मुस्लेमीन बिहार की नज़र अब तक इमारतें शरियाः पर टिकी

लेकिन इसके फैसलों के मज़हबी, सामाजिक और राजनीतिक असरात दूर तक जाएंगे। मुस्लिम समाज की निगाहें इस वक़्त पटना की सरज़मीं पर टिकी हुई हैं।
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Protests on Domino’s support in support of Palestine!

इज़रायल द्वारा सभी प्रकार की सहायता पर रोक लगा दी गयी है और गाज़ा की जनता को योजनाबद्ध ढंग से भूखा मरने के लिए छोड़ दिया गया है।
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Kapkapiii Movie Press Conference held in Delhi

डर से पसीने में शराबोर और अचानक से पसीना सुख जाए, और बे-तहाशा हंसी आने लगे - सोंचिये उस समय का दृश्य क्या होगा? देखने वाले पागल न कहेंगे तो और क्या कहेंगे?.....
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ज़िन्दगी का सफर – है यह कैसा सफर?

भारत मे घरेलू महिलाओं की ज़िंदगी - चाहे वह अमीर हो या चाहे गरीब हो। कशमकश में ही गुजरती है - बिहार में महिलाओं पर यह भी मिसाल बड़ा प्रचलित है, " बेलदार की बेटी ने नहिरे सुख न सौहरे सुख",,,,...
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आईएएस-आईपीएस अधिकारी और सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव

कुल मिलाकर, सोशल मीडिया पर सक्रियता के इस नए युग में, सरकारी अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों और व्यक्तिगत छवि के बीच एक संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता है, ताकि वे न केवल लोकप्रिय हों, बल्कि प्रभावी और जिम्मेदार प्रशासक भी बने रहें।
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बिहार को नाम नहीं, काम चाहिए: नीतीश जी, अब जनता मूर्ख नहीं है!

आपने भाजपा से ‘जुमला राजनीति’ तो सीख ली, लेकिन ये भूल गए कि बिहार के लोग अब सोशल मीडिया और ज़मीनी हकीकत – दोनों को समझने लगे हैं। उन्हें सिर्फ नाम नहीं, काम चाहिए। गयाजी बन जाने से न पर्यटन बढ़ेगा, न रोज़गार मिलेगा। बिहार को चाहिए योजनाएं,…
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