गयी है, घरों से उर्दू अदब, सभ्यता, संस्कार सब गायब हो गई - दानिशमंद, बशाऊर लोगों की रखैल बन कर रह गयी।
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