“सरकारी कत्ल -ए- आम 1984” सीखों के नरसंहार एक दर्दनाक दास्तान।
84 के दंगों की कहानी सुन कर आज भी मेरे रोंगटे खड़े हो जाते है-उस दंगे का मेरे पूर्वजो ने भी उस दर्द को झेला है - मैन सोंच लिया था इस सच्ची घटना पर में फ़िल्म बनाऊंगा - सरदार विक्रम संधू
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