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*किसानों की आवाज बुलंद करना पुरूषोत्तम कौशिक की आजीवन प्राथमिकता रही*

लोभ, लालच सत्ता की धमक और चमक से प्रभावित हुए बिना, बिना कोई सैद्धांतिक समझौते के उन्होंने जीवन जीकर कबीर की इस पंक्ति को चरितार्थ किया- 'जस की तस धर दीनी चदरिया'।
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एनसीपीयूएल में हिंदी पखवाड़ा के अवसर पर निबंध प्रतियोगता का आयोजन

भाषाएं एक दूसरे को जोड़ने का काम करती हैं। जो लोग हिन्दी भाषा से परिचित हैं, उन्हें कार्यालय का कार्य भी हिन्दी में करना चाहिए।
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वक़्फ़ बोर्ड संशोधन बिल से किसी गरीब मुसलमानों को कोई लाभ हैं न नुकसान,

सूफीशाह-मलंग (फकीर) समुदाय की भारतीय पुस्तैनी नया वक्फ बोर्ड संशोधन बिल में एक अलग से औकाफ बोर्ड बनाये जाने की भी मांग करता है।
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कुआर आ गया है!!

पितृ पक्ष के दौरान पुरखों को पूजने, उनका श्राध्द करने के पश्चात त्यौहारों का मौसम शुरू हो जाएगा। चौमासा बीतते ही लग्न, पाणिग्रहण के पवित्र दिन आने वाले हैं।
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टीम प्रशांत किशोर पांडेय की सोच क्या है और आप का उस के साथ खड़ा होना कितना ठीक है।

भीड़ का हिस्सा बनना आप के लिए कितना खतरनाक है, जिसने आप की सियासी हैसियत खत्म कर दी है फिर भी आप भीड़ के पीछे भाग रहे हो क्यों ??
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एक देश एक चुनाव सोंचने आसान – करना मुश्किल है

यदि अभी तुरंत में छह माह पहले 2026 और 2027 राज्य विस के चुनाव कराये जायें और फिर अगला कार्यकाल भी छह माह या साल तक छोटा रखा जा सके तो 2029 के बाद 2034 में इनके चुनाव एक साथ किया जा सकेगें।
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वक़्फ़ बिल पर हंगामा क्यूँ? अपने गृहबान मे झांके मुसलमानों रहबर।

आज नौबत यह आ गई कि वक़्फ़ को बचाने के लिए सब लोग आ गए वक़्फ़ की जो यह नौबत आई उसमें मुख्य कारण हमलोग ख़ुद है , सुनकर पढ़कर मेरी बात जरूर बुरी लगी होगी
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