प्रथम राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय आइकॉन अवार्ड 2025,अधिवेशन

भारतीय साहित्य संस्कृति अकादमी एवं समता साहित्य अकादमी नॆ भारत की सांस्कृतिक बचाने के लिए एक नई पहल आरंभ की है जिससे समाजिक कार्यकर्ताओं का ध्यान राष्ट्र के निर्माण सहयोग करने के लिय अग्रसर रहेंगे - यह खेल भी लगता हिन्दू राशर्त के निर्माण…
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रहमान फाउंडेशन का विशेष आयोजन सैयद आसिफ इमाम काकवी और शकील अशरफी को सम्मान

आज के उपभोक्तावादी दौर में इस प्रकार की साहित्यिक-सांस्कृतिक बैठकों का अभाव हो गया है, और रहमान फाउंडेशन जैसी संस्था इस कमी को भरने का सराहनीय प्रयास कर रही है।”
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सोशल मीडिया पर देशविरोध का कारोबार: अभिव्यक्ति की आज़ादी या एजेंडा मार्केटिंग?”

कलम अब ज़िम्मेदार हो - साहित्य, पत्रकारिता, मीडिया और सोशल स्पेस — ये सब लोकतंत्र की रीढ़ हैं। लेकिन जब यही प्लेटफॉर्म विदेशी एजेंडों या राजनीतिक नफ़रत से ग्रस्त हो जाएं, तो उन्हें शुद्ध करना ही राष्ट्र की सुरक्षा का हिस्सा बन जाता है। अब…
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आज  स्वर्गीय श्री मंज़ुरुल हक की 4थी पुण्य तिथि के अवसर पर दुआओं की की दरखास्त

आज  स्वर्गीय  श्री मंज़ुरुल हक की 4थी पुण्य तिथि अवसर पर दुआओं की की दरखास्त ! अल्लाह उनकी मग़फिरत फरमाये और जन्नत उल फिरदौस मे आला मुक़म आता करे - अमीन!
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श्याम लाल कॉलेज में “भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा” पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

पहलगाम कि घटना एक पहेली सा बनगया गया है, इत्तिहास में जब बी याद किया जाएगा, तब तब कहानी में सवाल ज़रूर किया जाएगा, आखिर सरकार ने वहां पर सुरक्षा क्यूँ नही दिया?
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अंततः देश में जाति जनगणना: प्रतिनिधित्व या पुनरुत्थान?

वंचित समुदायों के लिए जाति जनगणना केवल गिनती नहीं है, यह उनकी दृश्यता का सवाल है। अगर समाज में कोई वर्ग आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक रूप से पिछड़ा है, तो सबसे पहले यह जानना ज़रूरी है कि वह है कहां? कितना है? डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कहा था —…
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