परिवर्तन – यह प्रकृत्तिक का नियम भी है और समय की मांग भी!
हमदोनों का प्यार राधा-कृष्ण के प्रेम की तरह अटूट, और सच्चा था। बावजूद इसके हम कभी एक न हो सके- चोट मेरे तो दर्द उसके - कराह मेरी तो आंसू उसके - आज जुदा हो कर भी हम ज़िंदा हैं
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