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Sahitya

एनबीटीआई द्वारा आयोजित ‘वर्तमान परिवेश में हिंदी की प्रासंगिकता’ पर व्याख्यान

हम इसे राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोने वाली भाषा के रूप में याद रखते हैं, क्योंकि उसमें विचारों के साथ संबंध बनाने की ताकत है।
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आखिर कबतक? हम परिवार के महत्व को अनदेखा करेगे।

स्वार्थ में हम इस तरह स्वयं में सिमट गए है कि,खुद से ऊपर कुछ देखना ही नही चाहते परिवार के लोगों की सलाह या जिम्मेदारी हमें कुछ भी अच्छा नही लगता? अब प्रश्न आखिर कबतक ??
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द्वितीय राष्ट्रीय व्याख्यानमाला एवं साहित्यकार सम्मान समारोह

साहित्य का मूल उद्देश्य ही लोक मंगल है। पिछले कुछ वर्षो में भारत अपनी जड़ों की तरफ वापसी कर रहा है। यह 'विचारों की घर वापसी का समय' है।
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ग़ालिब इंस्टीट्यूट को एक्सेलेंसी पुरस्कार से सम्मानित किया।

सर सैयद अकादमी के निदेशक और यहूदियों के संयोजक प्रो. शफ़ी क़दवई ने कहा कि ग़ालिब संस्थान मिस्र में सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक और सांस्कृतिक संगठनों में से एक है
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हिंदी एकेडमी दिल्ली-हंसराज कॉलेज का संयुक्त हिंदी पखवाड़ा -2024, वाद – विवाद प्रतियोगिता

इस तरह की वाद-विवाद प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों के अंदर हिंदी भाषा को सुनने, समझने, बोलने, लिखने पढ़ने के संस्कारों को भरा जा सकता है
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एनसीपीयूएल में हिंदी पखवाड़ा के अवसर पर निबंध प्रतियोगता का आयोजन

भाषाएं एक दूसरे को जोड़ने का काम करती हैं। जो लोग हिन्दी भाषा से परिचित हैं, उन्हें कार्यालय का कार्य भी हिन्दी में करना चाहिए।
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विश्व स्तरीय उर्दू शिक्षण ऐप की आवश्यकता: डॉ. शम्स इकबाल

राष्ट्रीय उर्दू परिषद में उर्दू भाषा सीखने की मोबाइल ऐप सामग्री विकसित करने के लिए दो दिवसीय कार्यशाला-हमारा ऐप बहुउद्देश्यीय होना चाहिए ताकि बच्चे और वयस्क दोनों इसका उपयोग कर सकें।
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कुआर आ गया है!!

पितृ पक्ष के दौरान पुरखों को पूजने, उनका श्राध्द करने के पश्चात त्यौहारों का मौसम शुरू हो जाएगा। चौमासा बीतते ही लग्न, पाणिग्रहण के पवित्र दिन आने वाले हैं।
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एक देश एक चुनाव सोंचने आसान – करना मुश्किल है

यदि अभी तुरंत में छह माह पहले 2026 और 2027 राज्य विस के चुनाव कराये जायें और फिर अगला कार्यकाल भी छह माह या साल तक छोटा रखा जा सके तो 2029 के बाद 2034 में इनके चुनाव एक साथ किया जा सकेगें।
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