बिहार के पत्रकार भी अब चाटुकारिता और दलाली के लाइन में?

भारत में लोकतंत्र की रीढ़ यदि संसद है, तो उसकी आत्मा पत्रकारिता है। लेकिन अफसोस, आज वही पत्रकारिता सत्ता के दरबार में सिर झुकाए बैठी है।
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पीएम मोदी के 11 वर्ष पूरा होने पर, सीएम योगी लगाए प्रदर्शनी और दिखाई उपलब्धता

उत्तर प्रदेश में सुशासन, डिजिटल परिवहन सुधार और नागरिक-केंद्रित सेवा प्रणाली के सफल क्रियान्वयन का दिखा असर*राजस्व, वाहन पंजीकरण एवं इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में व्यापक प्रगति*
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Joint campaign for tree planting, plantation by GIRD and ISLD on World Environment Day – विश्व…

इस अवसर पर 2000 पौधों का वितरण भी किया गया। GIRD और ISLD के इस प्रयास ने पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया, जो एक स्थायी कल की दिशा में सामूहिक कार्रवाई को प्रेरित करता है।
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मौलाना सैयद अबू अख़्तर क़ासमी का इंतेक़ाल, मिल्ली खेसारा*

उन्होंने इस्लाह-ए-मआशरा की एक तहरीक चलाई जिसने कई ख़ानदानों, नौजवानों और अवाम की ज़िंदगी में सकारात्‍मक तब्दीलियाँ लाईं।
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हिंदी पत्रकारिता के 200 साल

कल तक हिंदी टेक्स्ट को पढ़ने में कठिनाइयां महसूस कर रहे लोग दुनिया भर में हिंदी कंटेंट को सुन और देख रहे हैं। हिंदी पत्रकारिता देश की सबसे खास आवाज बन चुकी है।
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आसाम सरकार की मनुवादी मानसिकता, एक समुदायें को हथ्यार रखने का लाइसेंस देना, और दूसरे समुदायें से…

जमात ए इस्लामी हिन्द पत्रकारों को बिरयानी खिला कर अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की कोशिश तो करती है, परन्तु जब तक सरकार को बढ़िया से दावत न खिलायेगी तो सरकार जामात की बातें कैसे सुनेगी?
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मुस्लेमीन बिहार की नज़र अब तक इमारतें शरियाः पर टिकी

लेकिन इसके फैसलों के मज़हबी, सामाजिक और राजनीतिक असरात दूर तक जाएंगे। मुस्लिम समाज की निगाहें इस वक़्त पटना की सरज़मीं पर टिकी हुई हैं।
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