डर से पसीने में शराबोर और अचानक से पसीना सुख जाए, और बे-तहाशा हंसी आने लगे - सोंचिये उस समय का दृश्य क्या होगा?
देखने वाले पागल न कहेंगे तो और क्या कहेंगे?..... Read More...
कुल मिलाकर, सोशल मीडिया पर सक्रियता के इस नए युग में, सरकारी अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों और व्यक्तिगत छवि के बीच एक संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता है, ताकि वे न केवल लोकप्रिय हों, बल्कि प्रभावी और जिम्मेदार प्रशासक भी बने रहें। Read More...
मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह का बयान सिर्फ़ शर्मनाक नहीं है, बल्कि वह ज़हर है जिसने भारतीय राजनीत को विषैला बना दिया – जहाँ मुसलमान को देशद्रोही, और मुसलमान फ़ौजी को शक की निगाह से देखा जाता है। यह वही मानसिकता है जो “टुकड़े-टुकड़े… Read More...
نیشن فرسٹ‘ کی روح کو برقرار کھنے کے سلسلے میں ہماری غیر مشروط تائید کی توثیق ہے کیوں کہ ہم یہاں ملک کی خدمت اور اس کے لیے خود کو پابند عہد بنانے کے مقصد سے جمع ہوئے ہیں۔“ Read More...
While expressing solidarity with the martyrs, Sat Sharma emphasized the significance of martyrdom, stating, “A martyr does not belong to one family alone; he is a symbol of national pride and collective sacrifice. Bharat has the strength… Read More...