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National Urdu Council’s Three-Day Seminar Titled ‘Future of Urdu Language in the Context…

دستور ہند کے آرٹیکل 29 میں کسی بھی سماجی طبقے کو اپنی زبان اور تہذیب کے تحفظ کا حق حاصل ہے اور اس کا استعمال کرتے ہوئے ہم اپنی زبان کے تحفظ و فروغ کے لیے کلیتاً آزاد ہیں، بلکہ اس کے لیے احتجاج بھی کر سکتے ہیں ۔ پروفیسر فیضان مصطفی نے کہا کہ…
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कौन जानता है की मौत कहां खड़ी है और दलदल कहां है – रोज़गार की तलाश में तो निकलना ही पड़ता है।

भारत को अगर सच्चे मायनों में “विश्वगुरु” बनना है, तो पहले उसे अपने युवाओं को गुरबत, ग़ुलामी और गोली से आज़ादी दिलानी होगी।
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मुस्लेमीन बिहार की नज़र अब तक इमारतें शरियाः पर टिकी

लेकिन इसके फैसलों के मज़हबी, सामाजिक और राजनीतिक असरात दूर तक जाएंगे। मुस्लिम समाज की निगाहें इस वक़्त पटना की सरज़मीं पर टिकी हुई हैं।
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बिहार को नाम नहीं, काम चाहिए: नीतीश जी, अब जनता मूर्ख नहीं है!

आपने भाजपा से ‘जुमला राजनीति’ तो सीख ली, लेकिन ये भूल गए कि बिहार के लोग अब सोशल मीडिया और ज़मीनी हकीकत – दोनों को समझने लगे हैं। उन्हें सिर्फ नाम नहीं, काम चाहिए। गयाजी बन जाने से न पर्यटन बढ़ेगा, न रोज़गार मिलेगा। बिहार को चाहिए योजनाएं,…
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“सीमा पर तनाव है, देशवासियों में डर है… और गोदी मीडिया फेक न्यूज़ में मशगूल है!”

सीमा पर तनाव, महंगाई, बेरोजगारी, गिरती अर्थव्यवस्था पर न कोई बहस होती है, न सवाल। गोदी मीडिया की स्क्रीन पर बस चल रहा है:
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ज़श्न-ए-उर्दू 2025: अदब, तहज़ीब और मोहब्बत का कारवां

उर्दू, अदब, सभ्यता, संस्कार अब मंचो, सम्मेलनों, मुशायरों की शोभा बन कर रह गयी है, घरों से उर्दू अदब, सभ्यता, संस्कार सब गायब हो गई - दानिशमंद, बशाऊर लोगों की रखैल बन कर रह गयी।
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बिहार दिवस: गौरवशाली इतिहास और उज्जवल भविष्य का प्रतीक

इतिहास गवाह है कि बिहार ने हर कठिन परिस्थिति में अपनी राह खुद बनाई है। चाहे स्वतंत्रता संग्राम हो या सामाजिक सुधार की बात, बिहारवासियों ने सदैव अपने संघर्ष से मिसाल पेश की है।
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रहमानी 30 के कामयाबी के बढ़ते क़दम !

यह हदीसें बताती हैं कि व्यापार और वित्तीय प्रबंधन सिर्फ आर्थिक गतिविधियाँ नहीं, बल्कि इस्लाम में बहुत सम्मानजनक पेशे हैं, अगर उन्हें ईमानदारी और सच्चाई से किया जाए।
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होली, ईद, दीपाली आपसी भाईचारा प्यार सौहार्द और सद्भावना का प्रतीक है , न कि नफरत फैलाने का।

होली, रमज़ान, या होली के दिन जुमा या कभी ईद तो कभी बख्रीद का त्योहार सदियों से साथ आता है और हम भारतीय हिंदुस्तानी इंडियन साथ मिल कर सद्भावनापूर्ण, सौहार्दपूर्ण मिल कर खुशयां बांटते आये हैं।
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