लालची नेता और बिकता पत्रकार,मिलकर कर रहे देश का बंटाधार*
आजाद भारत में नेता और पत्रकारों की जिम्मेदारी*
आजादी के बाद नेता का धर्म था—संविधान, समानता और देश की एकता। पत्रकार का कर्तव्य था—डर के बिना सवाल, दबाव के बिना सच और सत्ता के सामने सीधी आंख।
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