यह महोत्सव हिंदी भाषा के वैश्विक प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को उजागर करेगा। Read More...
शेखर अस्तित्व ने अपने मंतव्य में बच्चों को स्वरचित गीत सुनाया तथा अपने जीवन के उतर-चढ़ाव और एक सफल गीतकार बनने तक के अनुभवों को साझा भी किया। छात्रों को शिक्षा के साथ अपने हुनर को परखने और उसे निरंतर मांजने की प्रेरणा भी दी। ``` Read More...
अच्युतानंद मिश्र ने अपनी सद्यः प्रकाशित पुस्तक ‘तीन श्रेष्ठ कवियों का हिंदी पत्रकारिता में अवदान’ में किया है। वे हैं- सच्चिदानंद हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय', रघुवीर सहाय और धर्मवीर भारती। Read More...
हिंदी भाषा के महत्व पर भी गंभीर चर्चा की गई।
हिंदी केवल एक दिन की भाषा नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे हमारे दैनिक जीवन में आत्मसात करना चाहिए। Read More...
आज ही के दिन 1949 को देश की राष्ट्र भाषा हेतु मतदान हुआ था और हिंदी उर्दू दोनों के पक्ष में बराबर बराबर मत पड़े थे परन्तु देश के पहले राष्ट्रपति ने अपना एक मत हिंदी के पक्ष में दिया था Read More...
बुआ और दादी दादी हमेशा मुझसे कहते थे कि, हम सब तुम्हें डाक्टर बने देखना चहते है, हमारे सारे सपने तुमसे ही जुड़े है क्योंकि तुम मेरे बेटे की इकलौती संतान हो । Read More...