आपने भाजपा से ‘जुमला राजनीति’ तो सीख ली, लेकिन ये भूल गए कि बिहार के लोग अब सोशल मीडिया और ज़मीनी हकीकत – दोनों को समझने लगे हैं। उन्हें सिर्फ नाम नहीं, काम चाहिए। गयाजी बन जाने से न पर्यटन बढ़ेगा, न रोज़गार मिलेगा। बिहार को चाहिए योजनाएं,… Read More...
उर्दू, अदब, सभ्यता, संस्कार अब मंचो, सम्मेलनों, मुशायरों की शोभा बन कर रह गयी है, घरों से उर्दू अदब, सभ्यता, संस्कार सब गायब हो गई - दानिशमंद, बशाऊर लोगों की रखैल बन कर रह गयी। Read More...
जबकि साहित्य अकादमी में उर्दू प्रसिद्ध शायर एवं उर्दू साहित्यकार गोपी चंद नारंग साहब के बाद उर्दू साहित्यकार एवं शायर जनाब चंद्रभान ख्याल साहब को ङ्कि जगह मिली तो लेकिन उर्दू सम्पादक शायेद साहित्य अकादमी को अबतक नहीं मिला? Read More...
होली, रमज़ान, या होली के दिन जुमा या कभी ईद तो कभी बख्रीद का त्योहार सदियों से साथ आता है और हम भारतीय हिंदुस्तानी इंडियन साथ मिल कर सद्भावनापूर्ण, सौहार्दपूर्ण मिल कर खुशयां बांटते आये हैं। Read More...